मसूरी की भागदौड़ से दूर एक शांत ठिकाना
जब भी हम मसूरी जाने का प्लान बनाते हैं, तो सबसे पहले दिमाग में मॉल रोड की गहमागहमी और केम्प्टी फॉल की भीड़ का ख्याल आता है। लेकिन अगर आप पहाड़ों की रानी का असली सुकून महसूस करना चाहते हैं, तो आपको भीड़ से हटकर कुछ अलग रास्तों को तलाशना होगा। देहरादून से शहंशाही आश्रम होते हुए जाने वाला 'किंग्रेग-झड़ीपानी मार्ग' आज भी अपनी उसी पुरानी शांत आभा को संजोए हुए है। यह रास्ता उन सैलानियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है जो ट्रैफिक के शोर और व्यावसायिक भीड़ से कोसों दूर रहना पसंद करते हैं।
अंग्रेजों का पसंदीदा पिकनिक डेस्टिनेशन
इतिहास के पन्नों को पलटें तो पता चलता है कि यह मार्ग अंग्रेजों के शासनकाल में बहुत खास हुआ करता था। उस समय ब्रिटिश अधिकारी और उनके परिवार अपने व्यस्त और तनावपूर्ण जीवन से ब्रेक लेने के लिए इसी किंग्रेग-झड़ीपानी रास्ते का रुख करते थे। यहां के घने जंगलों के बीच उन्होंने अपने पिकनिक के ठिकाने बनाए थे। आज जब मसूरी के मुख्य मार्गों पर गाड़ियों की लंबी कतारें और हॉर्न का शोर एक आम समस्या बन चुका है, तब यह ऐतिहासिक मार्ग पर्यटकों के लिए शांति का एक दुर्लभ विकल्प बनकर उभरा है। यहाँ पहुँचते ही आपको मसूरी का वही पुराना स्वरूप दिखाई देगा, जिसकी वजह से इसे पहाड़ों की रानी का दर्जा मिला है।
झड़ीपानी वॉटरफॉल की प्राकृतिक सुंदरता
इस पूरे मार्ग का मुख्य आकर्षण यहाँ का प्राचीन झड़ीपानी वॉटरफॉल है। आज के समय में अधिकांश पर्यटक स्थलों का व्यावसायीकरण हो चुका है, जहाँ चारों तरफ दुकानों और भीड़ का बोलबाला होता है, लेकिन झड़ीपानी फॉल ने आज भी अपनी सादगी और शुद्धता को बरकरार रखा है। यहाँ आपको व्यावसायिक शोर नहीं, बल्कि ऊँची पहाड़ियों से गिरते झरने की कलकल ध्वनि सुनाई देगी। यहाँ की शांत फिजाओं में पक्षियों का चहचहाना किसी संगीत जैसा अनुभव देता है। यह स्थान उन लोगों के लिए जन्नत है जो गंदगी और भीड़ से दूर रहकर प्रकृति की गोद में बैठना चाहते हैं।
प्रकृति प्रेमियों के लिए एक ऑफबीट अनुभव
देहरादून से लगभग 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह स्थान वीकेंड के दौरान भी अपने आप में एक अलग मिजाज रखता है। यदि आप मसूरी जाने का इरादा रखते हैं, तो इस रूट को अपनी सूची में जरूर शामिल करें। यहाँ फैले बांज और बुरांश के घने जंगल आँखों को बेहद सुकून पहुँचाते हैं। यह जगह उन मुसाफिरों के लिए सबसे उपयुक्त है जो केवल सेल्फी खींचने या फोटो पॉइंट ढूँढने के बजाय प्रकृति को करीब से महसूस करना चाहते हैं। यहाँ के शांत वातावरण में बिताए गए कुछ पल आपके मन और मस्तिष्क को नई ऊर्जा से भर देंगे।
कैसे पहुँचें और क्यों है यह खास
अगर आप देहरादून से आ रहे हैं, तो शहंशाही आश्रम के रास्ते से होते हुए आप आसानी से झड़ीपानी की ओर बढ़ सकते हैं। यह रास्ता न केवल कम भीड़भाड़ वाला है, बल्कि यहाँ से दिखने वाले प्राकृतिक नजारे भी मनमोहक हैं। जो लोग ऑफबीट डेस्टिनेशन की तलाश में रहते हैं, उनके लिए यह जगह किसी खजाने से कम नहीं है। तो इस बार जब आप मसूरी की यात्रा की योजना बनाएं, तो मॉल रोड के ट्रैफिक से बचने के लिए झड़ीपानी के इस शांत और ऐतिहासिक मार्ग का आनंद जरूर लें।
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