बुंदेलखंड की बदल जाएगी तस्वीर, कानपुर-कबरई के बीच बनेगा 117.7 किमी लंबा फोरलेन हाईवे

केंद्र सरकार ने कानपुर से कबरई तक के सफर को आसान बनाने के लिए 7,145.14 करोड़ रुपये की लागत वाले फोरलेन हाईवे प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। इस सड़क के बनने से यात्रा का समय घटकर मात्र 90 मिनट रह जाएगा।

कानपुर-कबरई हाईवे को मिली मंजूरी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति की बैठक में उत्तर प्रदेश के बुनियादी ढांचे को लेकर एक बड़ा निर्णय लिया गया है। इस बैठक में कानपुर और कबरई के बीच एक अत्याधुनिक फोरलेन हाईवे के निर्माण को हरी झंडी दे दी गई है। यह परियोजना न केवल उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बीच की कनेक्टिविटी को सुधारेगी, बल्कि क्षेत्र के औद्योगिक विकास में भी नई जान फूंकने का काम करेगी। कुल 117.7 किलोमीटर लंबे इस एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे के निर्माण पर 7,145.14 करोड़ रुपये की धनराशि खर्च की जाएगी।

परियोजना की प्रमुख विशेषताएं

इस प्रोजेक्ट का खाका भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। वर्तमान में इसे फोरलेन के रूप में विकसित किया जा रहा है, लेकिन इसका डिजाइन कुछ इस तरह से बनाया गया है कि आने वाले समय में ट्रैफिक का दबाव बढ़ने पर इसे आसानी से 6 लेन तक विस्तारित किया जा सके। इस मार्ग को 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार के अनुकूल डिजाइन किया गया है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी NHAI इस परियोजना को बिल्ड ऑपरेट ट्रांसफर (BOT) मोड पर लागू करेगा। इसके अलावा, मौजूदा NH-34 के कानपुर-कबरई खंड का संचालन और रखरखाव भी इसी मॉडल के तहत किया जाएगा।

सफर के समय में भारी कटौती

इस हाईवे के निर्माण के बाद यात्रियों और माल ढुलाई में लगे वाहनों को सबसे बड़ा लाभ मिलने वाला है। अभी इस रास्ते को तय करने में करीब 3.5 घंटे का समय लग जाता है, जो हाईवे बनने के बाद सिमटकर सिर्फ 1.5 घंटे यानी 90 मिनट रह जाएगा। समय की यह बचत व्यापारिक गतिविधियों को गति प्रदान करेगी और लॉजिस्टिक्स की लागत में उल्लेखनीय कमी लाएगी।

व्यापार और खनन क्षेत्र को बड़ा सहारा

कबरई का इलाका मुख्य रूप से गिट्टी और कंक्रीट जैसे निर्माण सामग्री का बड़ा केंद्र माना जाता है। यहां से भारी मात्रा में सामग्री कानपुर, भोपाल और अन्य बड़े शहरों में भेजी जाती है। वर्तमान में भारी वाहनों के दबाव और ट्रैफिक जाम के कारण ढुलाई में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। यह नया हाईवे कबरई माइनिंग बेल्ट तक पहुंच को बेहद सुगम बना देगा। इससे खनिज, औद्योगिक उत्पाद और कृषि उपज को कम समय में मंडियों और औद्योगिक केंद्रों तक पहुंचाना आसान होगा। यह सड़क मार्ग न केवल उत्तर प्रदेश को बल्कि मध्य प्रदेश के सागर और भोपाल जैसे प्रमुख शहरों को भी तेजी से जोड़ेगा।

जुड़ने वाले महत्वपूर्ण मार्ग

यह प्रस्तावित कॉरिडोर कई अहम सड़कों और एक्सप्रेसवे को आपस में जोड़ने का काम करेगा। इनमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित मार्ग शामिल हैं:

  • NH-34 और NH-35
  • बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे
  • कानपुर रिंग रोड
  • SH-46, SH-91, SH-10B और SH-42

प्रधानमंत्री गतिशक्ति योजना और आर्थिक नोड्स

यह परियोजना प्रधानमंत्री गतिशक्ति योजना का एक अभिन्न हिस्सा है। इसके माध्यम से 16 प्रमुख आर्थिक केंद्रों को आपस में जोड़ा जाएगा, जिससे औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। इन नोड्स में उन्नाव, बंथर, पंखी, रनिया, जैनपुर, रूमा, चकेरी, सुमेरपुर, भुरगढ़ इंडस्ट्रियल एरिया, ट्रांस गंगा इंटीग्रेटेड टाउनशिप, ग्रोथ सेंटर जयपुर और कानपुर नगर नोड जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं।

पर्यटन और लॉजिस्टिक्स को मिलेगा बढ़ावा

औद्योगिक लाभ के अलावा, यह हाईवे पर्यटन की दृष्टि से भी मील का पत्थर साबित होगा। यह कॉरिडोर कुल 9 सामाजिक और पर्यटन स्थलों को कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। इनमें फतेहपुर, महोबा, कानपुर जूलॉजिकल पार्क, बुद्ध पार्क, जेके मंदिर और गार्डन, राधा कृष्ण मंदिर, सिद्धेश्वर महादेव मंदिर, गोपेश्वर मंदिर और महोबा के अन्य दर्शनीय स्थल शामिल हैं। इसके साथ ही, यह परियोजना 10 प्रमुख लॉजिस्टिक्स नोड्स को भी नई मजबूती देगी, जिनमें कानपुर, घाटमपुर, हमीरपुर, महोबा, कबरई, भरवा सुमेरपुर रेलवे स्टेशन, बांदा रेलवे स्टेशन, कानपुर एयरपोर्ट, चकेरी एयरपोर्ट और खजुराहो एयरपोर्ट शामिल हैं। यह पूरा नेटवर्क देश की सप्लाई चेन को मजबूत करने और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को नई दिशा देने के लिए एक बड़ी पहल है।

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