पटना में फलों का नया ट्रेंड
बिहार की राजधानी पटना के बाजारों में इन दिनों फलों को लेकर एक खास स्थिति देखने को मिल रही है। शहर के लोग बाजार में जो नारंगी रंग का फल संतरा समझकर खरीद रहे हैं, असल में वह संतरा है ही नहीं। इन दिनों पटना की मंडियों में दक्षिण अफ्रीका और मिस्र से आयात किया गया माल्टा बड़ी मात्रा में पहुंच रहा है, जिसे दुकानदार संतरे के नाम पर ग्राहकों को बेच रहे हैं। पटना फ्रूट एंड वेजिटेबल एसोसिएशन के अध्यक्ष शशिकांत प्रसाद के अनुसार, इस समय संतरे का सीजन नहीं है, इसलिए बाजार में जो कुछ भी संतरे जैसा दिख रहा है, वह वास्तव में विदेशों से मंगाया गया माल्टा ही है।
माल्टा की भारी खपत और लोकप्रियता
पटना में इस विदेशी फल की मांग का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि फिलहाल शहर में रोजाना करीब 100 से 150 टन माल्टा की खपत हो रही है। आम लोगों से लेकर शहर के बड़े नामी-गिरामी लोग और सेलिब्रिटी भी इस फल को खूब पसंद कर रहे हैं। हालांकि, ज्यादातर ग्राहकों को इस बात की जानकारी नहीं है कि वे क्या खा रहे हैं। जब ग्राहक दुकान पर संतरा मांगते हैं, तो दुकानदार बिना किसी स्पष्टीकरण के उन्हें माल्टा पकड़ा देते हैं। इसका उपयोग जूस निकालने से लेकर सीधे फल के तौर पर खाने में भी खूब किया जा रहा है।
आखिर क्या है माल्टा और इसका इतिहास
विशेषज्ञों के मुताबिक, माल्टा एक खट्टा-मीठा साइट्रस फल है, जो बाहरी बनावट में पूरी तरह संतरे जैसा प्रतीत होता है। यही कारण है कि आम खरीदार दोनों के बीच का अंतर नहीं समझ पाते। इसके स्वाद को लेकर चर्चा करें तो यह संतरा और मौसमी के बीच का स्वाद देता है, जिसके चलते कई लोग इसे इन दोनों फलों की एक क्रॉस ब्रीड वैरायटी भी मानते हैं। पटना के बाजारों में माल्टा का आना कोई नई बात नहीं है, लगभग 20 साल पहले से ही यह फल राजधानी के लोगों की पसंद बना हुआ है। यह दिखने में काफी आकर्षक, स्वाद में मीठा और स्वास्थ्य के लिए काफी पौष्टिक माना जाता है।
संतरा और माल्टा में मुख्य अंतर
यदि आप भी बाजार में फल खरीदते समय भ्रमित हो जाते हैं, तो इन प्रमुख बिंदुओं पर गौर करें, जिनसे आप संतरा और माल्टा में फर्क पहचान सकते हैं:
- स्वाद का अंतर: संतरा अमूमन काफी मीठा होता है, जबकि माल्टा के स्वाद में हल्की खटास रहती है और यह संतरे की तुलना में कम मीठा होता है।
- रस की मात्रा: माल्टा में संतरे के मुकाबले रसीलापन अधिक होता है, इसीलिए इसे जूस के लिए ज्यादा उपयुक्त माना जाता है।
- छिलके की बनावट: माल्टा का छिलका संतरे की तुलना में काफी मोटा और सख्त होता है, जबकि संतरे का छिलका पतला और आसानी से छिलने वाला होता है।
- आंतरिक संरचना: संतरे की फांकें बड़ी आसानी से एक-दूसरे से अलग हो जाती हैं, वहीं माल्टा का गूदा थोड़ा अधिक सघन और सख्त हो सकता है।
- रंग की पहचान: संतरे के रंग में कई बार हरापन और नारंगीपन का मिश्रण होता है, जबकि माल्टा पूरी तरह से गहरे नारंगी रंग का होता है।
कीमतों में भी है बड़ा फासला
बाजार में संतरे और माल्टा की कीमतों में भी काफी अंतर देखने को मिलता है। फिलहाल थोक बाजार में माल्टा 80 से 120 रुपये प्रति किलो के भाव से बिक रहा है, जबकि सामान्य सीजन में संतरे की कीमत 40 से 60 रुपये प्रति किलो के आसपास रहती है। शशिकांत प्रसाद ने स्पष्ट किया है कि चूँकि अभी संतरे का सीजन ही नहीं है, इसलिए बाजार में मौजूद हर नारंगी फल माल्टा ही है।
विदेशी फलों का केंद्र बना पटना
पटना का बाजार समिति परिसर अब विदेशी फलों का बड़ा केंद्र बन चुका है। यहां केवल दक्षिण अफ्रीका या मिस्र का ही नहीं, बल्कि न्यूजीलैंड, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और ब्राजील जैसे देशों से भी उच्च गुणवत्ता वाले फल भारी मात्रा में पहुंच रहे हैं। पटना के लोग इन विदेशी फलों को बड़ी उत्सुकता और चाव के साथ अपना रहे हैं, जिससे विदेशी फलों का कारोबार शहर में लगातार फल-फूल रहा है। फिलहाल, ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि फल खरीदते समय उसके स्वाद और छिलके की मोटाई को जरूर परखें ताकि वे अपनी पसंद के सही फल का चुनाव कर सकें।
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