सावन और खानपान के नियम
सावन का महीना भगवान शिव की आराधना और भक्ति के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दौरान भक्त न केवल मन की शांति के लिए पूजा-पाठ करते हैं, बल्कि सात्विक जीवनशैली का पालन भी करते हैं। सावन की शुरुआत के साथ ही लोग अपने खानपान को लेकर काफी सतर्क हो जाते हैं। आमतौर पर लोग इस पूरे महीने प्याज और लहसुन जैसी तामसिक चीजों के साथ-साथ मांसाहार से पूरी तरह दूरी बना लेते हैं। हालांकि, इन चीजों के अलावा एक और आम खाद्य पदार्थ है जिसे सावन के दौरान खाने की मनाही होती है, और वह है कढ़ी। क्या आपने कभी सोचा है कि सावन में कढ़ी-चावल खाने से परहेज क्यों किया जाता है? क्या इसके पीछे केवल धार्मिक मान्यताएं हैं या फिर इसके पीछे कोई पुख्ता वैज्ञानिक कारण भी छुपा है?
कढ़ी से परहेज की धार्मिक मान्यता
ऋषिकेश के ज्योतिषी अखिलेश पांडेय ने इस विषय पर विस्तार से जानकारी दी है। उनके अनुसार, सावन भगवान शिव को अत्यधिक प्रिय है और यह महीना पूरी तरह से श्रद्धा और शुद्धता को समर्पित होता है। धार्मिक दृष्टिकोण से इस दौरान शरीर की आंतरिक और बाह्य शुद्धि का अत्यधिक महत्व है, इसीलिए सात्विक भोजन करने पर जोर दिया जाता है। कढ़ी बनाने की मुख्य सामग्री दही है, जिसका स्वाद प्राकृतिक रूप से खट्टा होता है। मान्यताओं के अनुसार, सावन के पवित्र दिनों के दौरान खट्टे खाद्य पदार्थों का सेवन कम करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि सात्विक व्रत और पूजा-पाठ के दौरान संयमित आहार लेने से ही आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होते हैं और मन एकाग्र रहता है। यही कारण है कि कई घरों में सावन के पूरे 30 दिनों तक कढ़ी बनाने और खाने से बचा जाता है।
आयुर्वेद और विज्ञान का नजरिया
धार्मिक मान्यताओं से इतर, इस परंपरा के पीछे बेहद ठोस आयुर्वेदिक और वैज्ञानिक आधार भी हैं। आयुष डॉक्टर राजकुमार का कहना है कि बरसात के मौसम में प्रकृति में बड़े बदलाव होते हैं, जिनका सीधा प्रभाव हमारे स्वास्थ्य पर पड़ता है। बारिश के मौसम में हवा में नमी का स्तर बहुत अधिक हो जाता है, जिससे बैक्टीरिया और फंगस तेजी से पनपने लगते हैं। इस मौसम में दूध और दही जैसे डेयरी उत्पादों के खराब होने की संभावना बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। यदि दही बहुत ताजा न हो या उसे रखने में थोड़ी भी चूक हो जाए, तो वह सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है। ऐसे में कढ़ी का सेवन करने से फूड पॉइजनिंग या पेट के गंभीर संक्रमण का खतरा बना रहता है।
कमजोर पाचन शक्ति का कारण
आयुर्वेद के सिद्धांतों के मुताबिक, वर्षा ऋतु के दौरान मानव शरीर की पाचन अग्नि यानी मेटाबॉलिज्म काफी कमजोर हो जाती है। इस समय भारी, मसालेदार या अधिक खट्टा भोजन पचाने में शरीर को बहुत मेहनत करनी पड़ती है। अगर इस दौरान कढ़ी जैसी भारी चीजें खाई जाती हैं, तो यह पाचन तंत्र पर अतिरिक्त दबाव डालती हैं। इसके परिणामस्वरूप पेट में गैस बनना, अपच, एसिडिटी और तेज पेट दर्द जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। हमारे पूर्वजों और बुजुर्गों ने इन स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को समझते हुए ही सावन में कढ़ी से परहेज करने का नियम बनाया था। सलाह दी जाती है कि इस मौसम में हमेशा हल्का, ताजा और सुपाच्य भोजन ही करना चाहिए ताकि शरीर स्वस्थ रहे और बीमारियों से बचा जा सके।
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