दान की पारदर्शिता पर उठा बड़ा सवाल
अयोध्या के श्रीराम मंदिर में दान के चढ़ावे से जुड़ी चोरी की घटना सामने आने के बाद देशभर के प्रमुख धार्मिक स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था पर नए सिरे से चर्चा शुरू हो गई है। इसी क्रम में अब मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में भी दान स्वरूप मिलने वाली कीमती वस्तुओं, सोने और चांदी के आभूषणों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं जताई जा रही हैं। मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए जाने वाले दान में पूर्ण पारदर्शिता बनी रहे, इसके लिए स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक सक्रियता बढ़ गई है।
महापौर की प्रशासन से सख्त मांग
इस पूरे मामले को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए उज्जैन के महापौर मुकेश टटवाल ने जिला कलेक्टर को एक आधिकारिक पत्र लिखा है। महापौर ने अपनी मांग में स्पष्ट रूप से कहा है कि मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किए जाने वाले सोने, चांदी, नकद राशि और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं का पूर्ण पारदर्शी तरीके से सत्यापन किया जाना आवश्यक है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया है कि जनता को यह पता होना चाहिए कि उनके द्वारा दिए गए दान का उपयोग किस प्रकार और किन उद्देश्यों की पूर्ति के लिए किया जा रहा है। महापौर ने पूर्व में गठित की गई एक समिति को पुन: सक्रिय करने और इस विषय में ठोस कदम उठाने का आग्रह किया है ताकि दान की गई सामग्री की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
पुराने हादसों से सबक और ऐप की आवश्यकता
लगभग 10 वर्ष पहले महाकाल मंदिर में तांबा चोरी का एक बड़ा मामला सामने आया था, जिसने मंदिर प्रबंधन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए थे। उस घटना के बाद से ही आभूषणों की सुरक्षा को लेकर चर्चाएं होती रही हैं। वर्तमान स्थिति यह है कि श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए स्वर्ण, रजत या अन्य धातुओं के आभूषणों को मंदिर के रजिस्टर में केवल 'कीमती धातु जैसा' लिखकर दर्ज कर दिया जाता है। इस प्रक्रिया को लेकर आशंका जताई जा रही है कि कहीं असली आभूषणों की जगह नकली जेवरात तो नहीं रख दिए जा रहे हैं। इसी आशंका को दूर करने के लिए महापौर मुकेश टटवाल ने सुझाव दिया है कि दान संबंधी जानकारी को सार्वजनिक करने के लिए एक विशेष डिजिटल ऐप तैयार किया जाना चाहिए। इससे दानदाता आसानी से अपने द्वारा दिए गए दान और उसके उपयोग के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।
मंदिर प्रशासन का अपना पक्ष
वहीं, दूसरी ओर महाकाल मंदिर प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अपना पक्ष रखा है। मंदिर के सहायक प्रशासक के अनुसार, श्रद्धालुओं द्वारा मंदिर में जो भी आभूषण या कीमती वस्तुएं चढ़ाई जाती हैं, उनका सबसे पहले अधिकृत वैल्यूअर यानी मूल्यांकनकर्ता द्वारा गहन सत्यापन किया जाता है। एक बार सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, इन वस्तुओं को मंदिर के कोठार में सुरक्षित जमा कर दिया जाता है। प्रशासन का यह भी कहना है कि मंदिर में जमा सामग्री का समय-समय पर ऑडिट भी किया जाता है, ताकि पूरी व्यवस्था पारदर्शी बनी रहे।
रसीद प्रणाली की जानकारी
मंदिर प्रशासन के मुताबिक, दान देने वाले श्रद्धालुओं के लिए रसीद की एक व्यवस्थित प्रणाली अपनाई जाती है। जब भी कोई श्रद्धालु दान देता है, तो उसे तीन प्रतियों में रसीद दी जाती है। इसमें से एक प्रति दानदाता को दी जाती है, दूसरी प्रति मंदिर के आधिकारिक रिकॉर्ड के लिए रखी जाती है, और तीसरी प्रति संबंधित सामग्री के साथ सुरक्षित फाइल कर दी जाती है। प्रशासन का दावा है कि इन नियमों के पालन से दान की पूरी प्रक्रिया सुरक्षित है। हालांकि, तकनीकी दौर में अब डिजिटल ऐप के जरिए इस जानकारी को आम जनता और श्रद्धालुओं तक पहुंचाने की मांग जोर पकड़ रही है।
https://hindi.news18.com/news/madhya-pradesh/ujjain-mahakal-temple-donation-jewellery-transparency-mayor-seeks-verification-after-ayodhya-case-local18-10619022.html