क्या उम्र के साथ वाकई लंबाई कम हो जाती है
आपने शायद गौर किया होगा कि जैसे जैसे इंसान की उम्र बढ़ती है, उसका कद पहले की तुलना में छोटा लगने लगता है। कई लोगों को यह केवल एक भ्रम लगता है, लेकिन असल में इसके पीछे शारीरिक संरचना में होने वाले बदलाव और स्वास्थ्य स्थितियां जिम्मेदार होती हैं। पटना के जय प्रभा सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल में इंटरनल मेडिसिन एक्सपर्ट डॉ. तारिक नैय्यर जमील के अनुसार, बढ़ती उम्र और लंबाई में कमी के बीच कोई सीधा संबंध नहीं है। हालांकि, कुछ विशिष्ट बीमारियों के कारण इंसान को महसूस हो सकता है कि उसकी लंबाई पहले की तुलना में कम हो गई है।
लंबाई कम होने के वास्तविक कारण
डॉ. तारिक नैय्यर जमील के मुताबिक, उम्र बढ़ना खुद में कद कम होने का कारण नहीं है। लंबाई में कमी के पीछे मुख्य रूप से वे स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं जो बढ़ती उम्र के साथ शरीर में पनपती हैं। जब रीढ़ की हड्डी कमजोर हो जाती है या उसमें झुकाव आने लगता है, तो शारीरिक ढांचा पूरी तरह सीधा नहीं रह पाता। रीढ़ की हड्डी की संरचना में आने वाले ये बदलाव ही कद को प्रभावित करते हैं। इसलिए, यदि किसी को स्पष्ट रूप से अपनी ऊंचाई में बदलाव महसूस हो रहा है, तो इसे केवल उम्र का असर मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, बल्कि उचित चिकित्सा जांच करवानी चाहिए।
किन बीमारियों के कारण घटता है कद
विशेषज्ञों के अनुसार, बढ़ती उम्र के साथ लोगों में ऑस्टियोआर्थराइटिस और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारियां होने की संभावना बढ़ जाती है। इन बीमारियों का असर जब सीधे रीढ़ की हड्डी पर पड़ता है, तो परिणाम स्वरूप कद में गिरावट आती है:
- ऑस्टियोपोरोसिस का प्रभाव: जब यह बीमारी स्पाइन की हड्डियों को प्रभावित करती है, तो वे दबने लगती हैं। इसके कारण व्यक्ति का शरीर आगे की ओर झुक सकता है, जिससे लंबाई कम दिखाई देने लगती है।
- डिस्क का पतला होना: रीढ़ की हड्डी के बीच मौजूद डिस्क समय के साथ पतली हो जाती हैं, जिसका सीधा असर कुल कद पर पड़ता है।
- खराब पोस्चर: झुककर चलने की आदत या गलत तरीके से बैठने की मुद्रा भी वास्तविक लंबाई को छिपा देती है।
- मांसपेशियों की कमजोरी: उम्र बढ़ने के साथ शरीर की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं, जिससे शरीर को सीधा रखने की क्षमता कम हो जाती है।
इन तमाम कारणों की वजह से विशेषज्ञों का मानना है कि 40 वर्ष की आयु के बाद प्रति 10 साल में लगभग 0.5 से 1.5 सेंटीमीटर तक हाइट कम हो सकती है, लेकिन यह पूरी तरह से उम्र बढ़ने की प्रक्रिया नहीं बल्कि स्वास्थ्य संबंधित गिरावट है।
रीढ़ की हड्डी और हड्डियों का स्वास्थ्य
शरीर को स्वस्थ रखने के लिए सक्रिय जीवनशैली अपनाना अनिवार्य है। डॉ. तारिक नैय्यर जमील सलाह देते हैं कि नियमित योग, हल्की एक्सरसाइज और दैनिक शारीरिक गतिविधियां हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसके विपरीत, यदि कोई व्यक्ति लंबे समय तक केवल बिस्तर पर रहता है या शारीरिक रूप से बिल्कुल भी सक्रिय नहीं रहता, तो शरीर में कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं घर करने लगती हैं।
युवाओं में बढ़ रही पीठ दर्द की समस्या
आजकल केवल बुजुर्ग ही नहीं, बल्कि युवा वर्ग में भी गर्दन और लोअर बैक पेन की समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। अस्पताल पहुंचने वाले ज्यादातर युवाओं की जांच में मुख्य कारण गलत शारीरिक मुद्रा यानी बॉडी पोस्चर निकलकर सामने आता है। इसके लिए निम्नलिखित आदतें जिम्मेदार हैं:
- लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठे रहना।
- लगातार गर्दन झुकाकर मोबाइल का इस्तेमाल करना।
- काम करने के दौरान बैठने के सही तरीके का पालन न करना।
विशेषज्ञों की चेतावनी है कि गर्दन से लेकर कमर तक के लगातार दर्द को हल्के में न लें। यदि दर्द बना रहता है, तो समय रहते डॉक्टर से परामर्श करें। फिजियोथेरेपी और सही उपचार के माध्यम से इस समस्या में काफी सुधार लाया जा सकता है। याद रखें, रीढ़ की हड्डी का ध्यान रखना न केवल आपके कद को बनाए रखने के लिए, बल्कि आपके समग्र स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत आवश्यक है।
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