शिक्षा विभाग के बड़े एक्शन से हड़कंप
बिहार के रोहतास जिले के काराकाट प्रखंड से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां शिक्षा विभाग ने एक साथ 13 शिक्षकों की शैक्षणिक डिग्रियों को अमान्य घोषित कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद से जिले के शिक्षक वर्ग में भारी रोष और बेचैनी का माहौल है। जिन शिक्षकों की डिग्रियों पर सवालिया निशान खड़े किए गए हैं, वे अब खुलकर प्रशासन की इस नीति का विरोध कर रहे हैं और इसे पूरी तरह मनमाना करार दे रहे हैं। इस पूरे प्रकरण में उस समय एक भावुक मोड़ आ गया, जब काराकाट प्रखंड के मध्य विद्यालय चिकसिल में तैनात दिव्यांग शिक्षक उदय शंकर कुमार अपनी फरियाद लेकर सीधे जिला समाहरणालय पहुंच गए।
खुद को घसीटते हुए पहुंचे डीएम कार्यालय
दिव्यांग शिक्षक उदय शंकर कुमार ने जो संघर्ष दिखाया, उसने वहां मौजूद हर किसी को हिलाकर रख दिया। उदय शंकर दोनों पैरों से दिव्यांग हैं और उन्होंने हार नहीं मानी। वे खुद को फर्श पर घसीटते हुए जिलाधिकारी के कार्यालय तक पहुंचे ताकि अपनी पीड़ा उन तक पहुंचा सकें। डीएम से मुलाकात के दौरान उदय शंकर ने अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि इतने वर्षों तक पूरी निष्ठा से सेवा करने के बावजूद, उनकी डिग्री को अचानक अमान्य घोषित कर दिया गया है। इस फैसले ने उनके सामने अपने और अपने परिवार के भविष्य को लेकर बड़ा संकट खड़ा कर दिया है।
वर्ष 2010 से जारी है संघर्ष
अपनी आपबीती बताते हुए उदय शंकर कुमार ने कहा कि उनका चयन वर्ष 2010 में प्रखंड शिक्षक के पद पर हुआ था। हालांकि, नियुक्ति के केवल 6 महीने के भीतर ही उनकी शैक्षणिक योग्यता पर सवाल खड़े कर दिए गए। शुरुआती दौर में प्रखंड नियोजन इकाई ने उनका नियोजन रद्द कर दिया था, लेकिन तब उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने जिला नियोजन इकाई के समक्ष अपील दायर की, जहां उनकी दलीलों और दस्तावेजों को सही पाया गया। इसके बाद उन्हें वापस बहाल कर दिया गया और उन्होंने बिना किसी रुकावट के वर्ष 2018 तक अपनी सेवाएं दीं।
कानूनी लड़ाई और हाईकोर्ट का दखल
शिक्षा विभाग के साथ उनका यह विवाद काफी पुराना है। वर्ष 2018 में एक बार फिर उनकी डिग्री पर सवाल उठे, जिसके बाद उन्होंने न्याय पाने के लिए पटना हाईकोर्ट की शरण ली। उदय शंकर के अनुसार, हाईकोर्ट ने अपने स्पष्ट आदेश में यह कहा था कि जिला नियोजन इकाई द्वारा लिए गए फैसले को प्रखंड नियोजन इकाई रद्द नहीं कर सकती। उच्च न्यायालय के उस आदेश के बाद ही उनकी नौकरी सुरक्षित रह पाई थी।
ओडिशा की डिग्री पर उठा सवाल
मौजूदा विवाद का मुख्य कारण उनकी शैक्षणिक डिग्री है, जो उन्होंने उड़ीसा से प्राप्त की थी। जिला शिक्षा पदाधिकारी द्वारा कराई गई जांच रिपोर्ट में नवभारत शिक्षा परिषद, उड़ीसा से मिली डिग्री को वैध मानने से इनकार कर दिया गया है। इसी रिपोर्ट को आधार बनाकर काराकाट प्रखंड के कुल 13 शिक्षकों की डिग्रियों को फर्जी या अमान्य बता दिया गया है। उदय शंकर का कहना है कि वे पहले भी कानूनी प्रक्रिया का पालन कर न्याय हासिल कर चुके हैं, लेकिन एक ही मामले में बार-बार की जा रही कार्रवाई से वे भारी आर्थिक और मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं। उन्होंने डीएम से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और उन्हें न्याय दिलाया जाए।
प्रशासन और शिक्षकों के बीच गतिरोध
इस पूरे मामले ने अब एक बड़ा रूप ले लिया है। एक तरफ पीड़ित शिक्षक इसे विभाग की मनमानी और गलत प्रक्रिया मान रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जिला शिक्षा पदाधिकारी का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह से तथ्यों और जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है। शिक्षा विभाग के इस कड़े फैसले के बाद अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जिला प्रशासन अगला कदम क्या उठाता है और इन 13 शिक्षकों का भविष्य क्या होगा।
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