अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की गणना की नई प्रक्रिया
अयोध्या में प्रभु श्री राम के भव्य मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किए जाने वाले चढ़ावे और दान की गणना की प्रक्रिया में अब व्यापक बदलाव किए गए हैं। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने दान के पैसों में चोरी के सामने आए मामलों के बाद सुरक्षा व्यवस्था को अत्यधिक मजबूत कर दिया है। अब नकदी की गिनती करने वाले कर्मचारियों को विशेष पोशाक पहननी होगी, कई स्तरों पर जांच से गुजरना होगा, जमीन पर बैठकर गिनती करनी होगी और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी अनिवार्य कर दी गई है।
गिनती प्रक्रिया में किए गए महत्वपूर्ण सुधार
- विशेष पोशाक का नियम: चढ़ावे की गिनती में लगे सभी कर्मचारियों को अब गहरे नीले रंग की डांगरी पहनना अनिवार्य है। यह एक विशेष वन-पीस पोशाक है जिसमें कोई जेब नहीं होती है और इसमें ज़िप लगी होती है, जिससे यह कर्मचारी के शरीर को पूरी तरह से कवर कर लेती है।
- बैठने का तरीका: पहले नकदी की गिनती मेजों पर की जाती थी, लेकिन अब सुरक्षा की दृष्टि से पूरी गणना प्रक्रिया जमीन पर बैठकर की जा रही है।
- कड़ी निगरानी: नकदी की गणना के दौरान एसआईएस सिक्योरिटी के 5 सुरक्षाकर्मी वहां तैनात रहते हैं। इसके अतिरिक्त चोरी के मामलों के बाद अब 2 पुलिसकर्मियों की मौजूदगी भी अनिवार्य कर दी गई है। साथ ही, 2 बैंक कर्मचारी और ट्रस्ट के 2 प्रतिनिधि भी वहां उपस्थित रहते हैं।
- जांच और सुरक्षा: गणना में लगे कर्मचारियों को अब 3 बार एंट्री प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है और 2 अलग-अलग स्थानों पर उनकी गहन तलाशी ली जाती है।
- शिफ्ट का समय: गणना का काम दो पालियों में होता है। पहली शिफ्ट सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक और दूसरी शिफ्ट दोपहर 2 बजे से रात 10 बजे तक चलती है।
- वीडियोग्राफी: गड़बड़ी की किसी भी संभावना को खत्म करने के लिए पूरी गिनती प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग की जा रही है।
डांगरी की विशेषता
डांगरी एक विशेष प्रकार की वन-पीस पोशाक होती है। इसका निचला हिस्सा पैंट के समान और ऊपरी भाग छाती को ढंकने वाला होता है, जो कंधों पर लगे पट्टों से जुड़ा रहता है। जेब न होने के कारण यह पोशाक सुरक्षित मानी जाती है और इसमें कुछ भी छुपाकर बाहर ले जाना संभव नहीं है।
चोरी के मामलों में नए खुलासे
दान के पैसे की चोरी को लेकर जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है। आरोपी अविनाश शुक्ला, जिसे दान की रकम चुराने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, को लेकर कई नई जानकारियां सामने आई हैं। अविनाश अपने भाई अभिषेक शुक्ला के साथ एक योग केंद्र में रहता था। पुलिस ने इसी योग केंद्र से 5 जून को 5 लाख रुपये बरामद किए थे। यह भी पता चला है कि अभिषेक ने ही अपने भाई अविनाश को मंदिर में नौकरी दिलवाई थी। अविनाश पर दान की रकम को काउंटिंग रूम तक पहुंचाने की जिम्मेदारी थी, लेकिन उसके कमरे से एक संदूक मिला है जिस पर राम राज्य कोष का बार कोड लगा हुआ है। पुलिस ने बीते मंगलवार को जेल में अविनाश से 2 घंटे तक विस्तृत पूछताछ भी की। जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि इस गिरोह में शामिल लवकुश मिश्रा और अनुकल्प मिश्रा ने चंदे की रकम से सबसे अधिक संपत्ति बनाई है, जिन्होंने कुल 5 से 6 संपत्तियां खरीदी हैं।
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