महाराष्ट्र में अवैध IVF और सोनोग्राफी सेंटरों पर अब चलेगा डंडा, सरकार बनाएगी स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में अवैध रूप से संचालित आईवीएफ और सोनोग्राफी केंद्रों पर नकेल कसने के लिए एक विशेष जांच दल का गठन करने का फैसला किया है। दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई के तहत मकोका (MCOCA) लगाने पर भी विचार किया जा रहा है।

कठोर कार्रवाई के लिए SIT का गठन

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य भर में बिना अनुमति के चल रहे आईवीएफ और सोनोग्राफी केंद्रों के खिलाफ एक बड़ा कदम उठाया है। सार्वजनिक आरोग्य विभाग के मंत्री प्रकाश आबिटकर ने विधानसभा में स्पष्ट किया है कि ऐसे अवैध केंद्रों पर लगाम लगाने के लिए एक Special Investigation Team यानी एसआईटी का गठन किया जाएगा। यह टीम पूरे प्रदेश में औचक निरीक्षण और छापेमारी की कार्रवाई करेगी। यह घोषणा सपा विधायक अबू आजमी द्वारा विधानसभा में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद की गई है, जिसके जवाब में मंत्री ने सरकार का कड़ा रुख साफ कर दिया है।

कानून के दायरे में MCOCA

सरकार की मंशा इन अपराधों को बेहद गंभीरता से लेने की है। मंत्री प्रकाश आबिटकर के अनुसार, इन अवैध गतिविधियों में संलिप्त लोगों के खिलाफ महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम यानी MCOCA के तहत कार्रवाई करने पर विचार विमर्श किया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि अगले विधानसभा अधिवेशन तक इस संबंध में एक प्रभावी कानून को मूर्त रूप दिया जाए, जिससे दोषियों के लिए सख्त दंड का प्रावधान सुनिश्चित हो सके और भविष्य में इस तरह की धोखाधड़ी करने वालों में डर पैदा हो।

IVF सेंटरों की बढ़ती मनमानी पर लगाम

मंत्री ने चिंता जाहिर की कि राज्य में आईवीएफ और सोनोग्राफी केंद्रों की संख्या अनियंत्रित रूप से बढ़ रही है। इन केंद्रों द्वारा मरीजों के साथ की जा रही धोखाधड़ी के मामले सरकार के संज्ञान में आए हैं। एसआईटी का मुख्य कार्य इन केंद्रों की गतिविधियों पर निरंतर निगरानी रखना होगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी संस्थान अनधिकृत रूप से काम न कर सके और मरीजों के स्वास्थ्य तथा हितों के साथ कोई समझौता न हो।

लाइसेंस रद्द होने के साथ दर्ज होगा केस

सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि जांच के दौरान यदि किसी भी केंद्र में जाली दस्तावेजों, नियमों के उल्लंघन या किसी भी प्रकार की अवैध मेडिकल गतिविधियों के सबूत मिलते हैं, तो केवल जुर्माना ही नहीं लगाया जाएगा, बल्कि उस केंद्र का लाइसेंस भी फौरन रद्द कर दिया जाएगा। साथ ही, इन सेंटरों के संचालकों के खिलाफ कानूनी मुकदमा भी दर्ज किया जाएगा। सरकार इस पूरे गैरकानूनी नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है।

स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता प्राथमिकता

मंत्री प्रकाश आबिटकर ने जोर देकर कहा कि महाराष्ट्र सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में चिकित्सा सेवाओं में पूरी तरह पारदर्शिता लाना शामिल है। वर्तमान में कई स्थानों पर मानकों की अनदेखी कर केंद्र चलाए जा रहे हैं, जो लोगों की जान जोखिम में डाल रहे हैं। सरकार इस तरह की लापरवाही को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं करेगी और मरीजों की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाना जारी रखेगी।

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