वैश्विक मंच पर चमक रही बनारस की कला
वाराणसी की प्रसिद्ध 400 साल पुरानी गुलाबी मीनाकारी कला ने दुनिया भर में अपनी एक अलग पहचान बना ली है। काशी के कुशल कलाकारों द्वारा हाथ से तैयार किए गए शतरंज के सेट की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब इनकी भारी मांग अमेरिका जैसे देशों से आ रही है। यह पारंपरिक कला अब पूरी तरह से ग्लोबल हो चुकी है।
कीमत और खासियत
इस अनूठी कलाकृति की कीमत इसके आकार और डिजाइन पर निर्भर करती है। बाजार में इन चेस सेट की शुरुआती कीमत 52 हजार रुपये है। वहीं, अगर कोई सबसे बड़ा साइज खरीदना चाहता है, तो उसकी कीमत 1 लाख 40 हजार रुपये तक पहुंच जाती है। इतनी महंगी कीमत के बावजूद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इनका क्रेज काफी ज्यादा है।
कैसे मिली वैश्विक पहचान
इस कला को दुनिया भर में पहचान दिलाने में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया, जब साल 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस को उपहार के रूप में यह चेस सेट भेंट किया था। इस घटना के बाद से अंतरराष्ट्रीय बाजार में बनारस की गुलाबी मीनाकारी की चमक बढ़ गई। इसके चलते न केवल इस कला को संरक्षण मिला है, बल्कि स्थानीय कारीगरों और वहां की महिलाओं की आय में भी जबरदस्त सुधार हुआ है।
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