जोड़ों के दर्द और गठिया का रामबाण इलाज है पारिजात की चाय, जानें इसके फायदे और सेवन का तरीका

उत्तराखंड के ग्रामीण इलाकों में पारंपरिक रूप से इस्तेमाल की जाने वाली पारिजात की पत्तियां जोड़ों के दर्द और सूजन में बेहद असरदार मानी गई हैं। आयुर्वेद विशेषज्ञों ने इसके गुणों और सावधानी के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है।

पारिजात की पत्तियों के औषधीय गुण

बागेश्वर समेत उत्तराखंड के तमाम पहाड़ी और ग्रामीण क्षेत्रों में पारिजात जिसे हरसिंगार के नाम से भी जाना जाता है, का उपयोग वर्षों से स्वास्थ्य समस्याओं को दूर करने के लिए किया जा रहा है। विशेष रूप से गठिया और जोड़ों के दर्द से जूझ रहे लोगों के लिए इसकी पत्तियों की चाय एक पारंपरिक औषधि की तरह काम करती है। यह न केवल दर्द में राहत पहुंचाती है बल्कि शरीर की आंतरिक सूजन को कम करने में भी मदद करती है।

आयुर्वेद विशेषज्ञ की राय

आयुर्वेद के विशेषज्ञ डॉ. एजेल पटेल के अनुसार पारिजात की पत्तियों का काढ़ा या चाय वात और कफ से जुड़े विकारों के लिए काफी गुणकारी है। उन्होंने बताया कि इसे बनाने के लिए पारिजात की ताजी पत्तियों को पानी में अच्छी तरह उबाला जाता है। नियमित सेवन से यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूती प्रदान करता है, जिससे मौसमी बीमारियों से लड़ने में शरीर को मदद मिलती है।

सेवन में रखें सावधानी

हालांकि यह पौधा स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद है, लेकिन विशेषज्ञों ने इसे लेकर स्पष्ट सलाह दी है। पारिजात की चाय को मुख्य इलाज का विकल्प मानने के बजाय एक सहायक उपाय के रूप में ही देखा जाना चाहिए। विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि:

  • गर्भवती महिलाओं को इसके सेवन से पूरी तरह बचना चाहिए।
  • किसी भी गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों को डॉक्टर की सलाह के बिना इसका उपयोग नहीं करना चाहिए।
  • इसका सेवन करने से पहले किसी अनुभवी चिकित्सक से परामर्श लेना हमेशा उचित रहता है।

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