उदयपुर ने रचा इतिहास
भारत ने नागरिक उड्डयन के क्षेत्र में एक नई और गौरवशाली उपलब्धि हासिल की है। राजस्थान के उदयपुर स्थित डबोक हवाई अड्डे पर देश में पहली बार स्वदेशी उपग्रह आधारित नेविगेशन प्रणाली 'गगन' (GAGAN) की मदद से एक बड़े कमर्शियल विमान को सफलता के साथ उतारा गया है। विमानन जगत में यह एक ऐतिहासिक दिन माना जा रहा है, क्योंकि अब तक भारत बड़े विमानों की लैंडिंग के लिए विदेशी तकनीकों पर काफी हद तक निर्भर था। इस परीक्षण के सफल होने के बाद भारत उन गिने-चुने देशों की सूची में शामिल हो गया है, जिनके पास अपनी खुद की इतनी सटीक और उन्नत सैटेलाइट नेविगेशन तकनीक मौजूद है।
परीक्षण की पूरी प्रक्रिया
यह ऐतिहासिक परीक्षण 27 जून को संपन्न हुआ, जिस पर नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के वरिष्ठ अधिकारियों की सीधी नजर थी। इस प्रयोग के लिए इंडिगो एयरलाइंस के एक विशालकाय एयरबस ए320 विमान का चयन किया गया था। इस विमान ने पूरी तरह से 'गगन' प्रणाली से प्राप्त संकेतों का पालन करते हुए रनवे पर सुरक्षित और अत्यंत सटीक लैंडिंग को अंजाम दिया। विमानन विशेषज्ञों की मानें तो इससे पहले इस स्वदेशी तकनीक का परीक्षण केवल छोटे आकार के एटीआर (ATR) विमानों पर ही किया गया था। पहली बार इतने बड़े और भारी कमर्शियल पैसेंजर एयरक्राफ्ट को इस प्रणाली के सहारे सुरक्षित उतारकर भारतीय वैज्ञानिकों ने अपनी क्षमता का लोहा मनवाया है।
इसरो और एएआई की बड़ी उपलब्धि
गगन यानी जीपीएस एडेड जियो ऑगमेंटेड नेविगेशन प्रणाली को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) ने मिलकर विकसित किया है। यह तकनीक अंतरिक्ष में मौजूद जीपीएस संकेतों की सूक्ष्म त्रुटियों को सुधारने का काम करती है। एक बार डेटा दुरुस्त होने के बाद यह विमानों के कॉकपिट में बेहद सटीक और भरोसेमंद मार्गदर्शन भेजती है, जिससे विमान का संचालन पहले से कहीं अधिक सुरक्षित हो जाता है। इस स्वदेशी नवाचार के उपयोग से भविष्य में विदेशी नेविगेशन प्रणालियों पर भारत की निर्भरता में काफी कमी आने की उम्मीद है।
विमानन क्षेत्र में गेमचेंजर साबित होगी तकनीक
इस नई तकनीक के सफल परीक्षण का असर आने वाले समय में देश के पूरे विमानन सेक्टर पर दिखाई देगा। पारंपरिक उपकरण आधारित लैंडिंग प्रणाली जिसे आईएलएस (ILS) कहा जाता है, उसकी तुलना में 'गगन' तकनीक कहीं अधिक किफायती है। इसके लिए जमीन पर बहुत अधिक महंगे या जटिल बुनियादी ढांचे को लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। इसका सबसे बड़ा फायदा देश के छोटे शहरों और कस्बों में बने हवाई अड्डों को होगा, जहां अब भारी विमानों को भी पूरी सुरक्षा के साथ उतारा जा सकेगा।
खराब मौसम में मिलेगी बड़ी राहत
भारत में अक्सर खराब मौसम, घना कोहरा और कम दृश्यता के चलते विमानों को डायवर्ट करना पड़ता है या उनकी उड़ानें रद्द करनी पड़ती हैं। लेकिन अब 'गगन' तकनीक की मदद से इन बाधाओं को पार करना आसान हो जाएगा। यह प्रणाली कम दृश्यता की स्थिति में भी विमानों के सुरक्षित संचालन में मदद करेगी, जिससे उड़ानों के रद्द होने और मार्ग बदलने की समस्याओं से यात्री और एयरलाइंस कंपनियां दोनों को बड़ी राहत मिलेगी। यह तकनीक भारत के छोटे हवाई अड्डों को वैश्विक मानकों के अनुरूप तैयार करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी।
https://hindi.news18.com/news/rajasthan/udaipur-gagan-navigation-system-successful-landing-indigo-airbus-a320-udaipur-airport-10618491.html