देवघर की इस मशहूर दुकान में ढाई रुपये में मिल रहा है समोसा और जलेबी, 18 साल से कायम है लोकप्रियता

महंगाई के इस दौर में देवघर के जसीडीह सब्जी मार्केट स्थित एक छोटी सी दुकान लोगों के लिए वरदान बनी हुई है, जहां आज भी समोसे और जलेबी मात्र ढाई रुपये में उपलब्ध हैं। दुकानदार दिलीप यादव पिछले 18 वर्षों से कम मुनाफे के साथ आम लोगों और बच्चों को सस्ता नाश्ता उपलब्ध करा रहे हैं।

महंगाई के बीच सस्ते नाश्ते की अनूठी मिसाल

आज के दौर में जब हर चीज की कीमतें आसमान छू रही हैं और बाजार में समोसे की कीमत आठ से दस रुपये तक पहुंच गई है, तब झारखंड के देवघर जिले में एक छोटी सी दुकान मिसाल बनकर उभरी है। देवघर के जसीडीह सब्जी मार्केट में स्थित इस दुकान में नाश्ते के तौर पर समोसा और जलेबी मात्र ढाई रुपये में मिल रहे हैं। यह दुकान न केवल अपने स्वाद के लिए जानी जाती है, बल्कि अपनी किफायती कीमतों के कारण स्थानीय लोगों, खासकर स्कूली बच्चों के बीच बेहद लोकप्रिय है। इस दुकान की सबसे बड़ी खासियत यह है कि पिछले 18 साल से यहाँ की कीमतों में बहुत मामूली बढ़ोतरी हुई है, जो इसे पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनाती है।

वर्ष 2008 से जारी है यह खास सफर

इस दुकान के मालिक दिलीप यादव हैं, जिन्होंने इस व्यवसाय की शुरुआत वर्ष 2008 में की थी। उस समय, उनके यहां एक समोसा और एक जलेबी की कीमत मात्र एक रुपये हुआ करती थी। समय बीतने के साथ आटा, आलू, तेल, गैस और अन्य सामग्रियों की कीमतें कई गुना बढ़ चुकी हैं, लेकिन दिलीप ने ग्राहकों के हित को ध्यान में रखते हुए अपनी कीमतों को बेहद कम बनाए रखा है। आज भले ही एक समोसे और एक जलेबी के लिए ग्राहकों को ढाई रुपये खर्च करने पड़ते हैं, लेकिन यह अभी भी बाजार के सामान्य रेट से काफी कम है। दिलीप का मानना है कि वे अपनी कमाई के बजाय लोगों की संतुष्टि को प्राथमिकता देते हैं।

बच्चों और जरूरतमंदों का पसंदीदा ठिकाना

दिलीप यादव की दुकान पर सबसे ज्यादा रौनक स्कूली बच्चों की होती है। दुकान के आसपास कई शैक्षणिक संस्थान स्थित हैं, जिसके कारण स्कूल की छुट्टी के बाद बच्चों की भीड़ यहां उमड़ पड़ती है। दिलीप बताते हैं कि कई बच्चों के पास बहुत कम जेब खर्च होता है, ऐसे में ढाई रुपये की कीमत उन्हें अपना मनपसंद नाश्ता करने का मौका देती है। वे कहते हैं कि यदि वे समोसे और जलेबी के दाम बढ़ा देते हैं, तो गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों के बच्चों के लिए यहां खाना मुमकिन नहीं होगा। यही वजह है कि वे सीमित मुनाफे में ही अपने परिवार का गुजारा कर रहे हैं और लोगों को सस्ता खाना परोस रहे हैं।

स्वाद में नहीं आया कोई बदलाव

सस्ते दाम के साथ-साथ स्वाद भी इस दुकान की सफलता का बड़ा कारण है। दुकान पर सुबह से ही गरमा-गरम समोसे और ताजी जलेबी बनने का सिलसिला शुरू हो जाता है, जिसे चखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। कई ग्राहक तो ऐसे हैं जो पिछले 18 वर्षों से लगातार यहां आ रहे हैं। उनका कहना है कि इस दुकान के समोसे और जलेबी का स्वाद आज भी वैसा ही है जैसा 18 साल पहले हुआ करता था। नई पीढ़ी के लोग हों या पुराने ग्राहक, हर कोई इस दुकान के स्वाद और सादगी का कायल है। लोग यहां चाय के साथ समोसे और जलेबी का आनंद लेना नहीं भूलते।

बिक्री के आंकड़े और ग्राहकों का भरोसा

दिलीप यादव के अनुसार, उनकी दुकान पर ग्राहकों की भारी भीड़ उमड़ती है, जिससे हर दिन करीब 500 समोसे और 500 पीस जलेबी की बिक्री आसानी से हो जाती है। इतनी कम कीमत रखने के बावजूद बिक्री की अच्छी मात्रा उन्हें अपने व्यवसाय को सुचारू रूप से चलाने में मदद करती है। जसीडीह सब्जी मार्केट में स्थित यह दुकान आज न केवल देवघर की एक पहचान बन गई है, बल्कि उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा भी है जो महंगाई के बीच भी मानवता और सेवा भाव को जिंदा रखे हुए हैं। दिलीप यादव की यह पहल दर्शाती है कि यदि इरादा नेक हो, तो कम मुनाफे में भी लोगों का दिल जीता जा सकता है और एक सफल व्यवसाय चलाया जा सकता है। ग्राहकों का अटूट भरोसा ही उनकी असली कमाई है, जो उन्हें हर दिन बेहतर काम करने का हौसला देती है।

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