सूर्य का राशि परिवर्तन 16 जुलाई को: कर्क संक्रांति से चमकेगा इन 4 राशियों का भाग्य, जानें दान और पूजा की सही विधि

आगामी 16 जुलाई को सूर्य देव मिथुन राशि से निकलकर कर्क राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं, जिससे दक्षिणायन की शुरुआत होगी। देवघर के ज्योतिषाचार्य के अनुसार, इस बदलाव से विशेष रूप से चार राशियों के जातकों को जबरदस्त लाभ मिलने वाला है।

ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के राजा सूर्य के गोचर को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। इस साल जुलाई का महीना धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से विशेष हलचल लेकर आ रहा है। आगामी 16 जुलाई को सूर्य देव अपनी राशि बदलने जा रहे हैं, जिसका सीधा असर मानव जीवन और प्रकृति पर पड़ेगा। इस दिन सूर्य मिथुन राशि की अपनी यात्रा को समाप्त करके कर्क राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य के इस राशि परिवर्तन को कर्क संक्रांति के नाम से जाना जाता है और इसी दिन से सूर्य देव दक्षिणायन की ओर प्रस्थान करेंगे।

झारखंड के देवघर के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित नंद किशोर मुदगल ने लोकल 18 से एक विशेष बातचीत में इस खगोलीय और धार्मिक घटनाक्रम की पूरी जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि सूर्य का यह राशि परिवर्तन केवल एक खगोलीय घटना मात्र नहीं है, बल्कि सनातन धर्म में इसका बहुत बड़ा आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व है। इस दिन से उत्तरायण की समाप्ति होती है और दक्षिणायन का चक्र प्रारंभ होता है, जो कई प्रकार के शुभ कार्यों और साधना के लिए उत्तम माना गया है।

सूर्य का कर्क राशि में प्रवेश और दक्षिणायन का आरंभ

पंडित नंद किशोर मुदगल के अनुसार, जब सूर्य देव एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं, तो उस काल को संक्रांति कहा जाता है। 16 जुलाई को होने वाले इस गोचर के साथ ही सूर्य देव कर्क राशि में प्रवेश करेंगे। इसके साथ ही सूर्य का दक्षिणायन का सफर भी शुरू हो जाएगा। हिंदू धर्मग्रंथों में दक्षिणायन की अवधि को देवताओं की रात्रि और पितरों का दिन माना जाता है। इस काल में किए जाने वाले आध्यात्मिक अभ्यास, जप-तप और दान का फल अत्यंत कल्याणकारी होता है। यही कारण है कि इस विशेष तिथि को किसी भी हाल में नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और विधि-विधान से पूजा संपन्न करनी चाहिए।

पूजा-अर्चना और सूर्य देव को अर्घ्य देने की विधि

सूर्य संक्रांति के इस पावन अवसर पर सुबह की शुरुआत किस तरह से की जानी चाहिए, इस पर देवघर के ज्योतिषाचार्य ने विस्तार से मार्गदर्शन किया है। उन्होंने बताया कि इस विशेष दिन पर निम्नलिखित पूजा विधि का पालन करना चाहिए:

  • जातकों को सुबह सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाना चाहिए।
  • इसके बाद तांबे के एक साफ लोटे में शुद्ध जल भरें और उसमें लाल रंग के फूल, रोली अथवा सिंदूर मिला लें।
  • उगते हुए सूर्य देव को अर्घ्य देते समय जल की धारा के बीच से सूर्य देव के दर्शन करें।
  • जल अर्पित करते समय ‘ॐ घृणि सूर्याय नमः’ मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें या फिर आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें।

ज्योतिषाचार्य का कहना है कि इस विधि से सूर्य देव की आराधना करने से मनुष्य के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इससे न केवल आत्मविश्वास में अभूतपूर्व वृद्धि होती है, बल्कि व्यक्ति को अपने हर कार्य में सफलता मिलने लगती है। मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है और शारीरिक स्वास्थ्य में भी सुधार देखने को मिलता है।

दान-पुण्य का महत्व और किन वस्तुओं का करें दान

संक्रांति के पावन अवसर पर दान की महिमा अपरंपार बताई गई है। पंडित नंद किशोर मुदगल के अनुसार, इस दिन किए गए दान का फल कई गुना होकर वापस मिलता है। उन्होंने सलाह दी है कि लोगों को अपनी सामर्थ्य के अनुसार इस दिन दान अवश्य करना चाहिए। इस दिन विशेष रूप से लाल रंग की वस्तुओं का दान अत्यंत फलदायी माना गया है। दान की जाने वाली मुख्य वस्तुओं में शामिल हैं:

  • लाल वस्त्र: जरूरतमंदों को लाल रंग के कपड़े दान करें।
  • गुड़: गुड़ का दान करने से कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है।
  • तांबे के बर्तन: तांबे की धातुओं का दान करना भी सूर्य देव को प्रसन्न करता है।
  • लाल फल: मौसमी लाल फलों का वितरण भी शुभ माना जाता है।

इसके अतिरिक्त, यदि कोई व्यक्ति किसी गरीब, भूखे या असहाय व्यक्ति को भरपेट भोजन कराता है, तो उस पर सूर्य देव की असीम अनुकंपा बरसती है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन किया गया छोटा सा परोपकार भी जीवन के बड़े संकटों को टालने की क्षमता रखता है और सुख-समृद्धि के द्वार खोलता है।

पितरों की आराधना और तर्पण का विशेष समय

दक्षिणायन के प्रारंभ होते ही पितरों के प्रति श्रद्धा प्रकट करने का समय भी शुरू हो जाता है। ज्योतिषाचार्य के मुताबिक, यह समय पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए किए जाने वाले अनुष्ठानों जैसे तर्पण, श्राद्ध और विशेष दान-पुण्य के लिए सर्वोत्तम माना गया है। जो लोग इस काल में अपने पूर्वजों का स्मरण करते हुए पूरी श्रद्धा से तर्पण करते हैं, उन्हें पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। पितरों के आशीर्वाद से परिवार में चल रहे कलह और अशांति का माहौल समाप्त होता है, संतान सुख की प्राप्ति होती है और जीवन में आ रही अज्ञात बाधाएं दूर होने लगती हैं।

इन 4 राशियों पर होगी सूर्य देव की विशेष कृपा

सूर्य का यह गोचर वैसे तो सभी 12 राशियों को प्रभावित करेगा, लेकिन देवघर के ज्योतिषाचार्य पंडित नंद किशोर मुदगल ने विशेष तौर पर चार राशियों के लिए इसे बेहद भाग्यशाली बताया है। ये राशियां हैं:

  • कर्क राशि: चूंकि सूर्य इसी राशि में प्रवेश कर रहे हैं, इसलिए इन जातकों के मान-सम्मान में वृद्धि होगी और करियर में नए अवसर मिलेंगे।
  • सिंह राशि: इस राशि के स्वामी स्वयं सूर्य देव हैं, जिसके कारण इन्हें व्यापार में बड़ा मुनाफा और आर्थिक स्थिति में सुधार देखने को मिलेगा।
  • कुंभ राशि: कुंभ राशि के जातकों को नौकरी में पदोन्नति और पुरानी बीमारियों से छुटकारा मिल सकता है।
  • मीन राशि: मीन राशि के लोगों के लिए यह गोचर पारिवारिक सुख लेकर आएगा और लंबे समय से अटके हुए कार्य पूरे होंगे।

पंडित जी ने सुझाव दिया है कि इन चारों राशियों के जातकों को इस गोचर काल में नियमित रूप से सूर्य देव को अर्घ्य देना चाहिए और दान-पुण्य के कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए। ऐसा करने से उनके करियर, नौकरी, व्यवसाय और पारिवारिक जीवन में चमत्कारी बदलाव देखने को मिल सकते हैं, साथ ही उनका मानसिक तनाव पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।

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