शान की सुरीली आवाज और गायकी का जादू
भारतीय संगीत जगत में अपनी मखमली और रूहानी आवाज से दशकों से लोगों का दिल जीतने वाले गायक शान किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। नब्बे के दशक के पॉप एल्बम से लेकर बॉलीवुड की प्लेबैक सिंगिंग तक, शान ने हर दौर में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। उन्हें अक्सर बॉलीवुड का स्माइलिंग सिंगर कहा जाता है, क्योंकि उनके चेहरे की मुस्कान उनके गानों में भी झलकती है। हालांकि, इतने लंबे करियर में भी कुछ ऐसे किस्से हैं जो सुनने में काफी हैरान करने वाले लगते हैं। आज हम शान के करियर के उसी मोड़ की चर्चा कर रहे हैं जब उन्होंने एक ऐसे गाने को ठुकरा दिया था, जिसने बाद में दुनिया भर में धूम मचा दी।
गाने के रिजेक्शन का अनसुना किस्सा
शान ने ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे के साथ हुई एक खास बातचीत में अपने करियर से जुड़ा एक मजेदार वाकया साझा किया। उनसे जब पूछा गया कि क्या उनके करियर में कोई ऐसा गाना रहा जिसे वो शुरुआत में छोड़ना चाहते थे, तो शान ने एक ऐसे गाने का नाम लिया जिसकी शायद किसी को उम्मीद भी नहीं थी। शान बताते हैं कि जब फिल्म 3 इडियट्स के लिए उन्हें गाने का मौका मिला, तो शुरुआत में उन्होंने इसे रिजेक्ट करने का मन बना लिया था।
सिंगर ने बताया कि वे फिल्म के एक अन्य गाने 'ऑल इज वेल' को डब करने के लिए जा रहे थे, तभी शांतनु ने उन्हें जानकारी दी कि यह गाना सोनू निगम गाने वाले हैं। उस समय फिल्म के इस गाने को आमिर खान पर फिल्माया जाना था, जिसके चलते यह गाना सोनू निगम को दे दिया गया। इसी दौरान शान को फिल्म के एक और सदाबहार गाने 'बहती हवा सा था' का ऑफर मिला। पहली बार सुनने पर उन्हें यह गाना बिल्कुल भी पसंद नहीं आया और उन्होंने इसे सिरे से खारिज कर दिया था।
क्यों पसंद नहीं आया था गाना?
गाने के बारे में अपनी राय रखते हुए शान ने स्वीकार किया कि उन्हें उस समय वह गाना बहुत अजीब लगा था। उन्हें लगा कि यह कैसा गाना है और वे इसे काफी साधारण या ट्रेन में बजने वाले गानों जैसा मान रहे थे। उन्हें उस समय इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि राजकुमार हिरानी की इस फिल्म का यह गाना रातों-रात एक एंथम बन जाएगा। जब फिल्म में आमिर खान, शरमन जोशी और आर माधवन पर यह गाना फिल्माया गया, तो दर्शकों ने इसे सिर-आंखों पर बैठा लिया। आज यह गाना न केवल फिल्म की पहचान है, बल्कि संगीत प्रेमियों के बीच भी बेहद लोकप्रिय है।
शान का सांगीतिक सफर और विरासत
शान का असली नाम शांतनु मुखर्जी है और उनका जन्म 30 सितंबर 1972 को मध्य प्रदेश के खंडवा में एक बंगाली संगीतकार परिवार में हुआ था। संगीत उन्हें अपने परिवार से विरासत में मिला था। उनके दादा जाहर मुखर्जी एक जाने-माने गीतकार थे, जबकि उनके पिता मानस मुखर्जी एक प्रसिद्ध संगीत निर्देशक के रूप में अपनी पहचान बना चुके थे।
शान के जीवन में संघर्ष का दौर तब शुरू हुआ जब वे महज 13 साल के थे। उनके पिता का निधन हो गया, जिसके बाद उनकी मां सोनाली मुखर्जी ने अकेले ही शान और उनकी बहन सागरिका की परवरिश की जिम्मेदारी संभाली। उनकी मां खुद एक गायिका थीं, इसलिए शान के घर में हमेशा संगीत का माहौल बना रहा, जिसने उनके करियर को दिशा देने में बड़ी भूमिका निभाई।
करियर की शुरुआत और पहचान
शान ने बहुत ही कम उम्र में विज्ञापनों के लिए जिंगल्स गाना शुरू कर दिया था। हालांकि, उन्हें असली लोकप्रियता 90 के दशक के अंत में मिली। अपनी बहन सागरिका के साथ गाए उनके रीमिक्स गाने और 'नौजवान' जैसे पॉप एल्बम ने देश भर के युवाओं का दिल जीत लिया। साल 2000 में उनका सोलो एल्बम 'तन्हा दिल' रिलीज हुआ, जिसने उन्हें घर-घर में प्रसिद्ध कर दिया। इस एल्बम के टाइटल ट्रैक को उस दौर का एंथम माना जाता था। अपनी बेहतरीन गायकी के लिए शान को एमटीवी एशिया म्यूजिक अवार्ड से भी नवाजा गया, जिसने उन्हें एक नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया।
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