मजदूरी से लखपति तक का सफर: बुरहानपुर की रजनी वर्मा ने ऐसे बदली अपनी और गांव की तकदीर

कभी दूसरों के खेतों में दिहाड़ी मजदूरी करने वाली बुरहानपुर की रजनी वर्मा ने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर अपनी किस्मत बदल ली है। आज वह सालाना लाखों की कमाई कर रही हैं और गांव की कई अन्य महिलाओं के लिए रोजगार का जरिया बन चुकी हैं।

संघर्ष से सफलता की नई कहानी

मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के बसाड़ गांव की रहने वाली रजनी वर्मा की कहानी उन सभी महिलाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है जो विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानतीं। बुरहानपुर जिला मुख्यालय से महज 8 किलोमीटर दूर बसा यह गांव आज रजनी वर्मा की सफलता की वजह से चर्चा में है। एक समय ऐसा था जब रजनी वर्मा को अपना घर चलाने के लिए दूसरों के खेतों में जाकर दिनभर मजदूरी करनी पड़ती थी। उस समय जीवन का हर दिन संघर्षपूर्ण होता था, लेकिन उनके भीतर कुछ बेहतर करने की आग हमेशा जलती रही। आज वही रजनी वर्मा एक सफल उद्यमी हैं और अपनी मेहनत व दृढ़ संकल्प के दम पर लखपति बन चुकी हैं।

स्वयं सहायता समूह ने दी नई पहचान

रजनी के जीवन में बड़ा बदलाव 10 साल पहले आया, जब उन्होंने स्वयं सहायता समूह के बारे में जाना। उस समय उनके पास कोई स्थायी आय का साधन नहीं था। उन्होंने इस समूह से जुड़ने का फैसला किया और वहां से प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस प्रशिक्षण ने उनके हुनर को तराशने का काम किया। हालांकि, उनके लिए यह रास्ता आसान नहीं था। जब उन्होंने समूह का संचालन शुरू किया, तो उन्हें शुरुआती दौर में कई सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

रजनी बताती हैं कि उस समय सबसे बड़ी चुनौती परिवार और समाज की सोच थी, लेकिन उनके अपने परिवार के सदस्यों ने उन्हें पूरा सहयोग दिया। उन्होंने घर से बाहर निकलकर काम करने की अनुमति दी और उनके हर कदम पर साथ खड़े रहे। इसी भरोसे और हिम्मत के बल पर रजनी ने हार नहीं मानी और आज वह अपने क्षेत्र में एक मॉडल महिला के रूप में पहचानी जाती हैं।

सालाना लाखों की कमाई और स्वरोजगार

आज रजनी वर्मा की वार्षिक आय 2 से 3 लाख रुपये के बीच है। उन्होंने केवल खुद को ही आत्मनिर्भर नहीं बनाया, बल्कि गांव की करीब 10 से 15 महिलाओं को भी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए हैं। उनके समूह से जुड़ी ये महिलाएं अब आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो रही हैं और हर दिन 200 से 300 रुपये तक की कमाई कर रही हैं। यह उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा है।

विविध उत्पादों से बढ़ी पहचान

रजनी वर्मा की सफलता का आधार उनकी मेहनत और विविधता भरे काम हैं। उन्होंने अपने काम को कई दिशाओं में फैलाया है, जिससे उन्हें लगातार आमदनी होती रहती है:

  • नर्सरी का संचालन: उन्होंने अपनी खुद की नर्सरी तैयार की है, जहां वे काजू, बादाम, नीम, बरगद, जामुन और तरह-तरह के फूलों के पौधे उगाती हैं। बरसात के मौसम में इन पौधों की मांग काफी बढ़ जाती है। वे अपनी नर्सरी से एक पौधा 40 रुपये की कीमत पर बेचती हैं।
  • केले के रेशे से उत्पाद: रजनी केले के रेशे का उपयोग करके विभिन्न प्रकार की वस्तुएं बनाती हैं, जिनकी बाजार में अच्छी मांग है।
  • खाद का उत्पादन: समय-समय पर वे जैविक खाद भी तैयार करती हैं, जो कृषि कार्यों में काम आती है।

पंचायत स्तर पर भी उन्हें अपने उत्पादों के लिए कई ऑर्डर मिल रहे हैं, जिससे उनके व्यवसाय को और मजबूती मिली है। रजनी वर्मा का मानना है कि यदि महिलाएं ठान लें और उन्हें उचित मंच मिल जाए, तो वे घर बैठे ही न केवल अपनी आर्थिक स्थिति सुधार सकती हैं, बल्कि दूसरों के जीवन में भी खुशहाली ला सकती हैं। उनकी इस अनोखी यात्रा ने यह साबित कर दिया है कि लगन हो तो मजदूरी से लखपति बनने का सफर तय किया जा सकता है।

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