अयोध्या जाने का लिया संकल्प
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव की धार्मिक गतिविधियों में काफी तेजी देखी जा रही है। हाल ही में इटावा में मंदिर निर्माण कार्य पूरा करने के बाद अब अखिलेश यादव ने अयोध्या जाकर दर्शन करने का बड़ा संकल्प लिया है। इस बीच उनकी पत्नी और सांसद डिंपल यादव भी बच्चों के साथ वाराणसी स्थित काशी पहुंचकर पूजा-अर्चना करती हुई नजर आईं, जिसने राज्य की सियासत में नई बहस छेड़ दी है।
भाजपा का कटाक्ष और सपा का तर्क
अखिलेश यादव के इन कदमों को लेकर भारतीय जनता पार्टी पूरी तरह से हमलावर है। भाजपा नेताओं का मानना है कि यह सब केवल चुनावी माहौल को साधने के लिए किया जा रहा है और इसे 'चुनावी भक्ति' का नाम दिया जा रहा है। वहीं, समाजवादी पार्टी इन आरोपों को सिरे से खारिज कर रही है। सपा का कहना है कि ये पूरी तरह से उनकी निजी आस्था से जुड़े विषय हैं और इसे किसी चुनावी रणनीति से जोड़ना गलत है।
सोशल मीडिया पर पुरानी बातें
राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा आम है कि एक समय था जब अखिलेश यादव ने सार्वजनिक तौर पर यह बयान दिया था कि वे पूजा-पाठ में विश्वास नहीं रखते हैं। अब सोशल मीडिया पर उनके पुराने बयान के वीडियो जमकर वायरल किए जा रहे हैं। विपक्षी दल और सोशल मीडिया यूजर तंज कसते हुए कह रहे हैं कि चुनाव करीब आते ही उन्हें फिर से भगवान याद आने लगे हैं। क्या यह वास्तव में उनकी व्यक्तिगत आस्था में आया बदलाव है या फिर 2027 की चुनावी बिसात बिछाने की कोई सोची-समझी रणनीति, यह फिलहाल राजनीतिक विश्लेषकों के बीच मंथन का विषय बना हुआ है।
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