बारिश के मौसम में बकरियों की सेहत का रखें खास ख्याल, इन 4 देसी पत्तों से बढ़ाएं उनकी इम्यूनिटी

बरसात के दौरान बकरियों में बीमारियों और पेट के कीड़ों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में सहजन, गिलोय, अमरूद और नीम की पत्तियां खिलाकर आप उन्हें स्वस्थ रख सकते हैं और उनका वजन भी बढ़ा सकते हैं।

बारिश में बकरियों की देखभाल के तरीके

बरसात का मौसम आते ही पशुपालकों के सामने बकरियों के स्वास्थ्य को लेकर कई चुनौतियां खड़ी हो जाती हैं। इस मौसम में बकरियों के शरीर में संक्रमण, पाचन तंत्र की समस्या और पेट में कीड़े पड़ने का जोखिम काफी अधिक बढ़ जाता है। हालांकि, अगर पशुपालक थोड़ी सावधानी बरतें और उनके खान-पान पर सही ध्यान दें, तो न केवल बकरियों को बीमारियों से बचाया जा सकता है, बल्कि उनके वजन में भी शानदार वृद्धि की जा सकती है। आज हम आपको कुछ ऐसे प्राकृतिक और देसी विकल्पों के बारे में बता रहे हैं, जो बारिश के दौरान बकरियों के लिए संजीवनी का काम करते हैं।

सहजन की पत्तियों का महत्व

बरसात के दिनों में बकरियों के लिए सहजन, जिसे मोरिंगा के नाम से भी जाना जाता है, एक बेहतरीन आहार है। इसके पोषण का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सहजन की 100 ग्राम पत्तियों में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और अन्य महत्वपूर्ण पोषक तत्व मौजूद होते हैं। बकरियां इन्हें बहुत चाव से खाती हैं और आसानी से पचा लेती हैं। सहजन खिलाने से न केवल बकरियों की सेहत सुधरती है, बल्कि उनके वजन बढ़ाने की गति में भी काफी तेजी आती है।

नीम गिलोय से मजबूत होगी रोग प्रतिरोधक क्षमता

आपने नीम के पेड़ पर चढ़ी हुई गिलोय की बेल को देखा होगा, जिसमें गजब के औषधीय गुण होते हैं। बारिश के मौसम में विशेष रूप से बकरी के छोटे बच्चों के लिए गिलोय की पत्तियां बेहद गुणकारी साबित होती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, सीमित मात्रा में गिलोय का सेवन कराने से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी काफी मजबूत हो जाती है। जब इम्यूनिटी अच्छी होगी, तो बकरियां बार-बार बीमार नहीं पड़ेंगी और वे प्रतिकूल मौसम का सामना करने में सक्षम होंगी।

अमरूद और नीम की पत्तियों के औषधीय फायदे

अमरूद की पत्तियों में प्रोटीन और विटामिन के साथ-साथ कई ऐसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो बकरियों के पाचन तंत्र को दुरुस्त रखते हैं। बारिश के मौसम में जब चारे की वजह से पाचन बिगड़ने की समस्या होती है, तब अमरूद की पत्तियां बहुत कारगर होती हैं। इसके अलावा, नीम की पत्तियों में टैनिन जैसे औषधीय गुण होते हैं। बारिश में संक्रमण फैलने का खतरा सबसे अधिक होता है, ऐसे में नीम की पत्तियां खिलाने से संक्रमण का डर कम हो जाता है और पशु पूरी तरह स्वस्थ बने रहते हैं।

डीवॉर्मिंग का विशेष ध्यान रखें

सिर्फ हरा चारा ही काफी नहीं है, बल्कि पशु के भीतर पनपने वाले कीड़ों का प्रबंधन भी जरूरी है। यदि बकरियों के पेट में कीड़े हो जाते हैं, तो उनका विकास पूरी तरह रुक जाता है। ऐसी स्थिति में आप उन्हें चाहे कितना भी पौष्टिक आहार खिला लें, उसका लाभ उनके शरीर को नहीं मिल पाता है। इसलिए, समय-समय पर पशु चिकित्सक की देखरेख में कृमिनाशक दवा यानी डीवॉर्मिंग कराना बहुत अनिवार्य है। जो किसान अपनी बकरियों को स्टॉल फीडिंग कराते हैं, उनके लिए यह प्रक्रिया और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है।

सावधानी बरतना क्यों जरूरी है?

यद्यपि सहजन, नीम गिलोय, अमरूद और नीम की पत्तियां बकरियों के स्वास्थ्य के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं, लेकिन इनका सेवन कराते समय संतुलन का ध्यान रखना चाहिए। इन औषधीय पत्तियों को हमेशा सामान्य हरे चारे के साथ मिलाकर ही खिलाना चाहिए। किसी भी चीज की अधिकता नुकसान पहुंचा सकती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि आपको किसी भी बकरी में बीमारी का मामूली सा भी लक्षण नजर आए, तो किसी भी देसी नुस्खे पर निर्भर रहने के बजाय तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। सही समय पर लिया गया इलाज ही पशुपालकों की मेहनत और उनकी पूंजी को सुरक्षित रखता है।

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