मानसून के साथ बाजारों में फुटकून की धूम
झारखंड में मानसून की पहली फुहारों के साथ ही स्थानीय बाजारों में एक बेहद खास और पारंपरिक सब्जी ने दस्तक दे दी है। इस सब्जी का नाम फुटकून है, जिसे स्थानीय स्तर पर कई लोग रगड़ा के नाम से भी जानते हैं। यह सब्जी न केवल अपने अनोखे स्वाद के लिए जानी जाती है, बल्कि अपनी उपलब्धता के कारण भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी रहती है। यह प्राकृतिक रूप से केवल बारिश के मौसम में उगती है और साल में केवल 15 से 20 दिनों तक ही बाजार में उपलब्ध रहती है। यही मुख्य कारण है कि लोग पूरे साल इसका इंतजार करते हैं और बाजार में आते ही इसे खरीदने के लिए होड़ लग जाती है। इस समय जमशेदपुर के स्टेशन रोड बाजार में बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं और किसान इसे बेचते हुए दिखाई दे रहे हैं।
सब्जी निकालने में होती है कड़ी मेहनत
फुटकून की खेती नहीं की जाती, बल्कि यह जमीन के अंदर प्राकृतिक रूप से पनपती है। ग्रामीण इलाकों में बारिश शुरू होते ही मिट्टी से इस सब्जी को इकट्ठा करने का काम शुरू हो जाता है। इसे निकालने की प्रक्रिया काफी श्रमसाध्य है, जिसके चलते इसे बाजार तक लाने में काफी मेहनत करनी पड़ती है। सीमित समय और उपलब्धता की कमी के कारण इसकी कीमत सामान्य सब्जियों की तुलना में काफी ज्यादा रहती है। वर्तमान में जमशेदपुर के बाजारों में इसकी कीमत ₹600 प्रति किलो के आसपास बनी हुई है।
बाजार में क्या है फुटकून का भाव
स्थानीय विक्रेता सेबाती महतो का कहना है कि मानसून के सक्रिय होते ही ग्रामीण क्षेत्रों से इसे चुनकर सीधे शहरों तक लाया जाता है। चूँकि यह सब्जी बहुत कम समय के लिए ही बाजार की शोभा बढ़ाती है, इसलिए कीमत अधिक होने के बावजूद ग्राहक इसे खरीदने में संकोच नहीं करते। फुटकून की सीमित उपलब्धता इसे और भी अधिक खास बना देती है, क्योंकि जो लोग इसे नहीं खरीद पाते, उन्हें अगले पूरे साल का इंतजार करना पड़ता है।
प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत और मटन जैसा स्वाद
फुटकून की सबसे बड़ी पहचान उसका लाजवाब स्वाद है। जो लोग इसका सेवन करते हैं, उनका मानना है कि इसका स्वाद काफी हद तक मांसाहारी व्यंजनों, विशेषकर मटन से मिलता-जुलता है। यही कारण है कि शाकाहारी भोजन पसंद करने वाले लोग भी इसे बड़े चाव से खाते हैं। इसके अतिरिक्त, यह सब्जी औषधीय गुणों और पोषक तत्वों से भी भरपूर मानी जाती है। ग्रामीणों के मुताबिक, इसमें प्रोटीन की प्रचुर मात्रा पाई जाती है, जो शरीर के स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभदायक है।
ग्राहकों के बीच लोकप्रियता की वजह
फुटकून खरीदने आए दिवाकर महतो बताते हैं कि वे हर साल मानसून का इंतजार केवल इस सब्जी को खाने के लिए करते हैं। उन्होंने कहा कि इसकी कीमत चाहे जितनी भी हो जाए, वे इसे खरीदना कभी नहीं चूकते। इसका स्वाद इतना लाजवाब है कि एक बार चखने के बाद लोग इसे बार-बार खाना चाहते हैं। झारखंड की यह पारंपरिक मौसमी सब्जी न केवल लोगों की थाली का स्वाद बढ़ाती है, बल्कि यह राज्य की ग्रामीण संस्कृति और खानपान की पुरानी परंपराओं का भी एक अभिन्न हिस्सा है। आज के आधुनिक समय में भी फुटकून ने अपनी पहचान बनाए रखी है और यह झारखंड की थाली की एक बेशकीमती विरासत है।
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