200 साल पुराने बरगद का रहस्य
बिहार के छपरा जिले के अमनौर प्रखंड स्थित पुरैना गांव में एक ऐसा प्राकृतिक चमत्कार मौजूद है जिसे देखकर हर कोई हैरान रह जाता है। यहां एक विशाल बरगद का पेड़ स्थित है, जिसके बारे में स्थानीय लोगों का कहना है कि यह 200 वर्ष से भी अधिक पुराना है। यह पेड़ इतना विशाल हो चुका है कि इसने लगभग 5 एकड़ भूमि को अपने घेरे में ले लिया है। खास बात यह है कि यहां किसी ने अलग से बरगद का पौधा नहीं लगाया, बल्कि एक ही मूल पेड़ से शाखाएं निकलकर सैकड़ों की संख्या में नए पेड़ों के रूप में विकसित हो गई हैं। आज इस स्थान पर एक घना जंगल जैसा दृश्य नजर आता है, जहां 500 से अधिक बरगद के पेड़ एक ही स्थान पर खड़े दिखाई देते हैं।
कैसे बना 5 एकड़ का विशाल जंगल
ग्रामीणों के मुताबिक, इस अद्भुत बरगद के पेड़ का इतिहास किसी को ठीक से ज्ञात नहीं है। आज तक किसी को यह नहीं पता चला कि इस पेड़ को किसने और कब लगाया था। यह पेड़ समय के साथ अपने आप फैलता गया। इस प्रक्रिया के पीछे की कहानी बेहद दिलचस्प है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि जब भी इलाके में तेज आंधी या तूफान आता है, तो इस विशाल पेड़ की भारी डालियां टूटकर जमीन पर गिर जाती हैं। प्रकृति का यह ऐसा करिश्मा है कि उन टूटी हुई डालियों में अपने आप जड़ें निकल आती हैं और कुछ ही समय में वे डालियां एक नए, हरे-भरे पेड़ का रूप ले लेती हैं। इसी तरह से यह सिलसिला चलता रहा और बरगद का पेड़ धीरे-धीरे 5 एकड़ से भी अधिक जमीन पर फैल गया।
धार्मिक आस्था का केंद्र है बरहम बाबा
यह स्थान केवल एक प्राकृतिक अजूबा ही नहीं, बल्कि आस्था का बड़ा केंद्र भी है। स्थानीय लोग इस स्थान को बरहम बाबा के नाम से पूजते हैं। इस पेड़ को लेकर गांव वालों की गहरी धार्मिक मान्यता जुड़ी हुई है। दूर-दूर से श्रद्धालु यहां अपनी मन्नतें लेकर आते हैं और लोगों का मानना है कि यहां मांगी गई हर मुराद पूरी होती है। पेड़ की हर डाल और उसकी छाया के प्रति ग्रामीणों में गहरा सम्मान है। इस पूरे क्षेत्र की रक्षा और देखभाल वहां के स्थानीय लोग ही मिलकर करते हैं।
जमीन पर पेड़ का फैलना माना जाता है शुभ
आमतौर पर लोग अपनी जमीन पर किसी पेड़ को फैलने से रोकना चाहते हैं, लेकिन पुरैना गांव की कहानी इससे बिल्कुल अलग है। यहाँ जिस भी किसान की जमीन पर बरगद की डाल गिरती है और नया पेड़ उगता है, उसे लोग बहुत ही शुभ मानते हैं। ग्रामीणों के अनुसार, जिस जमीन पर यह पेड़ फैलता है, वहां के मालिक का भाग्य उदय हो जाता है। लोगों का विश्वास है कि जैसे-जैसे पेड़ की शाखाएं फैलती हैं और वह हरा-भरा होता है, वैसे-वैसे घर में खुशहाली और सुख-शांति का वास होने लगता है। यही मुख्य कारण है कि कोई भी ग्रामीण इस बरगद के पेड़ को नुकसान नहीं पहुंचाता और न ही उसे जड़ से उखाड़ने या काटने की कोशिश करता है।
सड़क को हटाना स्वीकार किया, लेकिन पेड़ को नहीं
इस बरगद की विशालता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसने आने-जाने वाली पुरानी सड़क को भी अपने दायरे में ले लिया था। जब पेड़ की शाखाएं सड़क के ऊपर तक फैल गईं और यातायात में बाधा बनने लगीं, तो ग्रामीणों ने पेड़ को काटने के बजाय अपनी सड़क का मार्ग ही दूसरी दिशा में मोड़ दिया। ग्रामीणों ने अपना रास्ता बदल लिया ताकि बरगद को कोई नुकसान न हो। अब स्थिति यह है कि वह नया रास्ता भी धीरे-धीरे इस पेड़ के आगोश में आता जा रहा है। स्थानीय निवासी पुनः देव सिंह ने बताया कि इस पेड़ की रक्षा करना उनका कर्तव्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आंधी-तूफान के दौरान टूटने वाली डालियों में स्वतः जड़ें निकलना और उनका स्वतंत्र पेड़ बन जाना एक ऐसा चमत्कार है, जिसे गांव का हर सदस्य संरक्षित करना अपना सौभाग्य मानता है। आज भी दूर-दराज से लोग इस अजूबे को देखने और बरहम बाबा के आशीर्वाद के लिए पुरैना गांव का रुख करते हैं।
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