समाजवादी पार्टी में मची खलबली
उत्तर प्रदेश विधानसभा में समाजवादी पार्टी के मुख्य सचेतक पद पर तैनात कमाल अख्तर द्वारा अचानक पद छोड़े जाने के बाद सूबे की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इस इस्तीफे ने समाजवादी पार्टी की आंतरिक स्थिति पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। चर्चाओं का बाजार गर्म है कि क्या पार्टी के भीतर सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की सबसे ज्यादा चर्चा है कि मुरादाबाद से सांसद रुचि वीरा के साथ कमाल अख्तर की तनातनी ही इस पूरे घटनाक्रम के पीछे का मुख्य कारण है। हाल ही में मुरादाबाद में आयोजित पीडीए पंचायत के दौरान पार्टी के भीतर मौजूद गुटबाजी पूरी तरह से सतह पर आ गई थी, क्योंकि उस कार्यक्रम में स्थानीय सांसद रुचि वीरा की अनुपस्थिति ने सबको चौंका दिया था।
कार्यक्रमों से किनारा और रुचि वीरा की नाराजगी
मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरे विवाद की शुरुआत पीडीए चौपाल के दौरान हुई थी। आयोजन के पोस्टर और बैनर में रुचि वीरा की फोटो नदारद थी, जिससे खफा होकर उन्होंने सार्वजनिक रूप से कमाल अख्तर के खिलाफ अपनी कड़ी नाराजगी जताई थी। सांसद रुचि वीरा ने आरोप लगाया था कि कमाल अख्तर जानबूझकर उन्हें नीचा दिखाने का प्रयास करते हैं और पार्टी के महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में उन्हें आमंत्रित तक नहीं किया जाता है।
अखिलेश यादव के सामने भी नहीं थमा विवाद
सूत्रों के मुताबिक, इस आपसी खींचतान की शिकायत रुचि वीरा ने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव से भी की थी। मामले को सुलझाने के लिए अखिलेश यादव ने 25 जून को कमाल अख्तर और रुचि वीरा को लखनऊ तलब किया था। हालांकि, अखिलेश यादव की मौजूदगी में भी दोनों नेता आपस में ही उलझ पड़े और विवाद थमने के बजाय और अधिक गहरा गया।
इस्तीफे के बाद की स्थिति
कमाल अख्तर के इस्तीफे के बाद रुचि वीरा काफी संतुष्ट दिखाई दे रही हैं। उनका मानना है कि पार्टी की एकता और अनुशासन बनाए रखने के लिए अखिलेश यादव का यह निर्णय पूरी तरह सही है। वहीं, कमाल अख्तर ने अपने और रुचि वीरा के बीच किसी भी विवाद पर खुलकर कुछ भी कहने से परहेज किया है। उनका कहना है कि उन्होंने केवल अखिलेश यादव के निर्देश पर इस्तीफा दिया है और पार्टी उन्हें जो भी नई जिम्मेदारी सौंपेगी, वे उसे पूरी निष्ठा से निभाएंगे।
कमाल अख्तर का राजनीतिक कद
बता दें कि कमाल अख्तर मुरादाबाद की कांठ सीट से विधायक हैं और इससे पूर्व हसनपुर विधानसभा सीट से भी चुनाव जीत चुके हैं। मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल में उन्हें यूथ ब्रिगेड का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया था और वे राज्यसभा सदस्य के तौर पर भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। मनोज पांडे के इस्तीफा देने के बाद, जुलाई 2024 में ही अखिलेश यादव ने कमाल अख्तर को विधानसभा में मुख्य सचेतक की अहम जिम्मेदारी सौंपी थी।
क्या है अदावत की असली वजह?
इस आपसी अदावत की जड़ें काफी गहरी हैं। ऐसा माना जाता है कि कमाल अख्तर 2024 के लोकसभा चुनाव में मुरादाबाद संसदीय सीट से अपनी दावेदारी पेश करना चाहते थे। लेकिन उस समय आजम खान के दखल के बाद पार्टी ने अपना सिंबल रुचि वीरा को दे दिया था। तभी से दोनों नेताओं के बीच मनमुटाव की खबरें सामने आती रही हैं।
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