सामने आया दान चोरी का नया सच
अयोध्या में राम मंदिर दान गबन मामले की जांच जैसे जैसे आगे बढ़ रही है, चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। इस पूरे मामले में आरोपी अविनाश शुक्ला की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है। जांच के दौरान पुलिस और ट्रस्ट के सदस्यों को अविनाश के किराए के कमरे से एक ऐसा संदूक मिला है, जिसने पूरे मामले को एक नया मोड़ दे दिया है। इस संदूक की खासियत यह है कि इस पर राम राज्य कोष लिखा हुआ है और साथ ही ऑनलाइन दान स्वीकार करने के लिए एक पेटीएम क्यूआर कोड भी चस्पा किया गया है।
कमरे से बरामद हुआ चोरी का धन
जांच अधिकारियों के अनुसार, अविनाश शुक्ला जिस किराए के आवास में रह रहा था, वहां से दान में मिली राशि की हेराफेरी का बड़ा हिस्सा बरामद किया गया है। कमरे में तलाशी के दौरान एक ताला लगा हुआ बक्सा मिला, जिसे खोलने पर उसमें से बड़ी मात्रा में नकदी निकली। बताया जा रहा है कि आरोपी ने मंदिर के दान की रकम को सुरक्षित रखने के लिए इसी संदूक का इस्तेमाल किया था। सूत्रों के मुताबिक, पुलिस ने 5 जून को शाम 7:30 बजे की छापेमारी में इस कमरे से कुल 20 लाख रुपये से अधिक की राशि बरामद की थी, जिसे आरोपी ने बड़ी चालाकी से छुपा कर रखा था।
योग केंद्र और संदूक का संबंध
यह संदूक आखिर एक योग केंद्र तक कैसे पहुँचा, यह सवाल अब प्रशासन और पुलिस के लिए जांच का विषय बना हुआ है। अविनाश शुक्ला अपने भाई अभिषेक शुक्ला के साथ एक स्थानीय योग केंद्र में निवास करता था। योग केंद्र की संचालिका सीमा तिवारी के अनुसार, दोनों भाई काफी समय से वहीं रह रहे थे। गौरतलब है कि अविनाश को चंपत राय जी के माध्यम से वहां रखा गया था। अब यह प्रश्न खड़ा होता है कि जिस संदूक पर राम राज्य कोष प्रशासन का नाम और क्यूआर कोड अंकित है, वह वहां क्या कर रहा था। पुलिस इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि क्या उस संदूक का उपयोग किसी सुनियोजित तरीके से अवैध वसूली के लिए किया जा रहा था।
अविनाश शुक्ला का बैकग्राउंड
आरोपी अविनाश शुक्ला मूल रूप से प्रतापगढ़ का निवासी बताया गया है। करीब डेढ़ साल पहले वह अयोध्या आया था। मिली जानकारी के अनुसार, उसके भाई अभिषेक ने ही राम मंदिर ट्रस्ट में उसकी नियुक्ति करवाई थी। अविनाश ने विश्वास का फायदा उठाते हुए मंदिर के दान बक्सों में आने वाली राशि का गबन करना शुरू कर दिया। पुलिस ने न केवल मौके से बरामदगी की है, बल्कि आरोपी के पैतृक घर प्रतापगढ़ में भी छापेमारी की है ताकि इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके। फिलहाल, इस रहस्यमयी बक्से और उस पर लगे क्यूआर कोड ने मंदिर सुरक्षा और दान प्रबंधन पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस प्रशासन अब यह पता लगाने में जुटा है कि इस जाल में और कितने लोग शामिल हो सकते हैं।
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