हिमाचल में मॉनसून की पहली बारिश और जिस्पा में बादल फटने की घटना
हिमाचल प्रदेश में लंबे इंतजार के बाद मॉनसून ने आखिरकार अपनी दस्तक दे दी है, लेकिन इसकी पहली ही फुहारों ने राज्य में तबाही के संकेत दे दिए हैं। बीती रात लाहौल-स्पीति जिले के जिस्पा में बादल फटने की घटना सामने आई है, जिसके चलते लेह-मनाली नेशनल हाईवे पूरी तरह से अवरुद्ध हो गया है। इस आपदा के कारण हाईवे पर सैकड़ों गाड़ियां दोनों ओर फंस गई हैं। प्रशासन को मनाली की तरफ से जाने वाले वाहनों को सुरक्षा के मद्देनजर केलांग के पास ही रोकना पड़ा है। हालांकि राहत की बात यह है कि इस घटना में अब तक किसी भी प्रकार के जान-माल के नुकसान की कोई सूचना नहीं मिली है, लेकिन फ्लैश फ्लड यानी अचानक आई बाढ़ के कारण हाईवे पर आवाजाही पूरी तरह से ठप हो गई है। ज्ञात हो कि जिस्पा मनाली से करीब 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
सड़कों का हाल और भूस्खलन की समस्या
केवल जिस्पा ही नहीं, बल्कि प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी मॉनसून की पहली बारिश ने भारी मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। चंबा जिले में चंबा-तीसा मुख्य सड़क पागोला नाला के पास पूरी तरह बंद हो गई है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते यहां भूस्खलन हुआ और भारी मात्रा में मलबा सड़क पर आ गया, जिससे वाहनों का चलना मुश्किल हो गया है। मंडी जिले की बात करें तो वहां भी धर्मपुर क्षेत्र में सिद्धपुर धर्मपुर सड़क हाजरी क्रशर के पास और धर्मपुर-जोगिंद्रनगर मार्ग भंडारी मिक्सर प्लांट के पास बंद हो गए हैं। प्रशासन की टीमें इन सड़कों को बहाल करने के लिए दिन-रात काम कर रही हैं। इसके अलावा मंडी में ब्यास नदी का जलस्तर भी काफी बढ़ गया है, जिसका मुख्य कारण ऊपर की पहाड़ियों से बर्फ का पिघलना और लगातार हो रही बारिश है। स्थानीय प्रशासन ने लोगों को नदी और नालों के करीब न जाने की सख्त सलाह दी है।
लाहौल में फसलें तबाह और जनजीवन पर असर
लाहौल-स्पीति जिले के जाहलमा नाले में भी फ्लैश फ्लड की स्थिति पैदा हो गई है, जहाँ लोगों को रस्सी के सहारे नाला पार करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इस आपदा का सीधा असर किसानों पर पड़ा है। बाढ़ के पानी के कारण खेतों में लगी मटर और गोभी की फसलें बर्बाद हो गई हैं। रानिका पंचायत के पढ़ाक गांव में लगभग 5 बीघा गोभी की फसल पूरी तरह नष्ट हो गई है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। इससे एक दिन पहले यानी मंगलवार को भी शिमला के चक्कर बाईपास के पास लैंडस्लाइड की घटना हुई थी।
सड़कों की स्थिति और आपदा प्रबंधन की रिपोर्ट
हिमाचल प्रदेश आपदा प्रबंधन विभाग ने बुधवार को जारी अपनी रिपोर्ट में बताया कि बारिश के कारण 30 जून को प्रदेशभर में 45 सड़कें यातायात के लिए बंद हो गई थीं। सबसे अधिक 28 सड़कें मंडी जिले में प्रभावित थीं, जबकि कुल्लू में 12, ऊना में 2 और लाहौल-स्पीति में 1 सड़क मार्ग बाधित था। हालांकि प्रशासन के अथक प्रयासों से इनमें से कुछ सड़कों को बहाल किया गया है, लेकिन अभी भी 16 मुख्य मार्ग बंद पड़े हैं। इसके साथ ही, बारिश की वजह से प्रदेश में 84 बिजली के ट्रांसफार्मर भी ठप हो गए हैं, जिससे बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई है। हालांकि मॉनसून के आगमन के साथ ही किसानों ने धान की रोपाई का काम भी शुरू कर दिया है, विशेषकर मंडी के सरकाघाट के रिस्सा जैसे इलाकों में लोग खेतों में काम करते देखे गए हैं।
मौसम विभाग का पूर्वानुमान और अलर्ट
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के वैज्ञानिक संदीप शर्मा ने आगामी छह दिनों के लिए भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इस बार मॉनसून ने सामान्य तिथि से लगभग एक सप्ताह की देरी से प्रदेश में कदम रखा है। सामान्य तौर पर मॉनसून 22 जून के करीब शिमला पहुंच जाता है और 24 से 25 जून तक पूरे प्रदेश को कवर कर लेता है, लेकिन इस बार 30 जून तक यह केवल कुछ हिस्सों तक ही पहुंच पाया था। वर्तमान में सोमवार को शिमला, कुल्लू, लाहौल-स्पीति, सिरमौर, कांगड़ा के बड़ा भंगाल और शिमला जिले के कुछ हिस्सों में मॉनसून का आगमन हो चुका है। शेष क्षेत्रों, जैसे नारकंडा, चंबा, किन्नौर, सोलन, बिलासपुर और हमीरपुर में अगले दो से तीन दिनों के भीतर मॉनसून के पूरी तरह सक्रिय होने की संभावना है।
अतिवृष्टि को लेकर जारी येलो और ऑरेंज अलर्ट
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जून के महीने में हिमाचल में सामान्य से काफी कम बारिश हुई है, केवल कांगड़ा और एक अन्य जिले में ही बारिश का स्तर सामान्य के आसपास रहा। विभाग का अनुमान है कि पूरे मॉनसून सत्र में कुल वर्षा सामान्य से कम रह सकती है। 1 जुलाई से बारिश की तीव्रता बढ़ने की संभावना है जो 6 जुलाई तक जारी रहेगी।
- 1 जुलाई: ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा और मंडी में भारी बारिश के लिए येलो अलर्ट।
- 2 जुलाई: चंबा, मंडी और सिरमौर में भारी बारिश का येलो अलर्ट, जबकि ऊना, बिलासपुर और हमीरपुर के लिए बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।
- 3 जुलाई: बिलासपुर और कांगड़ा में भारी बारिश का येलो अलर्ट, वहीं ऊना, मंडी, शिमला और सिरमौर के लिए बहुत भारी बारिश की संभावना के चलते ऑरेंज अलर्ट।
- 4 जुलाई: कांगड़ा, मंडी, शिमला, कुल्लू, ऊना और हमीरपुर सहित कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी।
संदीप शर्मा ने बताया कि 2026 का यह मॉनसून साल 2010 के बाद सबसे देरी से आने वाला मॉनसून है, जब 5 जुलाई को मॉनसून ने राज्य में प्रवेश किया था। वहीं साल 2022 में भी मॉनसून 29 जून के करीब पहुंचा था। वर्तमान में हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं और प्रशासन पूरी तरह से सतर्क है।
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