इंडिया गठबंधन को मिली नई संजीवनी
बिहार और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से ठीक पहले, विपक्षी दलों ने देश की चुनावी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मुख्य रूप से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विपक्ष ने अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। इस कड़ी में विपक्षी दलों ने भारत के चीफ जस्टिस को एक संयुक्त पत्र सौंपा है। इस पत्र में केवल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की आलोचना ही नहीं है, बल्कि विपक्षी राजनीति के गलियारों में फिर से बढ़ती एकजुटता का संदेश भी छिपा है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस पत्र पर आम आदमी पार्टी और डीएमके ने भी हस्ताक्षर किए हैं, जिन्होंने पिछले कुछ समय से इंडिया गठबंधन से दूरी बना ली थी।
SURE के जरिए विपक्ष का नया संकल्प
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस घटनाक्रम की जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि 8 जून 2026 को आयोजित इंडिया गठबंधन की बैठक में कुल 21 राजनीतिक दलों और एक निर्दलीय सांसद ने हिस्सा लिया था। उसी बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि चुनावी संस्थाओं की निष्पक्षता को लेकर चीफ जस्टिस को एक साझा पत्र लिखा जाए। अब उसी निर्णय पर अमल करते हुए कुल 23 राजनीतिक दलों और 1 निर्दलीय सांसद के हस्ताक्षरों के साथ यह पत्र सौंपा गया है। जयराम रमेश ने इस नई एकजुटता को SURE नाम दिया है, जिसका अर्थ है:
- Solidarity - एकजुटता
- Unity - एकता
- Resistance - प्रतिरोध
विपक्ष ने इस शब्द के जरिए यह संदेश दिया है कि वे आने वाले समय में साझा संघर्ष और समन्वय के साथ अपनी रणनीति को आगे बढ़ाएंगे।
आम आदमी पार्टी और डीएमके की वापसी के मायने
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस पत्र पर आम आदमी पार्टी और डीएमके के हस्ताक्षर होना विपक्षी एकता के लिए एक बड़ी राहत है। पिछले कुछ महीनों में आम आदमी पार्टी इंडिया गठबंधन के कार्यक्रमों में कम सक्रिय नजर आ रही थी। वहीं, डीएमके ने भी हाल ही में हुई विपक्ष की बैठकों से किनारा कर लिया था। संसद में बैठने की व्यवस्था और अन्य मुद्दों पर भी डीएमके की नाराजगी खुलकर सामने आई थी। ऐसे में, एक साझा दस्तावेज पर इन दोनों दलों का आना यह दर्शाता है कि राष्ट्रीय स्तर के बड़े मुद्दों पर ये दल अभी भी एकजुट होने को तैयार हैं। यह कदम बीजेपी के लिए आने वाले दिनों में एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है क्योंकि संसद में सरकार को घेरने के लिए अब विपक्ष का कुनबा फिर से बड़ा दिख रहा है।
क्षेत्रीय हितों और गठबंधन के बीच संतुलन
लोकसभा चुनाव के बाद यह देखने में आया था कि कई क्षेत्रीय दल अपने-अपने राज्यों के राजनीतिक हितों को ध्यान में रखकर अलग-अलग राह अपना रहे थे। इससे इंडिया गठबंधन की मजबूती पर सवालिया निशान खड़े हो रहे थे। हालांकि, इस संयुक्त पहल ने उन अटकलों पर फिलहाल विराम लगा दिया है। अब यह साफ है कि राष्ट्रीय मुद्दों पर विपक्ष अपनी बिखरी हुई शक्ति को फिर से इकट्ठा करने की कोशिश कर रहा है।
संसद में डीएमके की भूमिका पर सबकी नजर
संसद के आगामी सत्रों में डीएमके की सक्रियता को लेकर चर्चाएं तेज हैं। दक्षिण भारत में अपनी गहरी पैठ रखने वाली डीएमके लंबे समय से परिसीमन यानी Delimitation के मुद्दे पर केंद्र सरकार को आगाह करती रही है। पार्टी का स्पष्ट तर्क है कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण पर बेहतर काम किया है, उन्हें सीटों के नए निर्धारण में किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं होना चाहिए। साथ ही, महिला आरक्षण कानून को लागू करने की प्रक्रिया भी जनगणना और परिसीमन से जुड़ी है। यदि केंद्र सरकार संसद में इनसे जुड़े विधेयक पेश करती है, तो डीएमके के साथ आने से विपक्ष की स्थिति मजबूत हो जाएगी। यदि डीएमके अन्य विपक्षी दलों के साथ मिलकर सदन में डटी रहती है, तो सरकार के लिए बिना किसी बड़े गतिरोध के बिल पास करवाना टेढ़ी खीर साबित होगा।
चुनौतियां अभी भी बाकी हैं
यह कहना कि इंडिया गठबंधन की सभी आंतरिक दरारें इस पत्र से भर गई हैं, शायद थोड़ी जल्दबाजी होगी। देश के कई राज्यों में विपक्षी दलों के बीच आज भी तीखी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा जारी है। उदाहरण के तौर पर पंजाब को देखा जा सकता है, जहां कांग्रेस और आम आदमी पार्टी एक-दूसरे के धुर विरोधी हैं। अगले साल वहां चुनाव होने हैं और वहां दोनों दल एक-दूसरे के खिलाफ ही चुनावी मैदान में होंगे। इसके बावजूद, चुनाव आयोग की प्रक्रिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं जैसे बुनियादी मसलों पर साथ आना यह साबित करता है कि विपक्ष राष्ट्रीय स्तर पर एक समन्वित रणनीति बनाने का प्रयास कर रहा है। फिलहाल, चीफ जस्टिस को लिखा गया यह पत्र केवल एक कानूनी या प्रक्रियात्मक चिंता का दस्तावेज नहीं है, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संदेश है। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह एकजुटता आने वाले संसद सत्र में महज एक सांकेतिक विरोध तक सीमित रहती है या फिर सरकार के विधायी एजेंडे के लिए एक बड़ी बाधा बनकर उभरती है।
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