ग्वालियर की अदालत का कड़ा रुख
मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। ग्वालियर स्थित विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। यह मामला एक पुराने कानूनी विवाद से जुड़ा हुआ है, जिसमें पटवारी की अनुपस्थिति के कारण अदालत ने यह कठोर कदम उठाया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने भिंड पुलिस को साफ निर्देश दिए हैं कि वारंट का पालन सुनिश्चित किया जाए।
पुलिस को कड़ी फटकार और अल्टीमेटम
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गहरा असंतोष व्यक्त किया। मजिस्ट्रेट ने भिंड पुलिस को चेतावनी देते हुए स्पष्ट कहा कि यदि इस बार वारंट तामील नहीं कराया गया, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अदालत ने भिंड के पुलिस अधीक्षक (एसपी) को विशेष टीम बनाने के निर्देश दिए हैं ताकि आरोपी को खोजकर कोर्ट में पेश किया जा सके। मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को निर्धारित की गई है।
क्यों जारी हुआ वारंट?
अदालत ने सुनवाई के दौरान तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि जीतू पटवारी एक प्रमुख राजनेता हैं और उनके बयान और गतिविधियां लगातार मीडिया और समाचार पत्रों में चर्चा का विषय बनी रहती हैं। ऐसे में पुलिस की यह दलील कि वह आरोपी को ढूंढ पाने में असमर्थ हैं, गले नहीं उतरती। कोर्ट ने संदेह जताया कि शायद पुलिस जानबूझकर आरोपी को अनुचित संरक्षण देने का प्रयास कर रही है। इससे पहले भी उन्हें कोर्ट में हाजिर होने के लिए समन और जमानती वारंट भेजे गए थे, लेकिन उन्होंने उन आदेशों का पालन नहीं किया, जिसके बाद अब कोर्ट ने गिरफ्तारी वारंट जारी करने का निर्णय लिया है।
क्या है पूरा मामला?
यह कानूनी विवाद साल 2024 के लोकसभा चुनाव के समय का है। भिंड जिले के उमरी थाने में जीतू पटवारी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। इस मामले की शुरुआत बहुजन समाज पार्टी के पदाधिकारी अशोक गुप्ता की शिकायत के बाद हुई थी। दरअसल, पटवारी ने बसपा के प्रत्याशी देवाशीष पर भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलीभगत करने का आरोप लगाया था। इस बयान से नाराज होकर अशोक गुप्ता ने उमरी थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
पुलिस की भूमिका पर सवाल
चार्जशीट दाखिल होने के बावजूद अदालत में पेश न होना और समन को नजरअंदाज करना अब जीतू पटवारी के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है। अब पूरी जिम्मेदारी भिंड पुलिस पर है कि वह कोर्ट के निर्देशों का कितनी तत्परता से पालन करती है। कोर्ट के इस अल्टीमेटम के बाद राज्य में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं, क्योंकि एक प्रमुख विपक्षी दल के अध्यक्ष के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट का मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सबकी निगाहें 27 जुलाई की अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां पुलिस को अदालत को जवाब देना होगा।
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