चेन्नई/नई दिल्ली: विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A. (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस) को एक बड़ा झटका लगा है। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने ऐलान किया है कि वह 8 जून को नई दिल्ली में प्रस्तावित गठबंधन की बैठक में शामिल नहीं होगी। पार्टी का कहना है कि इस बैठक में कांग्रेस भी मौजूद रहेगी और तमिलनाडु के ताजा राजनीतिक हालात के बाद उसके कार्यकर्ता कांग्रेस से खासे नाराज हैं।
'विश्वासघात से कार्यकर्ता गहराई से आहत'
गुरुवार को जारी एक बयान में DMK ने कहा कि तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस की ओर से उठाए गए कदमों को पार्टी के कार्यकर्ता 'विश्वासघात' के रूप में देख रहे हैं। यही वजह है कि कार्यकर्ताओं की भावनाओं का आदर करते हुए पार्टी ने 8 जून की बैठक से दूरी बनाने का निर्णय लिया है। बयान में कहा गया, 'तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस पार्टी द्वारा DMK के साथ किए गए विश्वासघात से हमारे कार्यकर्ता गहराई से आहत हैं।'
कांग्रेस की मौजूदगी बनी वजह
पार्टी ने आगे कहा, 'कार्यकर्ताओं की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए DMK 8 जून को नई दिल्ली में होने वाली I.N.D.I.A. की बैठक में हिस्सा नहीं लेगी, खासतौर से इसलिए क्योंकि इस बैठक में कांग्रेस भी शामिल हो रही है।' हालांकि DMK ने स्पष्ट किया कि वह केवल इसी बैठक से अलग रह रही है और देशहित से जुड़े मसलों पर अपनी आवाज पहले की तरह बुलंद करती रहेगी। पार्टी के अनुसार, अगर बैठक में मौजूद अन्य दल राष्ट्रीय हित और जनकल्याण से जुड़े विषय उठाते हैं, तो DMK उनका समर्थन करने और अपनी राय रखने से पीछे नहीं हटेगी।
तमिलनाडु चुनाव के बाद गहराई नाराजगी
माना जा रहा है कि DMK की नाराजगी की जड़ तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस का रुख है। इस चुनाव में DMK के नेतृत्व वाला गठबंधन हार गया था, जबकि तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में सामने आई। इसके बाद कांग्रेस ने TVK को सरकार बनाने के लिए समर्थन दे दिया। उल्लेखनीय है कि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस DMK के नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा थी और उसने पांच सीटों पर जीत हासिल की थी। इसके बावजूद सरकार गठन के समय TVK को समर्थन देना DMK को नागवार गुजरा।
लोकसभा में अलग बैठने की मांग
मतभेदों के संकेत पहले भी सामने आ चुके थे। कुछ समय पहले DMK ने लोकसभा में अपने सांसदों के लिए कांग्रेस से अलग बैठने की औपचारिक मांग रखी थी। दोनों दल लंबे अरसे से सहयोगी रहे हैं, लेकिन इस कदम को आपसी दूरी बढ़ने के संकेत के तौर पर देखा गया।
विपक्षी गठबंधन के लिए चिंता
DMK को INDIA गठबंधन के सबसे मजबूत और असरदार सहयोगियों में गिना जाता है। पार्टी लगातार बीजेपी के खिलाफ मुखर रही है और विपक्षी एकजुटता में उसकी अहम भूमिका रही है। ऐसे में 8 जून की बैठक से उसकी दूरी को विपक्षी खेमे के लिए बड़े राजनीतिक झटके के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर कांग्रेस और DMK के बीच मतभेद जल्द नहीं सुलझे, तो इसका असर सिर्फ तमिलनाडु की सियासत तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी एकता पर भी पड़ सकता है।
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