बीकानेर के रेगिस्तान में मिला जीवों का खजाना, 12 तरह की छिपकली और 15 प्रजाति के सांपों की हुई पहचान

राजस्थान का बीकानेर जिला अपनी समृद्ध जैव विविधता के कारण वैज्ञानिकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है, जहाँ हालिया शोध में सरीसृप जीवों की नई प्रजातियों की पुष्टि हुई है।

बीकानेर के रेतीले धोरों में मिली नई प्रजातियां

राजस्थान का बीकानेर अपनी अनूठी भौगोलिक बनावट और जैव विविधता के लिए हमेशा से चर्चा का विषय रहा है। हालिया शोध के अनुसार, इस क्षेत्र में सरीसृप यानी रेप्टाइल्स की संख्या में बड़ा इजाफा हुआ है। नए आंकड़ों के मुताबिक, अब यहाँ छिपकलियों की कुल 12 और सांपों की 15 अलग-अलग प्रजातियां मौजूद हैं। यह जानकारी सामने आने के बाद पर्यावरण प्रेमियों और जीव वैज्ञानिकों में उत्साह देखा जा रहा है।

डेजर्ट ट्राइंगल की खास भूमिका

राजकीय डूंगर महाविद्यालय के जूलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. प्रताप सिंह का कहना है कि बीकानेर, जोधपुर और जैसलमेर का इलाका मिलकर राजस्थान का डेजर्ट ट्राइंगल तैयार करता है। यह क्षेत्र सरीसृप जीवों के पनपने और रहने के लिए पूरी दुनिया में सबसे अनुकूल और आदर्श माना जाता है।

दशकों की मेहनत और शोध का नतीजा

यह महत्वपूर्ण रिपोर्ट करीब 10 वर्षों के लंबे सर्वे और फील्ड ऑब्जर्वेशन का निचोड़ है। इस अध्ययन को वर्ष 2024 में प्रतिष्ठित इंटरनेशनल जर्नल ऑफ फौना एंड बायोलॉजिकल स्टडीज में प्रकाशित किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, ये जीव हमारे पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। खास तौर पर छिपकलियां फसलों को नुकसान पहुँचाने वाले कीट-पतंगों पर नियंत्रण रखकर खेती को सुरक्षित रखने में मददगार साबित होती हैं।

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