सीमा पर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में चीनी सेना की घुसपैठ से जुड़ी तमाम अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि भारतीय सीमा के भीतर चीन का कोई भी अतिक्रमण नहीं हुआ है। सरकार ने इन दावों को पूरी तरह निराधार और तथ्यों से परे बताया है। रिजिजू के मुताबिक, भारत और चीन के बीच सीमा अभी पूरी तरह से निर्धारित नहीं है, जिसकी वजह से दोनों देशों की सेनाओं के बीच कई बार ट्रांसग्रेशन यानी सीमा रेखा को लेकर अलग-अलग समझ के कारण आगे बढ़ने की घटनाएं सामने आती रहती हैं।
ट्रांसग्रेशन और घुसपैठ में फर्क
केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि ट्रांसग्रेशन और वास्तविक घुसपैठ के बीच बहुत बड़ा अंतर होता है। उन्होंने बताया कि वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC के सीमांकन का काम अभी तक पूरा नहीं हुआ है। दोनों देशों की सीमा को लेकर अपनी-अपनी धारणाएं और दावे हैं। इसी वैचारिक मतभेद के कारण कई बार दोनों तरफ के सैनिक अपनी समझ के अनुसार सीमा के करीब पहुंच जाते हैं। रिजिजू के अनुसार, इसे कभी भी किसी देश का स्थायी कब्जा या घुसपैठ नहीं माना जा सकता है। भारतीय सेना ने भी इसी दृष्टिकोण को दोहराते हुए कहा है कि मीडिया में चल रही घुसपैठ की खबरें निराधार हैं और उनका कोई आधार नहीं है।
जनजातीय संगठन का दावा और सरकारी जवाब
यह पूरा विवाद तब सुर्खियों में आया जब अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिले से जुड़े एक स्थानीय जनजातीय संगठन ने दावा किया कि चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने पिछले छह वर्षों में उनके पारंपरिक चरागाहों, शिकार करने वाली जगहों और खेती की जमीन के कुछ हिस्सों पर धीरे-धीरे कब्जा जमा लिया है। संगठन ने इन आरोपों की उच्च स्तरीय सरकारी जांच कराने की मांग भी उठाई थी। इसके जवाब में भारतीय सेना ने अपना आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि हाल के दिनों में चीनी सेना की घुसपैठ और वहां कैंप बनाने की खबरें पूरी तरह भ्रामक हैं। सेना ने स्पष्ट किया कि वे सीमावर्ती क्षेत्रों की स्थिति पर चौबीसों घंटे बारीकी से नजर रख रहे हैं और नागरिकों को गलत सूचनाओं पर विश्वास नहीं करना चाहिए।
सीमावर्ती विकास को मिली रफ्तार
किरेन रिजिजू ने इस मौके पर सीमावर्ती क्षेत्रों में हुए विकास कार्यों पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने पिछली सरकारों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों ने सीमा से सटे इलाकों में बुनियादी ढांचे के विकास पर उतना ध्यान नहीं दिया था, जितना दिया जाना चाहिए था। हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्तमान सरकार ने सड़क, पुल, कनेक्टिविटी और अन्य रणनीतिक ढांचे के निर्माण को सबसे ऊपर रखा है। मंत्री ने कहा कि इन क्षेत्रों में तेजी से हो रहे विकास कार्यों ने न केवल स्थानीय जीवन को सुगम बनाया है, बल्कि देश की सुरक्षा व्यवस्था को भी पहले से कहीं अधिक मजबूत और चाक-चौबंद कर दिया है।
राजनयिक स्तर पर बातचीत जारी
चीन के साथ चल रहे सीमा विवाद के समाधान के लिए राजनयिक स्तर पर लगातार संवाद जारी है। इस दिशा में पिछले महीने बीजिंग में भारत-चीन सीमा मामलों पर वर्किंग मैकनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड कोऑर्डिनेशन (WMCC) की 35वीं बैठक का आयोजन हुआ था। विदेश मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, यह बैठक काफी सकारात्मक और भविष्य के लिए दिशा तय करने वाली रही। दोनों देशों ने सीमा पर शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए हुई प्रगति पर संतोष जाहिर किया है। इस दौरान सीमा प्रबंधन, सीमांकन की प्रक्रिया, संस्थागत तंत्रों को मजबूत करने और सीमा पार सहयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई है, ताकि किसी भी तरह के भ्रम की स्थिति को समय रहते बातचीत के जरिए सुलझाया जा सके।
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