काशी में अनोखे अंदाज में मनाया गया जन्मदिन
समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव का आज 53वां जन्मदिन है। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश भर में सपा कार्यकर्ताओं द्वारा जश्न का माहौल है, लेकिन वाराणसी में पार्टी समर्थकों ने इसे एक अलग ही रंग दिया है। काशी की धरती पर कार्यकर्ताओं ने न केवल वैदिक मंत्रोच्चार और हवन के साथ उनके दीर्घायु होने की कामना की, बल्कि उन्हें भगवान कृष्ण के स्वरूप में दिखाकर एक बड़ा राजनीतिक संदेश देने का प्रयास किया है।
कृष्ण स्वरूप में संविधान का संदेश
वाराणसी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान सपा कार्यकर्ताओं ने एक पोस्टर भी जारी किया, जिसमें अखिलेश यादव को भगवान श्रीकृष्ण की वेशभूषा में दिखाया गया है। इस पोस्टर की सबसे खास बात यह है कि भगवान कृष्ण बने अखिलेश यादव के हाथों में भारत का संविधान है। सपा नेताओं का कहना है कि वर्तमान राजनीतिक माहौल में देश का संविधान खतरे में है और अखिलेश यादव ही वह एकमात्र नेता हैं जो इसे बचा सकते हैं। कार्यकर्ताओं ने दावा किया है कि जिस तरह भगवान कृष्ण ने अन्याय के खिलाफ संघर्ष किया था, उसी तरह अखिलेश यादव भी आम लोगों की आवाज बनकर अन्याय के खिलाफ मजबूती से खड़े हैं।
अन्याय के खिलाफ मुखर आवाज
सपा नेता अजय फौजी ने इस मौके पर कहा कि हम अखिलेश यादव को श्रीकृष्ण का ही एक रूप मानते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि अखिलेश यादव ने राम मंदिर में चंदा चोरी जैसे गंभीर मामलों को उजागर किया था और हाल ही में नीट परीक्षा पेपर लीक मामले पर भी सरकार को घेरने का काम किया है। उनके अनुसार, अखिलेश यादव लगातार उन मुद्दों को उठाते हैं जिन्हें दबाने की कोशिश की जाती है। उनके जन्मदिन के उपलक्ष्य में किए गए हवन और पूजा में सपा नेताओं ने प्रार्थना की कि अखिलेश यादव हमेशा स्वस्थ रहें और अन्याय के खिलाफ लड़ाई जारी रखें।
2027 के विधानसभा चुनाव का संकल्प
वाराणसी में आयोजित इस विशेष पूजा अनुष्ठान का राजनीतिक उद्देश्य भी काफी स्पष्ट रहा। कार्यकर्ताओं ने न केवल अखिलेश यादव के दीर्घायु होने की कामना की, बल्कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की ऐतिहासिक जीत के लिए भी विशेष प्रार्थनाएं कीं। इस दौरान वहां मौजूद समर्थकों ने 27 में फिर सपा सरकार के जोरदार नारे लगाए, जिससे साफ जाहिर होता है कि पार्टी अभी से चुनावी मोड में आ चुकी है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय
वाराणसी में किसी बड़े नेता को पौराणिक स्वरूप में दिखाने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पूर्व कांग्रेस नेता राहुल गांधी को भी उनके जन्मदिन पर वाराणसी में भगवान परशुराम के स्वरूप में दिखाया गया था। अब अखिलेश यादव के कृष्ण अवतार वाली तस्वीरें सामने आने के बाद सियासी गलियारों में बहस तेज हो गई है। यह देखना दिलचस्प होगा कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले इस प्रकार के धार्मिक और राजनीतिक प्रतीकों का उपयोग मतदाताओं पर क्या प्रभाव डालता है।
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