वर्मी कंपोस्ट के लिए बरसात चुनौतीपूर्ण
आज के दौर में किसान रसायनों से दूर होकर जैविक खेती की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं, जिसमें वर्मी कंपोस्ट यानी केंचुआ खाद की भूमिका सबसे अहम है। यह न केवल मिट्टी की उर्वरक शक्ति को बढ़ाती है, बल्कि फसलों की पैदावार में भी बेहतरीन परिणाम देती है। हालांकि, जैसे ही मानसून का आगमन होता है, केंचुआ खाद बनाने वाले किसानों की चुनौतियां बढ़ जाती हैं। कृषि विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि बरसात के दौरान की गई जरा सी लापरवाही आपकी पूरी मेहनत पर पानी फेर सकती है और केंचुओं की मौत का कारण बन सकती है।
केंचुओं के लिए जानलेवा है अधिक नमी
कृषि विशेषज्ञ परवेश शुक्ला के अनुसार, केंचुओं को जीवित रहने के लिए निश्चित रूप से नमी की आवश्यकता होती है, लेकिन पानी का अधिक जमाव उनके लिए किसी जहर से कम नहीं है। यदि वर्मी कंपोस्ट के बेड में पानी भरा रहता है, तो वहां ऑक्सीजन का संचार पूरी तरह से रुक जाता है। हवा की कमी के चलते केंचुओं का दम घुटने लगता है और वे बड़ी संख्या में मरने लगते हैं। इस स्थिति में खाद बनाने की पूरी प्रक्रिया बाधित हो जाती है और तैयार खाद की गुणवत्ता भी बुरी तरह प्रभावित होती है।
बेड की सुरक्षा के लिए जरूरी इंतजाम
बरसात के दिनों में नुकसान से बचने के लिए बेड का प्रबंधन सबसे महत्वपूर्ण है। परवेश शुक्ला ने सलाह दी है कि वर्मी कंपोस्ट के बेड को हमेशा समतल जमीन से ऊंचाई पर बनाना चाहिए। यदि बेड को ढलान या ऊंचाई पर बनाया जाएगा, तो बारिश का पानी उसके पास इकट्ठा नहीं हो पाएगा। साथ ही, खुले स्थानों पर बने बेड को सुरक्षित रखने के लिए तिरपाल या टिन शेड का उपयोग अनिवार्य है। यह कवरिंग बारिश की बूंदों को सीधे बेड के अंदर जाने से रोकेगी और खाद को गीला होने से बचाएगी।
नियमित देखरेख का महत्व
केवल बेड बना देना ही पर्याप्त नहीं है। बरसात के दौरान नियमित अंतराल पर बेड की निगरानी करना बहुत आवश्यक है। यदि कहीं भी जलभराव की स्थिति नजर आती है, तो उसे तुरंत हटाना चाहिए। इसके अतिरिक्त, बेड में हवा का आवागमन बना रहे, यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है ताकि केंचुओं को निरंतर ऑक्सीजन मिलती रहे। बेड में नमी का संतुलन बनाए रखना ही अच्छी खाद की कुंजी है।
किन चीजों से करें परहेज
किसानों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि बेड में केवल अच्छी तरह से सड़ा हुआ गोबर, सूखी पत्तियां और जैविक कचरे का ही प्रयोग किया जाए। अक्सर किसान जल्दीबाजी में ताजा गोबर डाल देते हैं, जो केंचुओं के लिए काफी हानिकारक होता है। इसके अलावा, किसी भी प्रकार का रासायनिक पदार्थ, प्लास्टिक का कचरा या अन्य अशुद्ध सामग्री बेड में बिल्कुल न डालें। यदि इन सावधानियों का पालन किया जाए, तो केंचुए स्वस्थ रहते हैं, खाद जल्दी तैयार होती है और उसकी गुणवत्ता भी बेहतर होती है। यह खाद न सिर्फ मिट्टी को उपजाऊ बनाती है, बल्कि किसानों की रासायनिक खाद पर निर्भरता कम करके खेती की लागत को भी कम करने में मदद करती है।
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