योगिनी एकादशी व्रत तिथि पर उलझन
हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का अत्यंत महत्व है। एक वर्ष में कुल 24 एकादशी व्रत आते हैं और प्रत्येक मास में दो एकादशी मनाई जाती हैं। वर्तमान में आषाढ़ का पावन महीना चल रहा है, जिसे शास्त्रों में अत्यंत पवित्र माना गया है। इस महीने में आने वाली एकादशी का अपना विशेष आध्यात्मिक महत्व है। इस बार योगिनी एकादशी की सही तारीख को लेकर भक्तों के मन में कुछ संशय की स्थिति बनी हुई है। इस असमंजस को दूर करने के लिए उज्जैन के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य रवि शुक्ला ने वैदिक पंचांग के आधार पर पूरी जानकारी साझा की है, ताकि भक्त बिना किसी उलझन के भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त कर सकें।
सही तिथि और समय का निर्धारण
ज्योतिषाचार्य रवि शुक्ला के अनुसार, वैदिक पंचांग की गणना में आषाढ़ कृष्ण एकादशी तिथि का आरंभ 09 जुलाई को शाम 07 बजकर 46 मिनट के आसपास होगा। यह तिथि अगले दिन यानी 10 जुलाई को शाम 04 बजकर 52 मिनट के लगभग समाप्त हो जाएगी। सनातन धर्म में उदयातिथि का विशेष महत्व होता है, जिसके आधार पर योगिनी एकादशी का व्रत 10 जुलाई, दिन शुक्रवार को रखा जाना शास्त्र सम्मत है। इसी दिन व्रत का पालन करना और पूजा करना फलदायी रहेगा।
योगिनी एकादशी का आध्यात्मिक महत्व
शास्त्रों के अनुसार, योगिनी एकादशी को अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रसिद्ध एकादशियों में गिना जाता है। इस दिन भगवान श्री हरि विष्णु के साथ मां लक्ष्मी का पूजन करने से भक्त के जीवन में खुशियों का संचार होता है। इस एकादशी के महत्व को स्पष्ट करते हुए बताया गया है कि यदि कोई व्यक्ति पूर्ण निष्ठा के साथ इस दिन व्रत रखता है और विधि-विधान से पूजा-अर्चना करता है, तो उसे 88,000 ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर पुण्य फल की प्राप्ति होती है। इसके प्रभाव से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, जीवन के कष्ट मिटते हैं और दरिद्रता तथा पुराने पापों से मुक्ति मिलती है।
पूजा और व्रत के दौरान पालन करने योग्य नियम
एकादशी के दिन कुछ विशेष नियमों का पालन करने से भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है। व्रत करने वालों को ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प लेना चाहिए। पूजा के समय भगवान श्री हरि को पीली मिठाई का भोग अर्पित करना श्रेष्ठ माना गया है, क्योंकि पीला रंग उन्हें अत्यंत प्रिय है। भगवान विष्णु की आराधना के साथ-साथ मां लक्ष्मी का भी पूजन करें। इस दिन पीपल के पेड़ पर जल अर्पित करना भी बहुत शुभ माना जाता है।
इन बातों का रखें विशेष ध्यान
धार्मिक मान्यताओं और शास्त्र के अनुसार, एकादशी के दिन कुछ कार्य करने और कुछ से बचने की सलाह दी जाती है ताकि व्रत का पूर्ण लाभ मिल सके:
- एकादशी के दिन अन्न का सेवन पूरी तरह वर्जित माना गया है, इसलिए इसका पालन करें।
- जो लोग किसी कारणवश व्रत नहीं रख रहे हैं, उन्हें भी इस दिन भूलकर भी चावल का सेवन नहीं करना चाहिए।
- इस पावन दिवस पर बाल कटवाने या नाखून काटने जैसे कार्य करना अशुभ माना जाता है।
- व्रत के दौरान सामर्थ्य अनुसार ब्राह्मणों को दान अवश्य देना चाहिए।
- एकादशी व्रत का पारण करने के बाद अन्न का दान करना अत्यंत शुभ और पुण्यकारी माना जाता है।
इन नियमों का पालन करते हुए यदि आप 10 जुलाई को योगिनी एकादशी का व्रत संपन्न करते हैं, तो श्री हरि और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा वर्ष भर बनी रहेगी।
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