आदिवासी संस्कृति और स्वाद का संगम
झारखंड अपनी समृद्ध आदिवासी संस्कृति, प्राकृतिक संपदा और अनूठी पाक कला के लिए पूरे देश में पहचाना जाता है। राज्य के सुदूर ग्रामीण अंचलों और आदिवासी समुदायों के बीच ऐसे कई व्यंजन मौजूद हैं, जो स्वाद और स्वास्थ्य का बेजोड़ मेल हैं। इन्हीं खास व्यंजनों में से एक नाम आजकल तेजी से चर्चा में है, जिसे पोड़म झिल्लु चिकन के नाम से जाना जाता है। यह व्यंजन झारखंड के आदिवासी समाज की प्राचीन पाक कला का एक जीता-जागता प्रमाण है, जो आधुनिक जीवनशैली में भी अपनी पहचान बनाए हुए है।
स्वादिष्ट और सेहतमंद होने का रहस्य
पोड़म झिल्लु चिकन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे बनाने में तेल और मसालों का अत्यधिक प्रयोग बिल्कुल नहीं किया जाता है। स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों के लिए यह एक बेहतरीन विकल्प बनकर उभरा है क्योंकि इसमें उपयोग की जाने वाली प्राकृतिक सामग्री और पकाने की धीमी प्रक्रिया पोषक तत्वों को बरकरार रखती है। इस व्यंजन को पकाने के लिए मुख्य रूप से साल के पत्तों का उपयोग किया जाता है, जो इसे एक अलग ही सोंधी महक और प्राकृतिक स्वाद देते हैं। यही कारण है कि यह व्यंजन सामान्य चिकन करी या फ्राइड चिकन से पूरी तरह अलग और लाजवाब होता है।
तैयार करने की पारंपरिक विधि
इस व्यंजन को बनाने की प्रक्रिया काफी दिलचस्प है, जिसके बारे में विकास सोरेन ने विस्तार से जानकारी दी है। सबसे पहले चिकन को बहुत सफाई से धोया जाता है और छोटे टुकड़ों में तैयार किया जाता है। इसके बाद, इसमें बारीक कटा हुआ कच्चा प्याज, टमाटर, तीखी हरी मिर्च, सरसों का तेल और कुछ आवश्यक पारंपरिक मसाले मिलाए जाते हैं। इन सभी सामग्रियों को चिकन के साथ अच्छी तरह मिलाया जाता है और थोड़ी देर के लिए मैरिनेट होने के लिए छोड़ दिया जाता है, ताकि मसालों का स्वाद मांस के रेशे-रेशे में समा जाए।
मैरिनेशन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, इस मिश्रण को साल के पत्तों में बहुत सावधानी और सफाई के साथ लपेटा जाता है। पत्तों की पोटली तैयार होने के बाद इसे धीमी आंच पर पकाया जाता है। लगभग 15 से 20 मिनट तक आग की मंद आंच पर सेंकने के दौरान, साल के पत्तों की खुशबू चिकन में रच-बस जाती है, जो इसे एक अनूठा स्वाद प्रदान करती है। जब यह बनकर तैयार होता है, तो इसकी महक किसी भी व्यक्ति को आकर्षित करने के लिए काफी होती है।
किफायती दाम और लोकप्रियता
पोड़म झिल्लु चिकन की लोकप्रियता का एक बड़ा कारण इसकी कीमत भी है। यह लजीज व्यंजन मात्र 50 रुपये प्रति प्लेट की दर से उपलब्ध कराया जाता है। प्रति प्लेट में लगभग 150 ग्राम चिकन परोसा जाता है, जो इसे एक किफायती और पौष्टिक भोजन बनाता है। अपनी इसी खासियत और स्वाद के चलते, आदित्यपुर में यह डिश काफी डिमांड में है। स्थानीय लोगों के साथ-साथ अब पर्यटक भी इस पारंपरिक स्वाद को चखने के लिए दूर-दूर से आदित्यपुर के इमली चौक पहुंच रहे हैं।
सादगी में छिपा है बेमिसाल स्वाद
झारखंड के इस व्यंजन ने यह साबित कर दिया है कि बेहतरीन स्वाद के लिए हमेशा महंगे और भारी मसालों की आवश्यकता नहीं होती। सादगी के साथ तैयार किया गया यह पोड़म झिल्लु चिकन न केवल पेट भरता है, बल्कि यह आदिवासी जीवनशैली के उस पहलू को भी दर्शाता है जहाँ प्रकृति के करीब रहकर स्वस्थ और स्वादिष्ट जीवन जिया जाता है। यदि आप भी झारखंड की यात्रा पर हैं या राज्य के पारंपरिक स्वाद की खोज में हैं, तो आदित्यपुर के इमली चौक पर जाकर इस विशेष व्यंजन का लुत्फ जरूर उठाना चाहिए। यह अनुभव आपको आदिवासी परंपराओं की गहराई और उनके व्यंजनों की सादगी का कायल बना देगा।
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