बरसात के मौसम में अमरूद की खेती की चुनौती
बिहार के समस्तीपुर और उसके आसपास के इलाकों में अमरूद की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। अक्सर किसान एक आम समस्या से जूझते हैं, जो बरसात के मौसम में अमरूद के बंपर उत्पादन से जुड़ी है। हैरानी की बात यह है कि उत्पादन तो अधिक होता है, लेकिन किसानों को इसके बदले वाजिब दाम नहीं मिल पाते। कृषि क्षेत्र के जानकारों के अनुसार, इसका सबसे बड़ा कारण बाजार में अत्यधिक आपूर्ति है। जब बाजार में माल की आवक बहुत अधिक होती है, तो स्वभाविक रूप से कीमतें गिर जाती हैं। इसके अलावा, बरसात के दौरान होने वाले अमरूद में पानी की मात्रा अधिक होती है, जिससे फल का स्वाद फीका पड़ जाता है। कम स्वाद और खराब क्वालिटी के कारण मांग घट जाती है और कड़ी मेहनत के बावजूद किसानों को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ता है।
कृषि विशेषज्ञों का आसान और प्रभावी सुझाव
इस समस्या का समाधान ढूंढते हुए कृषि विशेषज्ञ संजीत ठाकुर ने एक बेहद सरल और असरदार उपाय सुझाया है। उनका कहना है कि यदि किसान बरसात के समय अमरूद के पौधों में आने वाले छोटे फूलों और शुरुआती फलों को समय रहते तोड़कर हटा दें, तो यह उनके लिए बहुत फायदेमंद साबित होगा। ऐसा करने से पौधे की सारी ऊर्जा बच जाती है। जब पौधे को फल के रूप में अपनी शक्ति नहीं लगानी पड़ती, तो वह उस ऊर्जा को संचित कर लेता है, जिसका सीधा लाभ आगे आने वाले सीजन में मिलता है। पर्यावरण शिक्षक संजीव ठाकुर के मुताबिक, यदि किसान अभी इन छोटे फलों को हटा देते हैं, तो करीब पांच महीने के बाद जो फसल तैयार होगी, उसका आकार काफी बड़ा होगा और फल की गुणवत्ता में भी भारी सुधार देखने को मिलेगा।
दिसंबर से फरवरी तक बंपर कमाई का मौका
इस तकनीक को अपनाने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि किसान अपनी फसल को पीक सीजन के लिए तैयार कर सकते हैं। जब किसान बरसात के शुरुआती फलों को हटा देते हैं, तो उन्हें दिसंबर, जनवरी और फरवरी के महीनों में बेहतर उत्पादन मिलता है। इस दौरान बाजार में अमरूद की मांग बहुत अधिक रहती है और आवक कम होने के कारण कीमतें भी काफी अच्छी मिलती हैं।
- बड़े आकार के और मीठे स्वाद वाले अमरूद बाजार में आसानी से और अधिक दाम पर बिकते हैं।
- कई प्रगतिशील किसानों ने यह अनुभव किया है कि इस तकनीक के इस्तेमाल से उनकी कुल आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
- पौधे की ऊर्जा बचाने से न केवल फलों का साइज बढ़ता है, बल्कि उनमें मिठास और पोषक तत्व भी बेहतर होते हैं।
यह बिना किसी खर्च वाली तकनीक किसानों के लिए एक बेहतरीन विकल्प है, जो उन्हें सीजन के दौरान बाजार में प्रतिस्पर्धा करने और ज्यादा मुनाफा कमाने में मदद करती है।
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