पश्चिम एशिया की स्थिति पर ईरान और भारत का संवाद
पश्चिम एशिया के वर्तमान हालात को लेकर पूरी दुनिया की चिंताएं बढ़ती जा रही हैं, जहाँ कूटनीतिक हलचलों के बीच भी शांति की राह अभी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। इसी गहमागहमी के दौरान ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेशकियन ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन कर महत्वपूर्ण चर्चा की। दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच हुई इस लंबी वार्ता का मुख्य केंद्र पश्चिम एशिया की बदलती परिस्थितियां, वहां चल रही राजनीतिक उठापटक और ईरान की भविष्य की रणनीतियां रहीं। वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव के चलते दुनिया की बड़ी ताकतें इस समय भारत के रुख पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं, जिसे देखते हुए इस फोन कॉल को बेहद अहम माना जा रहा है।
ईरानी राष्ट्रपति ने दी ताजा हालातों की जानकारी
क्षेत्रीय स्तर पर हर पल बदलते घटनाक्रमों के बीच, ईरान के नवनियुक्त राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संपर्क साधकर उन्हें जमीनी हकीकत से अवगत कराया। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को विस्तारपूर्वक बताया कि इस वक्त पश्चिम एशिया में विभिन्न देशों के बीच बातचीत का क्या स्तर है और ईरान आगे क्या कदम उठाने की योजना बना रहा है। इस वार्ता के जरिए ईरान ने भारत के साथ अपने कूटनीतिक तालमेल को और अधिक मजबूत करने का संदेश दिया है। वहीं, प्रधानमंत्री मोदी ने भी अत्यंत सधे और प्रभावशाली शब्दों में भारत का दृष्टिकोण स्पष्ट किया, जो न केवल भारत के लिए बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है।
प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिक्रिया और शांति की उम्मीद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान और अन्य संबंधित पक्षों के बीच चल रही बातचीत की प्रगति और हालिया समझौतों का खुले दिल से स्वागत किया। प्रधानमंत्री ने इस संवाद के बारे में सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए पुष्टि की कि उन्होंने राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेशकियन के साथ पश्चिम एशिया की घटनाओं पर व्यापक विचार-विमर्श किया है। पीएम मोदी ने व्यक्त किया कि क्षेत्र में चल रहे निरंतर प्रयासों से स्थायी शांति बहाल होने की उम्मीद है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पश्चिम एशिया में स्थिरता बनाए रखने के लिए सभी देशों को एकजुट होकर काम करने की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री के अनुसार, यदि यह क्षेत्र अशांत बना रहता है, तो इसका नकारात्मक प्रभाव न केवल वहां के निवासियों पर पड़ेगा, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था इसकी चपेट में आ जाएगी। भारत ने हमेशा इस बात की पुरजोर वकालत की है कि युद्ध के बजाय बातचीत की मेज ही समाधान का एकमात्र रास्ता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य: व्यापार और सुरक्षा का बड़ा मुद्दा
इस बातचीत का सबसे संवेदनशील और रणनीतिक पहलू होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की सुरक्षा से संबंधित था। प्रधानमंत्री मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति के समक्ष यह स्पष्ट किया कि वैश्विक व्यापार और समुद्री सुरक्षा के लिए इस रास्ते का खुला रहना कितना अनिवार्य है। यह चर्चा ऐसे समय में सामने आई है जब ऐसी रिपोर्टें सामने आ रही थीं कि ईरान और ओमान मिलकर होर्मुज जलडमरूमध्य पर किसी तरह की नई कर प्रणाली या टैक्स व्यवस्था लागू करने पर विचार कर रहे हैं।
क्यों भारत के लिए यह रास्ता है अत्यंत महत्वपूर्ण?
- वैश्विक तेल आपूर्ति: दुनिया भर में समुद्री मार्ग से होने वाली कच्चे तेल की कुल आपूर्ति का लगभग 20% से 30% हिस्सा इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है।
- भारत की ऊर्जा सुरक्षा: भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी समुद्री रास्ते के माध्यम से आयात करता है।
- महंगाई का जोखिम: यदि होर्मुज के मार्ग पर किसी भी प्रकार का तनाव पैदा होता है या ईरान वहां से गुजरने वाले जहाजों पर कोई टैक्स लगाता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी।
- आर्थिक दुष्प्रभाव: तेल की बढ़ती कीमतें न केवल भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाएंगी, बल्कि पूरी दुनिया में भयंकर महंगाई का संकट पैदा कर सकती हैं।
अतः, पीएम मोदी का यह रुख कि जहाजों की आवाजाही बिना किसी रुकावट के जारी रहनी चाहिए, वैश्विक अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने के दृष्टिकोण से अत्यंत दूरदर्शी माना जा रहा है। यह बातचीत दर्शाती है कि भारत वैश्विक शांति के साथ-साथ अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सभी स्तरों पर सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
https://hindi.news18.com/news/nation/pm-modi-speaks-to-iran-president-masoud-pezeshkian-amid-middle-east-crisis-india-wants-navigation-freedom-in-hormuz-10617151.html