स्मार्टफोन कूटनीति: अमेरिकी सीनेटर ने बताया क्यों चीन पर नहीं, बल्कि भारत पर आंख मूंद कर भरोसा करता है अमेरिका

अमेरिकी सीनेटर स्टीव डेन्स ने स्मार्टफोन कूटनीति के जरिए चीन और भारत को लेकर अमेरिका के नजरिए में आए बड़े बदलाव को साफ किया है।

चीन के प्रति बढ़ता अविश्वास

अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती तल्खी अब केवल राजनीतिक बयानों तक सीमित नहीं रह गई है। अमेरिकी सीनेटर स्टीव डेन्स ने एक बेहद दिलचस्प उदाहरण के जरिए यह स्पष्ट किया है कि कैसे चीन के प्रति अमेरिका का भरोसा पूरी तरह टूट चुका है। उन्होंने इसे स्मार्टफोन कूटनीति का नाम दिया है, जो दोनों देशों के प्रति अमेरिकी रुख का आईना है।

भारत पर अटूट विश्वास

मीडिया के सामने अपनी बात रखते हुए स्टीव डेन्स ने बताया कि भारत के साथ अमेरिका के संबंध कितने भरोसेमंद हैं। उन्होंने कहा कि जब भी वे भारत की यात्रा पर आते हैं, तो बिना किसी संकोच या डर के अपना स्मार्टफोन जेब में रखकर घूमते हैं। उनके लिए भारत का दौरा सुरक्षित है और उन्हें यहां किसी भी तरह के डिजिटल जोखिम का डर नहीं सताता।

चीन की धूर्तता और जासूसी का जाल

इसके उलट चीन की यात्रा को लेकर सीनेटर का अनुभव काफी अलग है। स्टीव डेन्स का कहना है कि जब वे चीन जाते हैं, तो अपना स्मार्टफोन साथ ले जाना जोखिम भरा होता है। इसके पीछे मुख्य कारण चीन का व्यापक जासूसी नेटवर्क और स्पाईवेयर है। सीनेटर ने आरोप लगाया है कि चीन किसी भी बड़े वीआईपी शख्सियत को नहीं बख्शता और यह सब चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सीधे आदेश पर किया जाता है। अमेरिका का मानना है कि चीन का डिजिटल तंत्र विदेशी अधिकारियों की निगरानी करने के लिए तैयार किया गया है, जिसके चलते वहां भरोसा करना नामुमकिन हो गया है।

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