7 साल के बच्चे का वजन पहुंचा 116 किलो, सांसें थमने के बाद माता-पिता पर दर्ज हुआ हत्या का केस

अमेरिका के मिशिगन में एक 7 साल के बच्चे की मौत के बाद उसके माता-पिता पर हत्या और टॉर्चर जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। बच्चे का वजन महज कुछ ही महीनों में बढ़कर 116 किलोग्राम हो गया था और उसे इलाज से दूर रखा गया था।

अमेरिका में सात साल के बच्चे की दुखद मौत

अमेरिका के मिशिगन राज्य से एक बेहद चौंकाने वाला और दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ सात साल के एक छोटे बच्चे की असामयिक मौत के बाद उसके अपने माता-पिता कानून के शिकंजे में फंस गए हैं। बच्चे की मौत के बाद अधिकारियों ने उसके माता-पिता पर हत्या, शारीरिक प्रताड़ना और बाल शोषण जैसे संगीन आरोप लगाए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि जब इस बच्चे की मौत हुई, तब उसका वजन करीब 116 किलोग्राम तक पहुंच चुका था। जेनेसी काउंटी के अभियोजक डेविड लेटन ने इस पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रारंभिक जांच से यह स्पष्ट होता है कि माता-पिता ने बच्चे की खुराक और खान-पान में बेहद खतरनाक और गैर-जिम्मेदाराना लापरवाही बरती थी। बच्चे को आवश्यक पोषण देने के बजाय उसे केवल जंक फूड पर निर्भर रखा गया, जिसके परिणाम बेहद घातक साबित हुए।

फरवरी 2024 में शुरू हुआ था स्वास्थ्य का संकट

इस पूरे मामले की जड़ें फरवरी 2024 में मिलती हैं, जब सात साल के कैस्पर को आखिरी बार चिकित्सीय जांच के लिए डॉक्टर के पास ले जाया गया था। उस समय उसे खांसी, कफ और मेटाबॉलिक प्रणाली से जुड़ी कुछ स्वास्थ्य समस्याओं की शिकायत थी। उस वक्त मेडिकल रिपोर्ट में बच्चे का वजन 47 किलोग्राम दर्ज किया गया था। डॉक्टरों ने बच्चे की मां को स्पष्ट सलाह दी थी कि वे बच्चे के खान-पान पर ध्यान दें और उसे नियमित रूप से एक्सरसाइज करवाएं। इसके अतिरिक्त, डॉक्टरों ने उन्हें एंडोक्रिनोलॉजिस्ट यानी हार्मोन विशेषज्ञ को दिखाने का सख्त निर्देश दिया था। हालांकि, माता-पिता ने चिकित्सा जगत की इस महत्वपूर्ण सलाह को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया और बच्चे को किसी विशेषज्ञ डॉक्टर के पास नहीं ले गए।

नवंबर में अचानक थम गईं सांसें

कैस्पर के साथ यह त्रासदी पिछले साल नवंबर में घटी। फ्लिंट स्थित घर पर अचानक कैस्पर की सांसें रुक गईं। घबराए हुए परिवार ने आपातकालीन चिकित्सा सेवा को सूचना दी, लेकिन चिकित्सा टीम जब तक उनके घर पहुंची, तब तक सात साल के मासूम कैस्पर की जान जा चुकी थी। मौत के समय उसकी लंबाई मात्र 4 फीट 2.5 इंच थी, जबकि वजन का आंकड़ा 116 किलोग्राम तक पहुंच गया था। यह स्थिति एक सात साल के बच्चे के लिए बेहद असामान्य और जानलेवा थी।

मेडिकल जांच में चौंकाने वाले खुलासे

पोस्टमॉर्टम और मेडिकल जांच में बच्चे की मौत का आधिकारिक कारण डाइलेटेड कार्डियोमायोपैथी बताया गया है। यह एक ऐसी गंभीर बीमारी है जिसमें हृदय का आकार असामान्य रूप से बढ़ जाता है और उसकी कार्यक्षमता बेहद कमजोर हो जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चे का अत्यधिक बढ़ा हुआ वजन ही इस बीमारी और मौत की मुख्य वजह बना। जांच में यह भी पता चला कि कैस्पर अपनी लाचारी के चलते बोल पाने में भी असमर्थ था और ज्यादातर समय बिस्तर पर ही पड़ा रहता था। उसके शरीर पर लंबे समय तक बिस्तर पर पड़े रहने के कारण गहरे घाव और चकत्ते बन गए थे।

माता-पिता की लापरवाही और घर के हालात

अधिकारियों की जांच में पता चला कि माता-पिता के पास साधन होने के बावजूद उन्होंने बच्चे को किसी भी प्रकार का उपचार मुहैया नहीं कराया। सबसे गंभीर बात यह है कि सात साल की उम्र होने के बावजूद बच्चे का किसी स्कूल में दाखिला भी नहीं कराया गया था। घर के अंदर की स्थिति इतनी दयनीय थी कि वहां कचरे के बड़े-बड़े ढेर लगे हुए थे। बच्चे को संतुलित आहार के नाम पर केवल चिप्स और कुरकुरे जैसे हानिकारक स्नैक फूड ही दिए जा रहे थे।

कानूनी कार्रवाई और आरोपियों की गिरफ्तारी

जांच रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने कैस्पर के माता-पिता, डेमियन ओ’ब्रायन और जेसिका ओ’ब्रायन को तुरंत गिरफ्तार कर लिया। उन पर सेकेंड-डिग्री मर्डर, शारीरिक टॉर्चर और बाल शोषण के तहत तीन गंभीर आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं। पिछले हफ्ते इन दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां न्यायाधीश ने उन्हें बिना किसी जमानत के जेनेसी काउंटी जेल भेजने का आदेश दिया। मामले की अगली सुनवाई गुरुवार को निर्धारित की गई है। इस बीच, सामाजिक सुरक्षा विभाग ने इस जोड़े की पांच साल की बेटी को सुरक्षित निकालकर फोस्टर केयर में स्थानांतरित कर दिया है।

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