बरगी बांध का बदला हुआ स्वरूप
मध्य प्रदेश का जबलपुर शहर इन दिनों एक बेहद अनोखी घटना को लेकर चर्चा में है। आमतौर पर अपने 21 विशाल गेटों, विशाल जलभंडार और पर्यटकों की चहल-पहल के लिए पहचाने जाने वाले बरगी बांध का नजारा इस समय पूरी तरह बदला हुआ है। मानसून के आगमन से पहले बांध के पानी का स्तर काफी नीचे चला गया है, जिसके चलते दशकों से पानी की गहराई में दबी एक रहस्यमयी मोटर बोट अब सतह पर दिखाई दे रही है। पहली बार बरगी बांध को इस सूखे रूप में देखकर स्थानीय लोग और दूर-दराज से आए पर्यटक काफी हैरान और उत्साहित हैं।
क्या है इस पुरानी नाव का रहस्य
सोशल मीडिया पर इस पुरानी लोहे की नाव की तस्वीरें और वीडियो खूब वायरल हो रहे हैं। इस नाव को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग बांध पहुंच रहे हैं। बांध के जलस्तर से करीब 55 फीट नीचे दबी यह नाव लोहे से बनी हुई है और इस पर साफ तौर पर ‘सुमा रैप्स प्रोजेक्ट जबलपुर’ लिखा हुआ देखा जा सकता है। यह नाव बांध की गहराइयों में कैसे और कब पहुंची, इसे लेकर लोगों में भारी उत्सुकता बनी हुई है।
इतिहास की जुबानी नाव का सच
इतिहासकार आनंद राणा ने इस नाव से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। उनके अनुसार, यह बोट 1986 के दौर की है। जिस समय बरगी बांध का निर्माण कार्य चल रहा था, तब उस क्षेत्र में रहने वाले लोगों को दूसरी जगहों पर विस्थापित करने की प्रक्रिया जारी थी। उस दौरान पुनर्वास विभाग की ओर से होमगार्ड का एक विशेष प्रोजेक्ट संचालित किया जा रहा था। इस काम में ऐसी दर्जनों नावों का इस्तेमाल किया जाता था। बताया जाता है कि उसी समय यह नाव हादसे का शिकार होकर डूब गई थी, हालांकि राहत की बात यह थी कि उस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई थी। दशकों बाद अब जब पानी का स्तर काफी नीचे गिरा है, तो यह नाव पानी की परतों से बाहर निकल आई है।
स्थानीय लोगों और पर्यटकों में कौतूहल
नाव को देखने पहुंचे स्थानीय निवासी राहुल और अन्य लोगों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में बरगी बांध का ऐसा नजारा पहली बार देखा है। नाव की जर्जर हालत देखकर साफ पता चलता है कि यह कितनी पुरानी है। पानी के अंदर लंबे समय तक रहने के कारण इसमें चारों तरफ भारी जंग लग चुका है। नाव के भीतर बने केबिन आज भी बरकरार हैं, जो बीते दौर की गवाही देते हुए अतीत की यादें ताजा कर रहे हैं। बांध का यह अद्भुत और रहस्यमयी दृश्य न केवल इतिहास के पन्नों को कुरेद रहा है, बल्कि आम लोगों के लिए कौतूहल का बड़ा विषय भी बना हुआ है।
पर्यावरण और जलसंकट की आहट
एक तरफ जहां लोग इस ऐतिहासिक नाव के साथ सेल्फी ले रहे हैं और तस्वीरें खिंचवा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पानी के स्तर में आई भारी कमी गंभीर चिंता का विषय भी है। बांध के अंदर कुंडों, डूबी हुई नाव और पानी के भीतर दबे पेड़ों के अवशेषों को देखकर लोग दंग हैं। जलस्तर की यह स्थिति पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन के खतरों की ओर इशारा कर रही है। अब हर कोई बेसब्री से मानसून के आने का इंतजार कर रहा है। यदि हालात ऐसे ही बने रहे, तो आने वाले दिनों में किसानों को सिंचाई के लिए पानी की भारी किल्लत का सामना करना पड़ सकता है, साथ ही जबलपुर शहर की जलापूर्ति पर भी इसका सीधा असर पड़ सकता है।
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