उत्तर प्रदेश: अब ग्राम सचिवालयों में बैठेंगे लेखपाल, ग्रामीणों को तहसील के चक्कर से मिलेगी मुक्ति

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रामीण सुशासन की दिशा में बड़ा कदम उठाया है, जिसके तहत अब लेखपालों की नियमित उपस्थिति ग्राम सचिवालयों में सुनिश्चित की जाएगी।

उत्तर प्रदेश में सुशासन की नई पहल

उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रामीण अंचलों में निवासरत नागरिकों को राजस्व सेवाओं का लाभ उनके घर के पास ही उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एक बड़ा निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की स्पष्ट मंशा है कि गांव के लोगों को अपने छोटे-मोटे कार्यों के लिए बार-बार तहसील के दफ्तरों में भटकना न पड़े। इस दिशा में प्रभावी कार्रवाई करते हुए अब ग्राम सचिवालयों में लेखपालों की नियमित उपस्थिति अनिवार्य कर दी गई है। राज्य के राजस्व परिषद ने इस संबंध में सभी जिलाधिकारियों को औपचारिक निर्देश जारी कर दिए हैं।

बुधवार से प्रभावी होगी नई व्यवस्था

राजस्व परिषद द्वारा जारी आदेशों के मुताबिक, लेखपालों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष रोस्टर तैयार किया जाएगा। यह नई व्यवस्था आगामी 1 जुलाई, 2026 से पूरे प्रदेश में पूरी तरह से प्रभावी हो जाएगी। सरकार का मानना है कि इस कदम से ग्राम सचिवालय सही मायनों में 'वन स्टॉप सर्विस सेंटर' की तरह कार्य करने लगेंगे। इससे न केवल प्रशासनिक काम-काज में गति आएगी, बल्कि आम ग्रामीण जनता को अपने प्रमाणपत्रों और राजस्व संबंधी अन्य कार्यों के लिए घंटों लाइन में लगने या बार-बार तहसील के चक्कर काटने की मजबूरी से भी राहत मिलेगी।

क्यों जरूरी है यह बदलाव?

राजस्व परिषद की आयुक्त एवं सचिव कंचन वर्मा ने स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री का मुख्य जोर प्रदेश में पारदर्शिता लाने और जनसेवाओं को अंतिम छोर तक पहुंचाने पर है। वर्तमान में ग्राम पंचायतों में ग्राम सचिवालयों की स्थापना पहले ही की जा चुकी है, जहां पंचायती राज विभाग के अन्य कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं। अब इसी ढांचे को और अधिक सुदृढ़ करते हुए लेखपालों को भी वहां अनिवार्य रूप से बैठने के निर्देश दिए गए हैं। आय, जाति, निवास और खतौनी जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों के त्वरित निस्तारण में लेखपाल की भूमिका निर्णायक होती है। उनके ग्राम सचिवालय में उपलब्ध रहने से समयबद्ध तरीके से इन सेवाओं का लाभ मिलना संभव हो सकेगा।

लेखपालों के व्यापक दायित्व

राजस्व परिषद ने अपने पत्र में यह रेखांकित किया है कि लेखपाल का कार्य केवल प्रमाण पत्र जारी करने तक सीमित नहीं है। वे प्रशासनिक व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण और मजबूत कड़ी हैं। लेखपालों के कंधों पर कई अन्य महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां होती हैं, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • तहसील दिवस और थाना दिवस का संचालन।
  • वरासत दर्ज करने और स्वामित्व योजना का क्रियान्वयन।
  • किसान सम्मान निधि का सत्यापन और राहत एवं पुनर्वास के कार्य।
  • प्राकृतिक आपदाओं के दौरान नुकसान का आकलन और आपदा प्रबंधन।
  • भूमि विवादों का निपटारा और अवैध कब्जों की जांच करना।
  • कृषि गणना, जनगणना और फसल गिरदावरी का कार्य।
  • सार्वजनिक वितरण प्रणाली और सरकारी क्रय केंद्रों का सत्यापन।

इन तमाम कार्यों के साथ-साथ विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान करने और उनकी रिपोर्ट तैयार करने में भी लेखपाल की भूमिका अपरिहार्य होती है।

तहसील जाने की मजबूरी होगी खत्म

अब तक की व्यवस्था में ग्राम पंचायत स्तर पर लेखपालों के बैठने के लिए कोई ठोस और निर्धारित जगह नहीं थी। इस कारण अक्सर ग्रामीणों को लेखपाल से मिलने के लिए तहसील या अन्य स्थानों पर जाना पड़ता था, जिसमें उनका काफी समय और पैसा दोनों ही बर्बाद होते थे। आम जनता को हो रही इसी असुविधा को देखते हुए योगी सरकार ने अब हर जनपद में रोस्टर बनाकर लेखपालों को ग्राम सचिवालयों में बैठने का आदेश दिया है।

अधिक जवाबदेह बनेगी व्यवस्था

सरकार का मानना है कि इस बदलाव से राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली में आमूलचूल परिवर्तन आएगा। जब लेखपाल सीधे ग्रामीणों के बीच ग्राम सचिवालय में उपलब्ध रहेंगे, तो न केवल उनकी जवाबदेही बढ़ेगी, बल्कि कार्यों में पारदर्शिता भी आएगी। जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में इसके लिए समुचित व्यवस्था करें और यह सुनिश्चित करें कि रोस्टर का पालन सख्ती से हो। इस पहल के माध्यम से योगी सरकार ग्राम सचिवालयों को ग्रामीण विकास और सेवा वितरण का एक प्रभावी केंद्र बनाने की ओर अग्रसर है, जिससे आम आदमी को शासन की योजनाओं का लाभ लेने में कोई बाधा उत्पन्न न हो।

https://hindi.news18.com/news/uttar-pradesh/lucknow-lekhpals-sit-at-gram-sachivalaya-starting-july-1-local18-10616826.html