हिंसा के माहौल में पुलिस कैसे रखे अपना मन शांत, मुनिश्री सुधासागर महाराज ने एसपी को दिया यह खास मंत्र

गुना में एक पुलिस सम्मान समारोह के दौरान एसपी हितिका वासल ने मुनिश्री सुधासागर महाराज से तनाव कम करने के उपाय पूछे। महाराज ने पुलिस और सेना की भूमिका को देश के रक्षक के रूप में परिभाषित करते हुए उन्हें योद्धा बताया।

पुलिस सम्मान समारोह में आध्यात्मिक चर्चा

मध्य प्रदेश के गुना स्थित सुभाष कॉलोनी के जैन मंदिर में हाल ही में एक विशेष आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम पुलिस बल के सम्मान में रखा गया था, जहां समाज के लोगों ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस अधिकारियों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर मुनिश्री सुधासागर महाराज का आशीर्वाद लेने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी पहुंचे। कार्यक्रम के दौरान गुना की एसपी हितिका वासल ने मुनिश्री के समक्ष अपनी जिज्ञासा रखी, जो पुलिस विभाग की कार्यशैली और मानसिक तनाव से जुड़ी थी।

पुलिस की चुनौतीपूर्ण दिनचर्या और तनाव

एसपी हितिका वासल ने मुनिश्री से पूछा कि पुलिसकर्मी हमेशा तनावपूर्ण माहौल में काम करने को मजबूर रहते हैं। उन्होंने बताया कि पुलिस के दिन की शुरुआत ही अक्सर हिंसा, चोरी, हत्या और लूट जैसी नकारात्मक खबरों से होती है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि पुलिसकर्मी इन विषम परिस्थितियों के बीच अपने मन को शांत कैसे रखें और तनावपूर्ण स्थिति को कैसे संभालें। एसपी ने अपनी बात रखते हुए यह भी कहा कि कई बार पुलिस को मजबूरन कठोर कदम उठाने पड़ते हैं, जिससे उनके व्यवहार और मानसिक स्थिति पर भी असर पड़ता है। वे जानना चाहती थीं कि इतनी नकारात्मकता के बीच भी पुलिस अपना व्यवहार संयमित और शांत कैसे बनाए रखे।

वो हत्यारा नहीं, देश का रक्षक है

इन सवालों का जवाब देते हुए मुनिश्री सुधासागर महाराज ने अत्यंत प्रभावशाली तर्क पेश किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि कुछ लोगों के लिए नकारात्मक शक्तियां वास्तव में एक वरदान की तरह काम करती हैं। मुनिश्री ने सेना के जवान का उदाहरण देते हुए कहा कि एक सैनिक चौबीसों घंटे हिंसा की संभावनाओं के बीच रहता है। उसके हाथ में हमेशा हथियार होता है और उसकी उंगली ट्रिगर पर होती है। उसका पूरा ध्यान दुश्मन को खत्म करने पर केंद्रित होता है, लेकिन इसका अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि वह एक हत्यारा है। इसके विपरीत, वह देश की रक्षा करने वाला एक योद्धा है। मुनिश्री के अनुसार, युद्ध की स्थिति में सैनिक का भाव बचाने का नहीं, बल्कि दुश्मन को परास्त करने का होता है, और यही उसकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।

नकारात्मकता ही है पुलिस का वरदान

मुनिश्री सुधासागर महाराज ने आगे विस्तार से समझाते हुए कहा कि पुलिसकर्मी जो नकारात्मक शक्तियों से जूझ रहे हैं, असल में वही नकारात्मक शक्तियां उनके लिए एक वरदान समान हैं। उन्होंने तर्क दिया कि जिस दिन दुनिया से ये नकारात्मक शक्तियां समाप्त हो जाएंगी, उस दिन पुलिस और सेना जैसे सुरक्षा बलों की आवश्यकता ही नहीं रहेगी। जो व्यक्ति नकारात्मक शक्तियों के बीच रहकर भी सकारात्मक ऊर्जा के साथ आगे बढ़ता है, वही असली योद्धा और वीर कहलाता है। मुनिश्री ने पुलिसकर्मियों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि विपरीत ताकतों से लड़ने और उन्हें नियंत्रित करने की जो शक्ति उनके भीतर है, वह कोई सामान्य बात नहीं है, बल्कि यह एक बहुत बड़ी और विशिष्ट शक्ति है जिसे उन्हें हमेशा महसूस करना चाहिए।

https://hindi.news18.com/news/madhya-pradesh/guna-munishri-sudhasagar-maharaj-answered-the-questions-posed-by-sp-hitika-vasal-local18-10616801.html