बिहार की धरती पर संजीवनी की दस्तक
बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले में खेती के क्षेत्र में एक अनूठा प्रयोग देखने को मिल रहा है। यहां के किसान विजय गिरी ने एक ऐसी विशेष किस्म के धान की खेती शुरू की है, जिसे औषधीय गुणों और कैंसर रोधी तत्वों का खजाना माना जा रहा है। विजय गिरी का दावा है कि उत्तर भारत में यह पहला ऐसा मौका है जब इस दुर्लभ धान की खेती बिहार में की जा रही है। उन्होंने इस किस्म के बीजों को विशेष तौर पर छत्तीसगढ़ से मंगवाया है। यह धान न केवल अपने पोषण के लिए जानी जाती है, बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी इसे अत्यंत गुणकारी बताया गया है। यदि इस बार की फसल सफल रहती है, तो आने वाले समय में राज्य के अन्य किसानों के लिए भी यह बीज उपलब्ध कराए जाएंगे ताकि वे भी पारंपरिक खेती से इतर सेहतमंद फसलों की ओर बढ़ सकें।
इस किस्म का वैज्ञानिक इतिहास
इस अनूठी धान की किस्म का नाम 'संजीवनी' रखा गया है। इसे तैयार करने में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर और भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र, मुंबई का संयुक्त योगदान रहा है। इन दोनों संस्थानों के वैज्ञानिकों ने मिलकर छत्तीसगढ़ की पारंपरिक औषधीय धान की किस्मों का गहन अध्ययन किया और उनके चयन के बाद इस उन्नत किस्म को विकसित किया। इसका सबसे पहला सफल परीक्षण छत्तीसगढ़ में किया गया था, जिसके सकारात्मक नतीजों को देखते हुए अब इसे बिहार की जलवायु में भी आजमाया जा रहा है।
वर्ष 2025 में हुआ था पहला प्रयास
संजीवनी धान की खेती का विचार कोई नया नहीं है। विजय गिरी, जो कि रामनगर प्रखंड के हरपुर गांव के निवासी हैं, उन्होंने वर्ष 2025 में भी इसकी खेती का प्रयास किया था। हालांकि, उस समय मौसम ने साथ नहीं दिया। अत्यधिक बारिश और खेतों में जलजमाव की समस्या के कारण फसल को काफी नुकसान उठाना पड़ा था। उस समय कृषि वैज्ञानिकों ने मिट्टी और जलवायु का निरीक्षण करने के बाद इसे धान की इस किस्म के लिए उपयुक्त बताया था, लेकिन प्राकृतिक आपदाओं के कारण फसल पूरी तरह विकसित नहीं हो पाई थी।
खेती की शुरुआत और उत्पादन का लक्ष्य
इस वर्ष विजय गिरी ने फिर से हिम्मत नहीं हारी और नए सिरे से खेती की शुरुआत की है। उन्होंने 28 जून को संजीवनी धान की रोपाई की प्रक्रिया पूरी की। फिलहाल उन्होंने 100 ग्राम बीज का उपयोग करके करीब 10 धुर जमीन पर इस फसल को लगाया है। किसान को पूरी उम्मीद है कि इस बार फसल का परिणाम बेहतर होगा और उन्हें लगभग दो क्विंटल धान का उत्पादन प्राप्त हो सकता है, जो आने वाले समय में बीज विस्तार के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी।
औषधीय गुणों का भंडार
नरकटियागंज स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. आशुतोष कुमार ने इस धान की खूबियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसमें लगभग 350 फाइटोकेमिकल्स मौजूद होते हैं। ये तत्व मानव शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसे डायबिटीज, कमजोर इम्युनिटी और कैंसर जैसी जटिल बीमारियों की रोकथाम के लिए भी बहुत उपयोगी माना जा रहा है। वैज्ञानिक इस दिशा में और अधिक शोध कर रहे हैं ताकि इसके स्वास्थ्य संबंधी फायदों को और स्पष्ट रूप से समझा जा सके।
भविष्य की संभावनाएं
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार और छत्तीसगढ़ की जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियों में कोई बड़ा अंतर नहीं है, इसलिए बिहार में भी संजीवनी धान की सफल खेती की प्रबल संभावना है। यदि इस बार पैदावार का आंकड़ा संतोषजनक रहता है, तो कृषि वैज्ञानिक इस किस्म पर और अधिक विस्तृत अनुसंधान करेंगे। इसके बाद, इस धान की अन्य विशेषताओं का बारीकी से अध्ययन किया जाएगा और एक व्यवस्थित योजना के तहत बीज को राज्य के अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिल सके।
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