रावलाकोट में सड़कों पर उतरी जनता
पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK के रावलाकोट में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। आटा, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी के खिलाफ शुरू हुआ जन आंदोलन अब सरकार के लिए एक बड़े राजनीतिक संकट में तब्दील हो चुका है। वहां के लोग अब पाकिस्तानी हुकूमत की नीतियों के खिलाफ खुलकर विरोध कर रहे हैं।
सेना के दमन का विरोध
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उन्हें मुनीर सेना के अत्याचारों और दमनकारी नीतियों का सामना करना पड़ रहा है। इस स्थिति ने स्थानीय लोगों को सरकार के खिलाफ पूरी तरह खड़ा कर दिया है। प्रदर्शनकारियों ने सार्वजनिक रूप से घोषणा कर दी है कि वे अब खुद को पाकिस्तान का हिस्सा नहीं मानते हैं।
हिंसा और इंटरनेट पर प्रतिबंध
जम्मू कश्मीर अवामी एक्शन कमेटी यानी JAAC के नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन को दबाने के लिए सेना की तरफ से भारी बल प्रयोग किया गया है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, सुरक्षा बलों की गोलीबारी में अब तक 22 लोगों की मौत हो चुकी है। हालात को नियंत्रित करने के दावे के साथ पूरे इलाके में इंटरनेट सेवाओं को पूरी तरह बंद कर दिया गया है।
शहबाज सरकार को आखिरी चेतावनी
इतनी कड़ी कार्रवाई और इंटरनेट पर पाबंदी के बावजूद वहां के निवासियों का हौसला पस्त नहीं हुआ है। विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों ने शहबाज शरीफ सरकार को एक आखिरी अल्टीमेटम दिया है। उनका कहना है कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो वे भविष्य के लिए अपने रास्ते खुद तलाशने को मजबूर होंगे, क्योंकि वे अब पाकिस्तान के साथ नहीं रहना चाहते।
https://hindi.news18.com/world/pakistan-we-are-not-part-of-pakistan-pok-protesters-issue-ultimate-warning-to-islamabad-as-revolt-intensifies-10616525.html