आजादी के आंदोलन में सुल्तानपुर का महत्वपूर्ण योगदान
भारत में करीब 250 वर्षों तक चले ब्रिटिश शासन की बेड़ियों को काटने के लिए देश के कोने कोने से वीर सपूतों ने बलिदान दिया। इस लंबी लड़ाई में उत्तर प्रदेश का सुल्तानपुर जिला भी पीछे नहीं रहा। यहां के क्रांतिकारियों ने न केवल ब्रिटिश सत्ता को चुनौती दी, बल्कि आजादी की अलख जगाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
भगत सिंह के साथी गया प्रसाद और अमहट जेल
क्रांतिकारी इतिहास में गया प्रसाद का नाम अत्यंत सम्मान के साथ लिया जाता है। वह महान क्रांतिकारी भगत सिंह के करीबी साथियों में से थे और चर्चित लाहौर बम केस के मुख्य अभियुक्तों में शामिल थे। उस दौर में जब उन्हें गंभीर बीमारी यानी टीबी ने घेर लिया, तो उन्हें सुल्तानपुर स्थित अमहट जेल में स्थानांतरित कर दिया गया। इसी जेल में रहने के दौरान सुल्तानपुर की फिजाओं में आजादी की मांग और अधिक तेज हो गई थी।
कांग्रेस का स्थानीय प्रभाव
उस समय सुल्तानपुर में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के निर्देशों का पालन बहुत सख्ती से किया जाता था। स्थानीय कांग्रेसी कार्यकर्ताओं में जोश इतना था कि वे केंद्रीय नेतृत्व के हर आदेश को अक्षरशः जमीन पर उतारने का प्रयास करते थे। इस अनुशासित संघर्ष का असर सुल्तानपुर के जनमानस पर गहरा पड़ा और स्थानीय स्तर पर ब्रिटिश सरकार के खिलाफ बड़े बदलाव देखने को मिले। गया प्रसाद और उनके साथियों का प्रभाव स्थानीय स्वतंत्रता संग्राम को एक नई धार देने वाला साबित हुआ।
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