पलामू में फैली अज्ञात बीमारी की दहशत
झारखंड के पलामू जिले से एक बेहद भयावह और चिंताजनक घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके में डर का माहौल पैदा कर दिया है। पंडवा थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाले सिक्का गांव में एक ही परिवार के पांच लोगों की रहस्यमयी बीमारी की चपेट में आने से जान चली गई है। इस घटना ने न केवल स्थानीय लोगों को हिलाकर रख दिया है, बल्कि चिकित्सा व्यवस्था की सक्रियता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। फिलहाल, परिवार के तीन अन्य सदस्य रांची के रिम्स अस्पताल में भर्ती हैं, जहां उनका उपचार चल रहा है, लेकिन अभी तक इस बीमारी का कोई स्पष्ट कारण पता नहीं चल सका है।
बीमारी का घातक प्रभाव
पीड़ित परिवार पर दुखों का पहाड़ करीब दो सप्ताह पहले टूटा था, जब सदस्यों की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। शुरुआत में शरीर पर दाग जैसे लक्षण उभरे और स्थिति गंभीर होती चली गई। इस रहस्यमयी बीमारी ने देखते ही देखते परिवार के पांच सदस्यों को मौत की नींद सुला दिया। मृतकों में कुलदीप मेहता, उनकी दो बेटियां, एक बेटा और बहू शामिल हैं। इन पांचों में से दो लोगों ने इलाज के दौरान रांची के रिम्स अस्पताल में दम तोड़ा था। परिवार के सदस्यों की लगातार हो रही मौत से पूरे सिक्का गांव में मातम और दहशत का साया है।
प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की सुस्ती
पीड़ित परिवार के सदस्य अनुज मेहता ने इस त्रासदी के बारे में बताते हुए कहा कि उन्होंने अपने हाथों से अपने परिवार के पांच सदस्यों का अंतिम संस्कार किया है। उनके अनुसार, इस कठिन समय में उन्हें सरकारी तंत्र या प्रशासन से किसी भी प्रकार की सहायता प्राप्त नहीं हुई है। ग्रामीण भी इस बात से बेहद नाराज हैं कि इतनी बड़ी घटना के बाद भी स्वास्थ्य विभाग की कोई भी मेडिकल टीम अब तक गांव नहीं पहुंची है। न तो बीमारी की उत्पत्ति जानने के लिए जांच की गई है और न ही गांव के अन्य लोगों के स्वास्थ्य का परीक्षण किया गया है। लोगों का मानना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते कदम उठाए होते, तो शायद इतनी मौतें न होतीं।
झाड़-फूंक का सहारा और लाचारी
ग्रामीणों के अनुसार, बीमारी के शुरुआत में जब लक्षणों को समझा नहीं जा सका, तो परिवार ने डॉक्टरों के इलाज के साथ-साथ पारंपरिक तरीके से झाड़-फूंक का भी सहारा लिया था। हालांकि, इन प्रयासों का कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला और हालत बिगड़ती गई। कुलदीप मेहता की पत्नी समेत परिवार के तीन सदस्य अभी भी जीवन और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं और उनका इलाज रिम्स में जारी है। इस पूरी घटना में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों के बीच भारतीय जनता पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की है और उन्हें हर संभव मदद का भरोसा दिया है।
ग्रामीणों की मुख्य मांगें
अब पूरे इलाके में यही सवाल गूंज रहा है कि आखिर वह कौन सी बीमारी है जिसने एक पूरे परिवार को खत्म कर दिया। ग्रामीण अब प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि अविलंब मेडिकल कैंप लगाकर बीमारी की सटीक पहचान की जाए और प्रभावित क्षेत्र में एहतियाती कदम उठाए जाएं। साथ ही, पीड़ित परिवार को उचित आर्थिक मुआवजा देने की भी मांग उठाई जा रही है ताकि वे इस संकट की घड़ी से उबर सकें। सरकारी अधिकारियों की ओर से इस मामले में अब तक ठोस कदम न उठाए जाने से आम जनता का आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
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