भारत का सबसे ऊंचा एयरपोर्ट: लेह में स्थित इस हवाई अड्डे की ऊंचाई और चुनौतियां जानकर हैरान रह जाएंगे आप

भारत में मौजूद हवाई अड्डों में से एक ऐसा है जो समुद्र तल से अत्यधिक ऊंचाई पर स्थित है। लद्दाख का कुशोक बकुला रिम्पोचे हवाई अड्डा अपनी अद्भुत भौगोलिक स्थिति और चुनौतीपूर्ण लैंडिंग के लिए प्रसिद्ध है।

भारत की भौगोलिक विविधता और हवाई यात्रा

भारत एक ऐसा देश है जो अपनी विविधताओं के लिए पूरी दुनिया में पहचान रखता है। यहां के भूगोल में आपको एक तरफ जहां समुद्र के किनारे बसे शहर मिलेंगे, तो वहीं दूसरी ओर बर्फ से ढकी विशाल हिमालयी चोटियां भी देखने को मिलेंगी। पहाड़ों के दुर्गम रास्तों और वादियों के बीच एक ऐसा कमर्शियल एयरपोर्ट है, जिसे भारत का सबसे ऊंचा हवाई अड्डा माना जाता है। यह स्थान न केवल पर्यटकों के लिए रोमांच का केंद्र है, बल्कि यहां विमानों का संचालन करना पायलटों के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं होता है।

कुशोक बकुला रिम्पोचे एयरपोर्ट का परिचय

भारत के सबसे ऊंचे कमर्शियल एयरपोर्ट का खिताब लद्दाख के लेह में स्थित कुशोक बकुला रिम्पोचे हवाई अड्डा के नाम है। यह हवाई अड्डा समुद्र तल से लगभग 3,256 मीटर यानी कि 10,682 फ़ीट की ऊंचाई पर बना हुआ है। अपनी इतनी अधिक ऊंचाई और चुनौतीपूर्ण वातावरण के कारण इसे न केवल भारत, बल्कि दुनिया के सबसे कठिन हवाई अड्डों में से एक गिना जाता है।

यह हवाई अड्डा क्यों है खास

लेह में स्थित यह हवाई अड्डा चारों तरफ से हिमालय की ऊंची और दुर्गम चोटियों से घिरा हुआ है। ऊंचाई पर हवा का घनत्व काफी कम हो जाता है, जिसका सीधा असर विमान के प्रदर्शन पर पड़ता है। कम घनत्व वाली हवा के कारण उड़ान भरने (टेक-ऑफ) और जमीन पर उतरने (लैंडिंग) के समय विमानों को अतिरिक्त सावधानी की जरूरत होती है। इसी तकनीकी कठिनाई को ध्यान में रखते हुए, इस हवाई अड्डे पर केवल अत्यधिक प्रशिक्षित और अनुभवी पायलटों को ही विमान संचालित करने की अनुमति दी जाती है।

देश की सुरक्षा में रणनीतिक महत्व

कुशोक बकुला रिम्पोचे हवाई अड्डे का इस्तेमाल सिर्फ नागरिक उड्डयन या कमर्शियल फ्लाइट्स के लिए ही नहीं होता है। यह भारतीय वायु सेना के लिए भी एक अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र है। अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण, यह हवाई अड्डा देश की सुरक्षा और सीमाओं पर नजर रखने के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है। यहाँ से सेना की गतिविधियों का संचालन और लॉजिस्टिक्स का काम बड़े स्तर पर होता है।

पर्यटकों के लिए मुख्य द्वार

लद्दाख घूमने के शौकीन हजारों पर्यटक हर साल इसी हवाई अड्डे का रुख करते हैं। यह नुब्रा वैली, पैंगोंग झील, मैग्नेटिक हिल और खारदुंग ला जैसे विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों तक पहुंचने का मुख्य प्रवेश द्वार है। विशेषकर गर्मियों के दौरान यहां सैलानियों की भारी भीड़ देखी जाती है, जो हिमालय की गोद में समय बिताना चाहते हैं।

यात्रा के दौरान रखें इन बातों का ध्यान

अगर आप भी लेह की यात्रा करने की योजना बना रहे हैं, तो ऊंचाई पर स्थित होने के कारण आपको अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखना चाहिए:

  • लेह पहुंचने के बाद कम से कम पहले 24 घंटे शरीर को पूरी तरह आराम दें, ताकि आप वहां की ऊंचाई और वातावरण के अनुकूल ढल सकें।
  • अपने शरीर में पानी की कमी न होने दें और खूब पानी पिएं।
  • पहुंचने के तुरंत बाद कोई भी भारी शारीरिक श्रम या कसरत न करें।
  • ऊंचाई से जुड़ी किसी भी दवा का सेवन करने से पहले डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।
  • लेह का मौसम पल भर में बदल सकता है, इसलिए अपने साथ हमेशा गर्म कपड़े जरूर रखें।

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