बाजार में लगातार दूसरे दिन सुस्ती
भारतीय शेयर बाजार में लगातार दूसरे कारोबारी दिन निवेशकों को मायूसी हाथ लगी है। मंगलवार का दिन काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा और अंत में मुख्य सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। बीएसई का सेंसेक्स 249.70 अंक गिरकर 76,478.67 के स्तर पर आ गया। वहीं, एनएसई का निफ्टी भी पीछे नहीं रहा और 80.50 अंक टूटकर 23,865.75 पर बंद हुआ। बाजार में सबसे अधिक बिकवाली का दबाव आईटी और ऑटो क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों पर देखा गया।
आईटी सेक्टर की चमक फीकी
आईटी शेयरों में आई भारी बिकवाली के कारण निफ्टी आईटी इंडेक्स मंगलवार को करीब 2.5% तक फिसल गया। बाजार के आंकड़ों पर गौर करें तो LTM, इन्फोसिस, टीसीएस, विप्रो, एचसीएल टेक और टेक महिंद्रा जैसी बड़ी कंपनियों के शेयरों में 1% से लेकर 4% तक की गिरावट दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बिकवाली के पीछे अमेरिका में बढ़ती महंगाई और वहां ब्याज दरें बढ़ने की आशंका एक प्रमुख कारण है। यदि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में बढ़ोतरी करता है, तो इसका सीधा नकारात्मक असर आईटी कंपनियों के मुनाफे और भविष्य के कारोबार पर पड़ना तय है।
ऑटो और विदेशी निवेशकों का प्रभाव
दिल्ली सरकार द्वारा हाल ही में लाई गई नई ईवी पॉलिसी का असर भी ऑटो सेक्टर पर दिखा है। इस नीति के तहत भविष्य में पेट्रोल और सीएनजी आधारित दोपहिया व तीनपहिया वाहनों की जगह इलेक्ट्रिक वाहनों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिसके चलते निवेशकों ने ऑटो शेयरों में मुनाफावसूली की। हालांकि, इस माहौल में भी मारुति सुजुकी और टाटा मोटर्स जैसे शेयरों में बढ़त देखी गई। इसके अलावा, विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की ओर से की गई 1,350 करोड़ रुपये की भारी बिकवाली ने भी बाजार के मूड को बिगाड़ने का काम किया।
बाजार में उम्मीद की किरण
गिरावट के इस माहौल के बावजूद कुछ शेयरों ने निवेशकों को राहत देने का काम किया। मारुति सुजुकी, टाइटन, अडानी एंटरप्राइजेज, बजाज फाइनेंस और टाटा मोटर्स के शेयरों में तेजी रही। इसके अलावा, कंज्यूमर ड्यूरेबल और रियल्टी इंडेक्स में भी 1% से ज्यादा का उछाल दर्ज किया गया। मिडकैप इंडेक्स में 0.4% और स्मॉलकैप इंडेक्स में 1% की बढ़त देखी गई, जो दर्शाता है कि व्यापक बाजार में अभी भी दम बना हुआ है।
निवेशकों की अगली चाल क्या होगी?
आने वाले दिनों में बाजार की चाल मुख्य रूप से वैश्विक संकेतों पर निर्भर करेगी। निवेशकों की निगाहें अमेरिका की ब्याज दरों संबंधी अपडेट, विदेशी निवेशकों के निवेश पैटर्न और भारतीय कंपनियों के तिमाही नतीजों पर टिकी रहेंगी। यदि वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बनी रहती है, तो बाजार में उठापटक का दौर जारी रह सकता है। वहीं, घरेलू आर्थिक आंकड़े आने वाले समय में बाजार की दिशा तय करने में अहम कड़ी साबित होंगे।
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