1 जुलाई 2026 का पंचांग
दिनांक 1 जुलाई 2026 को आषाढ़ कृष्ण पक्ष की उदया तिथि प्रतिपदा और दिन बुधवार है। प्रतिपदा तिथि का मान सुबह 7 बजकर 39 मिनट तक रहेगा, जिसके बाद द्वितीया तिथि का आरंभ हो जाएगा। इस दिन इंद्र योग का प्रभाव शाम 4 बजकर 5 मिनट तक बना रहेगा। मान्यता है कि इंद्र योग के दौरान किए गए सरकारी या राजकाज से जुड़े कार्यों में निश्चित रूप से सफलता प्राप्त होती है। नक्षत्रों की गणना के अनुसार, इस दिन उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का प्रभाव पूरा दिन और पूरी रात रहेगा, जो कि अगले दिन यानी गुरुवार की सुबह 9 बजकर 28 मिनट तक प्रभावी रहेगा। यह दिन सिक्ख धर्म के छठवें गुरु, गुरु हरगोबिंद सिंह जी की जयंती के रूप में भी विशेष है।
1 जुलाई 2026 का शुभ समय
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:39 से 05:22 बजे तक।
- विजय मुहूर्त: दोपहर 02:55 से 03:48 बजे तक।
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:19 से 07:41 बजे तक।
- अभिजित मुहूर्त: इस दिन कोई भी अभिजित मुहूर्त उपलब्ध नहीं है।
1 जुलाई 2026 का अशुभ समय
- राहुकाल: दोपहर 12:42 से 02:22 बजे तक।
- गुलिक काल: सुबह 11:03 से दोपहर 12:42 बजे तक।
- दुर्मुहूर्त: दोपहर 12:16 से 01:09 बजे तक।
- वर्ज्य काल: दोपहर 03:43 से शाम 05:29 बजे तक।
- आडल योग: सुबह 06:51 से अगले दिन 2 जुलाई, तड़के 02:49 बजे तक।
- बाण चोर: सुबह 06:16 से पूरी रात तक।
प्रमुख शहरों में राहुकाल
- दिल्ली: दोपहर 12:25 से 02:09 बजे तक।
- मुंबई: दोपहर 12:42 से 02:22 बजे तक।
- चंडीगढ़: दोपहर 12:27 से 02:12 बजे तक।
- लखनऊ: दोपहर 12:10 से 01:54 बजे तक।
- भोपाल: दोपहर 12:24 से 02:05 बजे तक।
- कोलकाता: सुबह 11:40 से दोपहर 01:22 बजे तक।
- अहमदाबाद: दोपहर 12:43 से 02:24 बजे तक।
- चेन्नई: दोपहर 12:13 से 01:49 बजे तक।
सूर्योदय और सूर्यास्त
1 जुलाई 2026 को सूर्योदय का समय सुबह 5:26 बजे रहेगा और सूर्यास्त शाम 7:22 बजे होगा।
उत्तराषाढ़ा नक्षत्र की विशेषताएं
आकाशमंडल में 27 नक्षत्रों की श्रृंखला में उत्तराषाढ़ा 21वां नक्षत्र है और इसे अत्यंत शुभ माना जाता है। इस नक्षत्र का प्रथम चरण धनु राशि में और बाकी तीन चरण मकर राशि में स्थित हैं। उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता विश्वेदेव हैं, जिसमें दस देव- इंद्र, अग्नि, सोम, त्वष्ट्रा, रुद्र, पूखन्, विष्णु, अश्विनी, मित्रावरूण और अंगीरस सम्मिलित हैं। इस नक्षत्र का प्रतीक चिन्ह हाथी का दांत माना गया है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक अत्यंत लक्ष्य-उन्मुख होते हैं और अपने प्रयासों को सिद्ध करने की क्षमता रखते हैं। ये व्यक्ति अपनी परंपराओं का सम्मान करने वाले होते हैं और मर्यादाओं को तोड़ने वालों को पसंद नहीं करते। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस नक्षत्र के दौरान विद्या की शुरुआत, कृषि से जुड़े कार्य, वास्तु शांति और शिल्पकला से संबंधित कार्यों को करना अत्यंत मंगलकारी माना जाता है।
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