कानपुर का जूही खलवा अंडरपास: मानसून में बन जाता है मौत का जाल, अब तक जा चुकी है कई लोगों की जान

मानसून की दस्तक के साथ ही कानपुर के जूही खलवा अंडरपास पर जलभराव का खतरा गहरा गया है। वर्षों से यहां की बदहाल जल निकासी व्यवस्था ने इसे शहर का सबसे खतरनाक 'डेथ प्वाइंट' बना दिया है, जहां अब तक पांच लोगों की जान जा चुकी है।

मानसून के साथ बढ़ती मुसीबत

कानपुर में हर साल मानसून का आगमन लोगों के लिए राहत के साथ-साथ बड़ी चिंता लेकर आता है। शहर का जूही खलवा अंडरपास मानसून के दौरान एक ऐसे डरावने स्थान में बदल जाता है, जहां से गुजरना जान जोखिम में डालने जैसा है। जैसे ही तेज बारिश होती है, इस अंडरपास में कई फीट गहरा पानी भर जाता है। सड़क का पता चलना मुश्किल हो जाता है, जिससे वाहन चालक अनजाने में ही गहरे पानी के बीच फंस जाते हैं। स्थानीय निवासियों ने तो अब इसे शहर का डेथ प्वाइंट कहना शुरू कर दिया है, क्योंकि यहां की स्थिति हर गुजरते साल के साथ खतरनाक होती जा रही है।

क्यों खतरनाक है यह अंडरपास

जूही खलवा अंडरपास की बनावट ही इसकी सबसे बड़ी समस्या है। यह दोनों तरफ से ढलान पर स्थित है, जिसकी वजह से आसपास का सारा बरसाती पानी बहकर सीधे निचले हिस्से में जमा हो जाता है। बारिश के दौरान यहां पानी का स्तर इतना बढ़ जाता है कि कारों के बोनट तक डूब जाते हैं और दोपहिया वाहन बीच रास्ते में ही बंद हो जाते हैं। नजारा इतना भयावह होता है कि अंडरपास सड़क न लगकर एक गहरा तालाब दिखाई देने लगता है। हाल ही में की गई जांच में भी यहां स्थित संपवेल के पास गंदा पानी भरा पाया गया है, जो जल निकासी की लचर व्यवस्था की पोल खोलता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, अगर जलभराव को रोकने के इंतजाम नहीं बदले गए, तो इस साल भी स्थिति पुरानी जैसी ही भयावह रहेगी।

कई परिवारों के लिए बना दर्दनाक हादसा

यह जगह महज जलभराव के कारण चर्चा में नहीं है, बल्कि इसने कई परिवारों को कभी न मिटने वाला गम दिया है। बीते कुछ वर्षों में यहां कई लोगों की डूबने से मौत हो चुकी है, जो प्रशासन की विफलता को दर्शाती है:

  • सितंबर 2019: एक बुजुर्ग पुरोहित की डूबने से मौत हो गई थी।
  • अगस्त 2020: जलभराव के कारण एक रिक्शा चालक की जान चली गई।
  • सितंबर 2022: एक अज्ञात युवक का शव पानी में मिला था।
  • जून 2023: मानसून की पहली ही बारिश में एक 28 वर्षीय युवक की यहां डूबकर मौत हुई।
  • अगस्त 2024: जूही इलाके के रहने वाले एक 35 वर्षीय युवक की इसी अंडरपास में जान चली गई।

इन घटनाओं ने शहर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं और इसे कानपुर के सबसे खतरनाक स्थानों की सूची में शामिल कर दिया है।

क्या इस बार हालात बदलेंगे

लगातार हो रही मौतों और बढ़ते जनआक्रोश के बाद नगर निगम अब सक्रिय नजर आ रहा है। नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय का कहना है कि इस बार स्थिति अलग होगी। उनके अनुसार, अंडरपास के पास मौजूद संपवेल की मरम्मत कर दी गई है ताकि बारिश का पानी तुरंत बाहर निकाला जा सके। इसके अलावा, यदि जलभराव जैसी कोई भी स्थिति उत्पन्न होती है, तो तुरंत राहत कार्य शुरू करने के लिए विशेष टीमों की तैनाती की गई है। अब सारा दारोमदार मानसून की पहली तेज बारिश पर है। यदि नगर निगम के ये दावे हकीकत में बदलते हैं, तो हजारों लोगों को राहत मिलेगी। लेकिन अगर एक बार फिर पानी ने रास्ता रोका और दुर्घटनाएं हुईं, तो प्रशासन की कार्यप्रणाली पर फिर से सवाल उठना लाजमी है कि आखिर इस जानलेवा अंडरपास का स्थायी समाधान क्यों नहीं निकाला गया।

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