खंडवा की बेटी का कमाल: आकृति अत्रे की कलाकारी अब सूरत की साड़ियों की शान, देश-विदेश में बिखेर रही हैं जलवा

मध्य प्रदेश के खंडवा जिले की निवासी आकृति अत्रे ने अपनी पेंटिंग कला के दम पर साड़ी डिजाइनिंग की दुनिया में बड़ा मुकाम हासिल किया है। उनके बनाए खास डिजाइन अब गुजरात के बड़े टेक्सटाइल ग्रुप द्वारा अपनाए जा रहे हैं और उनकी पहुंच विदेशों तक हो गई है।

खंडवा से सूरत तक का सफल सफर

मध्य प्रदेश के खंडवा जिले की बेटी आकृति अत्रे ने अपनी मेहनत और अद्भुत कलात्मक कौशल के दम पर एक ऐसा मुकाम हासिल कर लिया है, जिससे पूरे निमाड़ क्षेत्र का मान बढ़ गया है। एक छोटे शहर से निकलकर राष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बनाने वाली आकृति आज किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। पिछले 15 वर्षों से कला के विभिन्न क्षेत्रों में निरंतर सक्रिय रहीं आकृति ने अब साड़ी डिजाइनिंग के क्षेत्र में अपनी एक अलग और विशिष्ट छाप छोड़ी है। उनकी प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सूरत के प्रसिद्ध टेक्सटाइल संस्थान प्रगति ग्रुप ने उनके द्वारा तैयार किए गए डिजाइनों को अपने साड़ी कलेक्शन का मुख्य हिस्सा बना लिया है।

गुरु के मार्गदर्शन से मिली सफलता

आकृति अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने गुरु बैजनाथ सराफ, जिन्हें लोग वशिष्ठ सर के नाम से भी जानते हैं, के कुशल मार्गदर्शन को देती हैं। उनके सानिध्य में ही आकृति ने पेंटिंग, रंगोली, मेहंदी, ऑइल पेंटिंग और एक्रेलिक आर्ट जैसी विभिन्न कला विधाओं की बारीकियां सीखीं। गुरुजी से मिले प्रोत्साहन के बाद ही उनमें डिजाइनिंग के प्रति गहरा रुझान पैदा हुआ, जिसे उन्होंने अपने करियर के रूप में आगे बढ़ाने का निर्णय लिया।

आकृति ने बताया कि उनके गुरुजी के सुझाव पर ही उन्होंने अपने बनाए गए कुछ चुनिंदा डिजाइन सूरत के एक बड़े टेक्सटाइल ग्रुप को भेजे थे। इनमें ब्लैक एंड व्हाइट के साथ-साथ एक विशेष कलरफुल डिजाइन भी शामिल था। हैरानी की बात यह है कि उनके द्वारा भेजे गए ये डिजाइन वहां के विशेषज्ञों द्वारा तुरंत चयनित कर लिए गए। इसके बाद इन डिजाइनों को कॉटन साड़ियों पर प्रिंट करवाकर बाजार में उतारा गया, जिसे देशभर में ग्राहकों द्वारा काफी सराहा जा रहा है। अब जल्द ही यह उम्मीद जताई जा रही है कि कई मशहूर हस्तियां भी आकृति के डिजाइन वाली साड़ियों में नजर आ सकती हैं।

छोटे शहर से बड़ी वैश्विक पहचान

अपनी इस अद्भुत यात्रा के बारे में बात करते हुए आकृति कहती हैं कि उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि एक छोटे शहर में बैठकर भेजी गई उनकी एक डिजाइन उन्हें इतनी बड़ी शोहरत दिलाएगी। वह बताती हैं, आज जब मैं देखती हूं कि लोग मेरी डिजाइन की हुई साड़ियां पहन रहे हैं, तो मुझे अपार गर्व की अनुभूति होती है। आकृति के अनुसार, जीवन में पैसा अपनी जगह अहम है, लेकिन जब किसी के काम को बड़े स्तर पर पहचान और सम्मान मिलता है, तो वह खुशी किसी भी आर्थिक लाभ से कहीं अधिक बड़ी होती है।

देश और विदेश में फैला हुनर

आकृति की कला केवल साड़ियों तक सीमित नहीं है। उन्होंने दिल्ली, भोपाल, कोलकाता और बेंगलुरु जैसे महानगरों में आयोजित विभिन्न आर्ट एग्जीबिशन में बढ़-चढ़कर भाग लिया है। उनकी उत्कृष्ट प्रतिभा के लिए उन्हें बेंगलुरु में ऑसम आर्टिस्ट अवार्ड से सम्मानित भी किया जा चुका है। कला के प्रति उनके समर्पण का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने आकाशवाणी पर अपने इंटरव्यू दिए हैं और कई बड़े मंचों पर एंकरिंग भी की है।

उनका काम केवल भारत तक ही सीमित नहीं रहा है, बल्कि उनका सिरामिक आर्ट वर्क अमेरिका तक पहुंच चुका है। वहां पूजा की थालियों, शुभ-लाभ के प्रतीकों और कलश जैसे उत्पादों के लिए उनके डिजाइन किए गए विशेष पैटर्न की भारी मांग है। दिल्ली से लेकर विदेशों तक उनके प्रशंसक मौजूद हैं, जो विशेष ऑर्डर देकर उनसे अपनी पसंद की कलाकृतियां तैयार करवाते हैं।

युवाओं के लिए बनीं प्रेरणा

खंडवा की इस बेटी की कहानी उन तमाम युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है जो छोटे शहरों में रहकर बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं। उन्होंने यह साबित कर दिखाया है कि यदि आपके पास सही मार्गदर्शन, अटूट लगन और कड़ी मेहनत करने की क्षमता है, तो दुनिया की कोई भी मंजिल आपके लिए मुश्किल नहीं है। खंडवा की यह होनहार बेटी अब कला की दुनिया में एक बड़ा नाम बन चुकी है और उन्होंने यह सिद्ध कर दिया है कि कला की कोई सीमा नहीं होती, न ही यह भूगोल या भाषा की बंदिशों को मानती है। अगर आपके अंदर हुनर है, तो पहचान खुद ब खुद अपना रास्ता ढूंढ लेती है।

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