बारिश के मौसम में दिखने वाले 5 सांप जो नहीं होते जहरीले, जानिए कैसे करें इनकी पहचान

मानसून के दौरान सांपों का बिल से बाहर निकलना आम बात है, लेकिन हर सांप जानलेवा नहीं होता। जानकर बताते हैं कि किन 5 गैर-विषैले सांपों से डरने की जरूरत नहीं है और उनके काटने पर क्या सावधानी बरतनी चाहिए।

मानसून और सांपों की सक्रियता

जैसे ही मानसून का आगमन होता है, वातावरण में नमी बढ़ जाती है और सांपों की गतिविधियां भी तेज हो जाती हैं। अपनी बिलों में पानी भरने और सुरक्षित ठिकानों की खोज में ये सरीसृप अपने बिलों से बाहर निकल आते हैं। यही कारण है कि बारिश के दौरान सांपों का सामना इंसानों से अक्सर खेतों, बगीचों और कभी-कभी घरों में भी हो जाता है। लोग अक्सर घबरा जाते हैं क्योंकि उन्हें सांपों की सही जानकारी नहीं होती। डर और घबराहट की वजह से स्थिति कई बार गंभीर हो जाती है। यह समझना बहुत जरूरी है कि हर सांप जहरीला नहीं होता है।

गैर-विषैले सांपों की जानकारी

खरगोन के स्नेक कैचर महादेव पटेल के अनुसार, मध्य प्रदेश में सांपों की अनेक प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से करीब 35 से 36 प्रजातियों में किसी भी तरह का जहर नहीं पाया जाता है। ये सांप इंसानों के लिए सामान्य परिस्थितियों में खतरनाक नहीं होते हैं। हालांकि, यदि कोई इन्हें डराने या पकड़ने का प्रयास करता है, तो ये अपनी आत्मरक्षा के लिए काट सकते हैं। मुख्य रूप से घरों के आसपास, बगीचों और जल स्रोतों के पास दिखने वाले पांच ऐसे सांप हैं जो गैर-विषैले माने जाते हैं।

इन 5 सांपों की पहचान कैसे करें

खरगोन और आसपास के क्षेत्रों में विशेष रूप से ये पांच प्रकार के सांप अधिक देखे जाते हैं:

  • घोड़ा पछाड़: यह सांप काफी लंबा और पतला होता है। इसका रंग आमतौर पर पीला, भूरा या फिर काला हो सकता है। यह सांप बेहद तेज रफ्तार से भागने के लिए जाना जाता है।
  • पानी का डेंडू: जैसा कि नाम से स्पष्ट है, यह तालाबों, नदियों और पानी के अन्य स्रोतों के आसपास मिलता है। इसके शरीर की त्वचा पर चौकोर या चेकदार डिजाइन स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
  • ब्रॉन्जबैक ट्री स्नेक: यह मुख्य रूप से पेड़ों और झाड़ियों में पाया जाने वाला सांप है। इसकी पहचान इसके शरीर पर मौजूद कांस्य (ब्रॉन्ज) रंग की चमकदार पट्टी से की जा सकती है।
  • वूल्फ स्नेक: इसका रंग गहरा भूरा या काला होता है। इसके शरीर पर सफेद या हल्के रंग की धारियां बनी होती हैं। लोग अक्सर इसे गलती से करैत समझ लेते हैं, जबकि यह जहरीला नहीं होता।
  • ग्रीन किलबैक: यह हरे रंग का एक पतला सांप है जो अक्सर झाड़ियों या पेड़ों की टहनियों पर देखा जाता है।

सांप के काटने पर कैसे करें पहचान

विशेषज्ञों के अनुसार, सांप काटने के बाद कई बार पीड़ित यह नहीं देख पाता कि सांप कौन सा था। ऐसे में घबराने की बजाय स्थिति को समझना जरूरी है। गैर-विषैले सांप के काटने पर अक्सर त्वचा पर दो से अधिक दांतों के निशान (दांतेदार घाव) दिखाई देते हैं। इसके विपरीत, जहरीले सांप के काटने पर त्वचा पर दो गहरे फेंग मार्क (दांतों के छेद) नजर आते हैं। हालांकि, केवल निशानों को देखकर ही कोई निर्णय लेना जोखिम भरा हो सकता है। इसलिए बिना किसी देरी के हमेशा चिकित्सक से परामर्श लेना ही सबसे उचित कदम है।

सांप काटने पर अपनाएं ये सावधानियां

यदि किसी व्यक्ति को सांप काट ले, तो सबसे पहली प्राथमिकता उसे शांत रखने की होनी चाहिए। किसी भी प्रकार की घबराहट या भागदौड़ से शरीर में रक्त संचार तेज हो जाता है, जिससे जहर शरीर में जल्दी फैल सकता है। पीड़ित को शांत रखें, घबराने न दें और प्रभावित अंग को कम से कम हिलाने-डुलाने दें। काटे गए स्थान को साबुन और साफ पानी से धोना अच्छा रहता है। इसके बाद बिना समय बर्बाद किए पीड़ित को तुरंत किसी निकटतम अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र में ले जाना चाहिए।

इन गलतियों से बचें

अक्सर लोग सांप काटने के बाद घरेलू नुस्खों, टोने-टोटके या झाड़-फूंक के चक्कर में पड़ जाते हैं, जो जानलेवा साबित हो सकता है। सांप काटने के बाद निम्नलिखित काम कभी नहीं करने चाहिए:

  • काटे गए स्थान को चाकू से चीरा न लगाएं।
  • जहर को मुंह से चूसने की कोशिश बिल्कुल न करें।
  • घाव पर बहुत कसकर पट्टी न बांधें।
  • मरीज को दौड़ने या चलने के लिए मजबूर न करें।

सबसे सुरक्षित तरीका यही है कि पीड़ित को स्थिर रखें और यथाशीघ्र डॉक्टर की देखरेख में चिकित्सा उपचार शुरू करवाएं। यह सुनिश्चित करना ही जान बचाने की कुंजी है।

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