सरकार का सख्त एक्शन और डॉक्टर का निलंबन
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में स्थित क्षेत्रीय अस्पताल में एक महिला की मौत का मामला तूल पकड़ता जा रहा था, जिसके चलते आखिरकार सुक्खू सरकार को सख्त कदम उठाना पड़ा है। अस्पताल में इलाज के दौरान लापरवाही के गंभीर आरोपों का सामना कर रही डॉक्टर अनु को सरकार ने निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई तब हुई जब स्थानीय लोग और मृतक महिला के परिजन लंबे समय से न्याय की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए थे। कुल्लू के विधायक सुंदर सिंह ठाकुर ने स्वयं धरना स्थल पर पहुंचकर लोगों को इस फैसले की जानकारी दी। निलंबन आदेश की प्रति आंदोलन का नेतृत्व कर रहे बंटी सराजी द्वारा भी साझा की गई है।
स्वास्थ्य सचिव ने जारी किए आदेश
हिमाचल प्रदेश की स्वास्थ्य सचिव एम सुधा द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आदेशों के अनुसार, डॉक्टर अनु को तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त कर दिया गया है। आदेश में स्पष्ट उल्लेख है कि 21 जून को कुल्लू के क्षेत्रीय अस्पताल में डॉक्टर अनु ने एक मरीज का ऑपरेशन किया था, जिसके बाद दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से महिला की मृत्यु हो गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टर के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं। निलंबन की इस अवधि के दौरान डॉक्टर अनु का मुख्यालय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण निदेशालय, शिमला निर्धारित किया गया है।
दस दिनों से चल रहा था विवाद
यह पूरा मामला पिछले 10 दिनों से लगातार चर्चा में बना हुआ था। मृतका की पहचान मंडी जिले की बालीचौकी निवासी मंजू के रूप में हुई है, जिन्होंने 21 जून को एक बेटी को जन्म दिया था। प्रसव के तुरंत बाद उनकी मौत हो गई, जिसने पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ा दी। हालांकि, दो दिनों तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई न होने पर लोगों का गुस्सा भड़क उठा और अस्पताल परिसर में भारी हंगामा देखने को मिला। सोमवार को बंटी सराजी के नेतृत्व में युवाओं ने उग्र प्रदर्शन किया और अस्पताल परिसर में ही आमरण अनशन पर बैठ गए।
जांच रिपोर्ट ने बढ़ाई लोगों की नाराजगी
हंगामे के बीच जब अस्पताल प्रबंधन ने दोपहर तीन बजे जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की, तो उसमें मंजू की मौत के कारणों का जिक्र तो था, लेकिन यह भी कहा गया कि डॉक्टर अनु के पास मरीज को कहीं और रेफर करने का समय नहीं बचा था। चौंकाने वाली बात यह थी कि उस रिपोर्ट में डॉक्टर के खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई का कोई उल्लेख नहीं था। इस रिपोर्ट को देखकर अस्पताल में मौजूद भीड़ फिर से उत्तेजित हो गई और दोबारा हंगामा शुरू हो गया। लोगों का कहना था कि यह लापरवाही को छिपाने का प्रयास है।
विधायक की पहल और बेटी के भविष्य पर आश्वासन
प्रदर्शन के दौरान अस्पताल परिसर में नेताओं का जमावड़ा लगा रहा और विधायक व स्थानीय जनप्रतिनिधियों के बीच तीखी बहसबाजी भी हुई। भीड़ की मुख्य मांग थी कि मृतका की नवजात बेटी के पालन पोषण के लिए 40 लाख रुपये की FD (सावधि जमा) करवाई जाए। इस मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए विधायक सुंदर सिंह ठाकुर ने घोषणा की कि वे स्वयं बच्ची के पालन पोषण और उसकी शिक्षा का पूरा खर्च उठाएंगे। विधायक द्वारा दिए गए इस आश्वासन और डॉक्टर के निलंबन की पुष्टि के बाद स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया गया है। यह घटना कुल्लू स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर गई है।
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